बजट 2026 से पहले झटका: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर ₹49 महंगा, रेस्टोरेंट और होटल कारोबार पर बढ़ेगा बोझ
नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 की प्रस्तुति से ठीक पहले आम लोगों और कारोबारी वर्ग को महंगाई का एक और झटका लगा है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹49 की बढ़ोतरी की गई है। नई कीमतें आज यानी 1 फरवरी 2026 से लागू हो गई हैं। यह बढ़ोतरी हर महीने होने वाली नियमित मूल्य समीक्षा के तहत की गई है।
दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर ₹1740.50 का हुआ
नई दरों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की खुदरा कीमत अब ₹1740.50 हो गई है। इससे पहले 1 जनवरी 2026 को इसकी कीमत ₹1691.50 थी। यानी महज एक महीने में सिलेंडर ₹49 महंगा हो गया है। हालांकि यह कीमत दिसंबर 2025 की तुलना में पहले ही करीब ₹110 अधिक थी, ऐसे में फरवरी की बढ़ोतरी ने कारोबारियों की चिंता और बढ़ा दी है।
घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं
राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। आम उपभोक्ताओं को इस्तेमाल होने वाला रसोई गैस सिलेंडर पहले की दर पर ही उपलब्ध रहेगा। इससे मध्यम वर्ग और आम परिवारों को फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं झेलना पड़ेगा।
होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड कारोबार पर असर
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस, बेकरी और स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर पड़ेगा। ये सभी व्यवसाय अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर रहते हैं। कारोबारियों का कहना है कि गैस की कीमत बढ़ने से खर्च में इजाफा होगा, जिसका असर अंततः खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों और ठेला संचालकों के लिए यह बढ़ोतरी परेशानी का सबब बन सकती है।
एलपीजी आयात पर निर्भरता
भारत अपनी कुल घरेलू एलपीजी खपत का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश में एलपीजी की कीमतों पर पड़ता है। घरेलू एलपीजी के मामले में सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रभावी कीमत (Effective Price) को नियंत्रित करती है। यही कारण है कि घरेलू सिलेंडर की कीमतें लंबे समय तक स्थिर रखी जाती हैं या सब्सिडी के जरिए संतुलन बनाया जाता है।
कमर्शियल एलपीजी की कीमत कैसे तय होती है?
तेल मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें तेल विपणन कंपनियां (OMCs) स्वतंत्र रूप से तय करती हैं। इसमें सरकार की सीधी दखल नहीं होती।
देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां—
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इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL)
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हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)
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भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)
अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और अन्य कारोबारी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हर महीने नई दरें तय करती हैं।
पिछले साल फरवरी से अब भी सस्ता
हालांकि मौजूदा बढ़ोतरी से कारोबारियों को झटका लगा है, लेकिन फरवरी 2026 की कीमतें पिछले साल फरवरी की तुलना में अब भी कम हैं। जहां आज दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1740.50 है, वहीं पिछले साल इसी दिन इसकी कीमत ₹1797 थी। इस लिहाज से देखा जाए तो सालाना आधार पर कीमतों में कुछ राहत जरूर है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का सीधा असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें इंपोर्ट पैरिटी प्राइस को प्रभावित करती हैं। इसमें कई कारक शामिल होते हैं, जैसे—
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डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर
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समुद्री मालभाड़ा (Ocean Freight)
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बीमा खर्च
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सीमा शुल्क (Customs Duty)
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अन्य लॉजिस्टिक लागत
इन सभी खर्चों के आधार पर देश में एलपीजी की अंतिम कीमत तय होती है।
बजट से पहले बढ़ोतरी के मायने
बजट वाले दिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ना राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। हालांकि यह फैसला नियमित मासिक संशोधन का हिस्सा है, लेकिन इसका समय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजरें केंद्रीय बजट 2026 पर टिकी हैं, जहां सरकार महंगाई, टैक्स और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर क्या कदम उठाती है, यह देखना दिलचस्प होगा। कुल मिलाकर, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹49 की बढ़ोतरी ने कारोबारियों की लागत बढ़ा दी है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख और बजट घोषणाओं के आधार पर एलपीजी कीमतों को लेकर आगे की तस्वीर साफ होगी।