बर्फीली हवाओं से कंपकंपा उठा प्रदेश, तीन दिन तक शीतलहर का प्रकोप जारी रहने के आसार
भोपाल। मध्य प्रदेश में सर्दी इस बार अपने तीखे तेवर दिखा रही है। उत्तर भारत से आने वाली बर्फीली हवाओं ने प्रदेश को ठिठुरन की गिरफ्त में ले लिया है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक कड़ाके की ठंड बने रहने की चेतावनी दी है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, विदिशा, राजगढ़, सीहोर, शाजापुर, सिवनी और शहडोल समेत कई जिलों को शीतलहर के लिए अलर्ट पर रखा गया है। कई इलाकों में कोल्ड डे जैसी स्थिति बन गई है। पारा अचानक नीचे गिरने से रात और सुबह के समय हवाओं में सिहरन साफ महसूस की जा रही है।
मध्य प्रदेश में तापमान तेजी से गिरते हुए 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। कई शहरों में सोमवार की रात पारा 6 डिग्री से भी नीचे रिकॉर्ड किया गया। शहडोल जिले के कल्याणपुर में न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे कम है। भोपाल में पिछले चार दिनों से लगातार बर्फीली हवाएं चल रही हैं, जिससे दिन में भी ठंड का असर सामान्य से ज्यादा महसूस किया जा रहा है। राजधानी में नवंबर महीना 84 साल बाद इतने कड़े ठंडे रिकॉर्ड के साथ दर्ज हुआ था, और दिसंबर में भी यह सिलसिला जारी है।
इंदौर भी इस भीषण सर्दी का अपवाद नहीं रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। 2015 के बाद यह सबसे ठंडी रात मानी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में हुए ताजा हिमपात के बाद उत्तर से आने वाली हवाएं मध्य भारत में तेजी से घुस रही हैं, जिसके कारण तापमान में तीव्र गिरावट देखने को मिल रही है।
मंगलवार से 11 दिसंबर तक राज्य के एक बड़े हिस्से में शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। नरसिंहपुर में कोल्ड डे की चेतावनी जारी की गई है। इसका मतलब यह है कि दिन के समय भी तापमान सामान्य से बेहद कम रहेगा और ठंड का प्रकोप बना रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की भीड़
ठंड बढ़ने का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। भोपाल के जहांगीराबाद स्थित शासकीय पल्मोनरी मेडिसिन सेंटर में हालात यह हैं कि एक भी बिस्तर खाली नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, ठंड और मौसम में तेजी से आते उतार-चढ़ाव के कारण फेफड़ों की समस्या, सांस लेने में दिक्कत, गैस, पेट दर्द और बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रशांत यादव ने बताया कि 50 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में सभी वार्ड भर चुके हैं। मरीजों को ठंड से राहत देने के लिए हर दो बिस्तरों के बीच एक हीटर लगाया गया है। उनका कहना है कि रात के समय ठंड असहनीय हो जाती है, जिससे सांस और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं।
डॉ. यादव ने बताया, “पिछले तीन दिनों से ठंड में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सबसे अधिक मरीज फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं और श्वसन तंत्र की परेशानियों के साथ आ रहे हैं।” उन्होंने कहा कि यदि मरीजों की संख्या और बढ़ी तो अस्पताल में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
अस्पताल में गैस और पेट दर्द के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार, ठंडी हवाओं में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है और इससे मामूली संक्रमण भी बढ़ सकता है। कई सामान्य लोग भी एहतियातन अस्पताल पहुंच कर अपनी जांच करवाने लगे हैं।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग ने आम जनता को सावधान रहने के लिए कहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह और देर रात बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़ों का उपयोग करें, और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अचानक तापमान गिरने से हाइपोथर्मिया और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
प्रदेश के कई शहरों में नगर निगम और प्रशासन ने भी अलाव की व्यवस्था शुरू कर दी है ताकि गरीबों और सड़क किनारे रहने वालों को ठंड से राहत मिल सके। वहीं, ग्रामीण इलाकों में लोग पारंपरिक तरीके से आग सेंक कर ठंड से मुकाबला कर रहे हैं।
फिलहाल मौसम के तेवरों को देखते हुए यह साफ है कि मध्य प्रदेश में सर्दी आने वाले दिनों में और अधिक जोर दिखा सकती है। शीतलहर का प्रभाव अगले तीन दिनों में चरम पर रहने की संभावना है। प्रशासन ने हालात पर नजर बनाए रखते हुए जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।