2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस
पांच राज्यों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त
इस साल 2026 में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अभी से अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। इसके साथ ही संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने और चुनाव प्रबंधन को मजबूत करने का फैसला लिया गया है। परवेक्षकों की नियुक्ति में राहुल गांधी की टीम की छाप साफ दिखाई दे रही है।
असम: प्रियंका गांधी की अगुवाई में चुनावी रणनीति
असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी को पहले ही स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया जा चुका है। अब छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को वरिष्ठ परवेक्षक और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने असम की मौजूदा भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार, माफिया राज और घुसपैठ जैसे मुद्दों को लेकर तीखे हमले किए हैं। पार्टी का दावा है कि हेमंत बिस्वा शर्मा सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी है। कांग्रेस असम में गौरव गोगोई को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में भी दिख रही है। पार्टी का फोकस युवाओं, किसानों और मजदूरों को जोड़ने पर है।
केरल: युवा चेहरों पर भरोसा
केरल में कांग्रेस ने युवा और आक्रामक कैंपेन की रणनीति अपनाई है। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को केरल का पर्यवेक्षक बनाया गया है। उनके साथ कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार और कर्नाटक के मंत्री के. जे. जॉर्ज को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछले दो विधानसभा चुनावों से केरल में लेफ्ट सरकार सत्ता में है, लेकिन हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद पार्टी को उम्मीद है कि 2026 में सत्ता परिवर्तन संभव है। कांग्रेस का फोकस युवाओं, रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर रहेगा।
पश्चिम बंगाल: संगठन को फिर से खड़ा करने की चुनौती
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती वाला राज्य माना जा रहा है। पार्टी यहां अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है। कांग्रेस ने सुदीप राय बर्मन, शकील अहमद खान और प्रकाश जोशी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
पार्टी का लक्ष्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकना है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमटी राजनीति में कांग्रेस अपनी पहचान दोबारा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
तमिलनाडु: गठबंधन और सीट बंटवारे पर जोर
तमिलनाडु में कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ तालमेल और सीट बंटवारे को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और तेलंगाना के नेता उत्तम कुमार रेड्डी को पर्यवेक्षक बनाया है। यहां कांग्रेस डीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ती है, ऐसे में रणनीति गठबंधन की मजबूती और साझा मुद्दों पर केंद्रित होगी। पार्टी सामाजिक न्याय, संघीय ढांचे और केंद्र‑राज्य संबंधों जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
छत्तीसगढ़: संगठनात्मक अनुभव का लाभ
हालांकि छत्तीसगढ़ में फिलहाल विधानसभा चुनाव नहीं हैं, लेकिन पार्टी ने यहां के अनुभवी नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी देकर उनके संगठनात्मक अनुभव का उपयोग किया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम की अहम जिम्मेदारी सौंपना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राहुल गांधी की टीम..युवाओं की छाप
पांच राज्यों के लिए बनाई गई यह टीम साफ संकेत देती है कि कांग्रेस अब युवा नेताओं और आक्रामक राजनीति पर भरोसा कर रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि टीम वर्क के जरिए ही भाजपा को चुनौती दी जा सकती है। कांग्रेस नेताओं ने संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव को चुनावी मुद्दा बनाने की बात कही है।
आने वाले महीनों में चुनौतीपूर्ण राह
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले तीन‑चार महीने कांग्रेस के लिए बेहद अहम होंगे। पार्टी को संगठन, नेतृत्व और जन मुद्दों पर एकसाथ काम करना होगा। हालांकि पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस 2026 के विधानसभा चुनावों को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। कुल मिलाकर, कांग्रेस ने पांच राज्यों में चुनावी समर की तैयारी शुरू कर दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाती है और क्या पार्टी सत्ता की लड़ाई में भाजपा और अन्य दलों को कड़ी टक्कर दे पाती है।





