नई दिल्ली। भारत में युवा दंपतियों के बीच बांझपन (Infertility) एक गंभीर और तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते जीवनशैली और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 2026 में गर्भधारण और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बांझपन के कारण कई दंपति महंगे इलाज जैसे IVF और IUI पर लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में प्राकृतिक तरीकों से भी गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।भारत में क्यों बढ़ रही है Infertility की समस्या?विशेषज्ञों के अनुसार, शहरीकरण और बदलती जीवनशैली ने प्रजनन क्षमता पर गहरा असर डाला है। इसके प्रमुख कारण हैं
अत्यधिक तनाव और मानसिक दबाव
गर्भनिरोधकों का बढ़ता इस्तेमाल
असंतुलित दिनचर्या और बदली हुई जीवनशैलीइसके अलावा, कुछ अन्य कारण भी बांझपन को बढ़ावा दे रहे हैं। खराब खानपान। प्रदूषण। मोटापा। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)। हार्मोनल असंतुलन। धूम्रपान और शराब सेवन।
डायबिटीज और एंडोमेट्रियोसिस ये सभी कारण पुरुषों और महिलाओं—दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।Pregnancy Tips: गर्भधारण की संभावना कैसे बढ़ाएं?
1. ओव्यूलेशन को सही तरीके से ट्रैक करेंजो महिलाएं जल्दी गर्भधारण करना चाहती हैं, उन्हें अपने फर्टाइल विंडो को पहचानना बेहद जरूरी है।
इसके लिए आप पीरियड ट्रैकिंग ऐप। ओव्यूलेशन टेस्ट किट। बेसल बॉडी टेम्परेचर चार्ट का इस्तेमाल कर सकती हैं।
2. बॉडी मास इंडेक्स (BMI) संतुलित रखें
विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर का वजन प्रजनन क्षमता में अहम भूमिका निभाता है। 18.5 से कम या 24.9 से अधिक BMI हार्मोनल असंतुलन और ओव्यूलेशन में समस्या पैदा कर सकता है। वहीं 18.5 से 24.9 के बीच BMI को गर्भधारण के लिए बेहतर माना जाता है।
3. फर्टिलिटी बढ़ाने वाला लें आहार
खानपान का सीधा असर प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ता है।
डाइट में शामिल करें। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और सब्जियां। मछली, चिकन और दालें। नट्स और हेल्दी फैट।
ऑलिव ऑयल और एवोकाडो। ज्यादा प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
4. तनाव को करें नियंत्रित
तनाव सीधे गर्भधारण को प्रभावित न करे, लेकिन यह ओव्यूलेशन को नियंत्रित करने वाले हार्मोन को जरूर प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, ज्यादा तनाव से यौन इच्छा भी कम हो सकती है। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान,
गहरी सांस लेने के अभ्यास फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
5. सुरक्षित प्राकृतिक सप्लीमेंट्स पर विचार करें
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ पोषक तत्व अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं, जैसे—
फोलिक एसिड
जिंक
आयरन
ओमेगा-3 फैटी एसिड
विटामिन D
हालांकि, इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
नोट: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। इस आर्टिकल में बताए गए उपाय केवल सुझाव हैं। किसी भी उपचार, दवा, सप्लीमेंट या डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।





