उत्तर भारत से कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया है। पार्टी को उम्मीद है कि अब दक्षिण भारत में ही उसे कुछ कामयाबी मिल सकती है। जिसके लिए कांग्रेस ने कर्नाटक में जबरदस्त मेहनत की और विधानसभा चुनाव जीतने में बड़ी कामयाबी मिल गई। कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस का पेंच मुख्यमंत्री पद को लेकर फंस गया। जिसके लिए बीते चार दिनों से माथापच्ची चल रही है। कभी डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बनती नजर आई तो कभी सीएम की रेस में सिध्दारमैया आगे दिखाई दिए। आज बुधवार को तमाम कयासों के बाद अंतत: मान लिया गया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिध्दारमैया का बनना लगभग तय हो गया है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब कांग्रेस के संकट मोचन कहे जाने वाले डीके शिवकुमार की कड़ी मेहनत से कांग्रेस को चुनावी जीत मिली है फिर उन्हे मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया गया है। इसके पीछे कांग्रेस के अपने अंदरुनी कारण हो सकते हैं,लेकिन सिध्दारमैया को जिन पांच प्रमुख कारणों से सीएम बनाए जाना तय माना गया है वो इस प्रकार हैं:
पहला कारण: सिध्दारमैया की सक्रियता
कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस दो दिग्गज नेताओं का नाम सबसे पहले आता है। एक सिध्दारमैया और दूसरा बीएस येदियुरप्प। दोनों की नेताओं ने कर्नाटक में कांग्रेस की पैठ बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। जिसमें से येदियुरप्पा अपने निजी कारणों से सक्रिय राजनीति से बाहर हो गए। जबकि सिध्दारमैया लगातार राजनीति में सक्रिय रहे और कांग्रेस को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर मेहनत करते रहे। जिसके कारण उन्हे एक बार फिर सीएम की कुर्सी मिलना लगभग तय हो गया है।
दूसरा कारण: सोशल इंजीनियरिंग में फिट
कांग्रेस के कद्दावर नेता सिध्दारमैया अहिंदा के जरिए राज्य के अल्पसंख्यकों,दलितों और पिछड़ा वर्ग के लोगों को जोड़ने में बड़ा योगदान दिया। इन वर्गों के कांग्रेस से जुड़ने के कारण कर्नाटक में कांग्रेस की मजबूत पकड़ बन गई। इसी तरह के प्रयास कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग में फिट बैठती है। जिसके कारण सिध्दारमैया को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल रहा है।
तीसरा कारण: रिकॉर्ड भी बनाया
मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे दिख रहे सिध्दारमैया 2013 में जब मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। उन्होंने बीते 40 सालों में 5 साल सीएम रहकर पूरा कार्यकाल करने वाले पहले मुख्यमंत्री रहे और रिकॉर्ड बनाया। इस दौरान उन्होंने कई सरकारी योजनाएं चलाई जिसके कारण उनकी जमीन पकड़ बनी और लोगों के बीच सिध्दारमैया लोकप्रिय हो गए।
चौथा कारण: सीएम के लिए पहली पसंद
जैसा कि पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बन रही है। एग्जिट और ओपिनियन पोल ने भी कांग्रेस की सरकार बनने का अनुमान लगाया था। जिसमें सिध्दारमैया को मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद बताया गया था। एबीपी सी वोटर के एग्जिट पोल में 40 प्रतिशत से अधिक लोगों की पसंद सिध्दारमैया ही थे। हो सकता है कांग्रेस ने लोगों की पसंद को ध्यान रखते हुए सिध्दारमैया के नाम पर सहमति दी हो।
पांचवा कारण: भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त
राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त रहना अपने आपमें बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। यह उपलब्धि कांग्रेस के दिग्गज नेता सिध्दारमैया को प्राप्त हुई है। कई पदों पर पर रहने के बाद भी सिध्दारमैया पर कभी कोई भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि वे एक बेदाग नेता हैं और लोगों के लिए काम करते हैं। कांग्रेस हाई कमान से लेकर कई बड़े नेता भी इस बात को स्वीकारते हैं कि सिध्दारमैया कभी किसी लेन देने के मामले में नहीं रहे हैं। उन्होंने ईमानदारी से जनता के लिए काम किया है।





