वायनाड में प्रियंका गांधी का दौरा बना विवाद…स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी…पार्टी में गुटबाजी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इन दिनों अपने वायनाड लोकसभा क्षेत्र के दौरे पर हैं। 11 सितंबर से शुरू हुआ उनका यह दौरा 22 सितंबर तक चलेगा। लेकिन, यह दौरा जितना चर्चित है, उतना ही विवादों में भी घिर गया है। स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रियंका के कार्यक्रमों की जानकारी उन्हें नहीं दी जाती और वे पार्टी की सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर चल रही हैं।
प्रियंका गांधी का वायनाड प्रवास
प्रियंका ने अब तक अपने दौरे में कई धार्मिक नेताओं, लेखकों, समाजसेवियों और भूस्खलन प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सुल्तान बथेरी में एक आंगनवाड़ी का उद्घाटन किया और बच्चों के लिए खिलौने खरीदकर दिए। नीलांबुर रेल स्टेशन पर विकास मुद्दों पर चर्चा की। कटनायक्कन आदिवासी समुदाय से बातचीत की। मुत्तिल स्थित वायनाड मुस्लिम ऑर्फनेज का दौरा किया, हालांकि सहयोगी दल IUML को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
इसके साथ ही सोनिया गांधी के साथ उन्होंने चूंडले स्थित कॉफी बोर्ड अनुसंधान केंद्र और एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन का दौरा किया। इसके बावजूद स्थानीय कांग्रेस इकाई को शिकायत है कि उन्हें प्रियंका के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर तक नहीं दिया जाता।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी क्यों?
वायनाड जिला कांग्रेस प्रमुख एन. डी. अप्पाचन ने साफ कहा कि “हमें उनके कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दी जाती। सब कुछ उनके दफ्तर से तय होता है। वह स्थानीय राजनीति में शामिल नहीं होना चाहतीं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, प्रियंका का यह दौरा समय की दृष्टि से भी सही नहीं माना जा रहा।
इस समय विधानसभा का सत्र चल रहा है। वायनाड की सात सीटों में से पांच कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF के पास हैं। विपक्ष के लिए यह सत्र सरकार पर दबाव बनाने का मौका था, लेकिन प्रियंका के दौरे से स्थानीय नेताओं का ध्यान बंट गया।
नजरअंदाज हुए पार्टी कार्यक्रम
विवाद तब और गहराया जब प्रियंका और सोनिया गांधी ने उस वक्त वायनाड का दौरा किया, जब कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) सदस्य रमेश चेन्नीथला यहां ‘ड्रग्स के खिलाफ पैदल मार्च’ कर रहे थे। स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर प्रियंका इस कार्यक्रम की शुरुआत करतीं तो कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता।
लगातार झटके झेल रही है कांग्रेस
प्रियंका गांधी के दौरे के दौरान वायनाड जिला कांग्रेस में कई विवाद और संकट सामने आए। दौरे की शुरुआत में ही स्थानीय कांग्रेस नेता जोस नेल्लेदम ने आत्महत्या कर ली। दूसरे स्थानीय नेता के. थैंकाचन की गिरफ्तारी और बाद में बरी होने से गुटबाजी उजागर हुई। पूर्व जिला कोषाध्यक्ष एन. एम. विजयन की बहू पद्मजा के आत्महत्या प्रयास ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दीं। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि जिला इकाई गहरी अंदरूनी कलह से जूझ रही है।
पार्टी आलाकमान का दखल
स्थिति को संभालने के लिए शुक्रवार को कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने वायनाड जिला कांग्रेस कमेटी के नेताओं के साथ बैठक की। उनका प्रयास है कि प्रियंका के दौरे से पैदा हुए असंतोष को दूर किया जा सके और कार्यकर्ताओं का विश्वास फिर से बहाल हो।
प्रियंका गांधी का वायनाड दौरा जहां उनके व्यक्तिगत संवाद और सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है, वहीं यह स्थानीय कांग्रेस संगठन के लिए सिरदर्द भी बन गया है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, पार्टी कार्यक्रमों से दूरी और जिले में बढ़ते विवाद कांग्रेस के लिए संकट का संकेत हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रियंका का यह दौरा वाकई क्षेत्रीय राजनीति को मजबूत करेगा या फिर कांग्रेस संगठन को और कमजोर कर जाएगा? (प्रकाश कुमार पांडेय)





