सड़क किनारे न खड़े हों बस-रिक्शा या टेंपो
हादसों पर लगाम के लिए सीएम योगी का सख्त आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सड़क आवागमन के लिए होती है, वाहन खड़ा करने के लिए नहीं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सड़कों के किनारे किसी भी स्थिति में बस, टेंपो या रिक्शा स्टैंड न बनाए जाएं। अव्यवस्थित पार्किंग, सड़क किनारे खड़े डग्गामार वाहन, कतारबद्ध ट्रक और लंबे समय तक खड़े भारी वाहन गंभीर हादसों का कारण बनते हैं, इसलिए इनके खिलाफ प्रभावी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यूपी के मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा माह 1 से 31 जनवरी की तैयारियों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए। नए साल की शुरुआत सिर्फ कार्यक्रमों और बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ा जाए।
पेट्रोलिंग बढ़ाने और अव्यवस्थित पार्किंग पर कार्रवाई के निर्देश
सीएम योगी ने एक्सप्रेसवे और हाईवे पर पेट्रोलिंग बढ़ाने, एंबुलेंस और क्रेन की संख्या में इजाफा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हाईवे किनारे खड़े वाहन अक्सर तेज रफ्तार यातायात के लिए बड़ा खतरा बनते हैं। विशेष रूप से रात के समय ऐसे वाहन भीषण दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इसलिए सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
साथ ही, मकान निर्माण सामग्री जैसे ईंट, बालू, सरिया आदि सड़क पर बिखरी न रहें, इसके लिए स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सड़क पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण दुर्घटनाओं को आमंत्रण देता है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ई-4 मॉडल पर होगा सड़क सुरक्षा अभियान
मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा माह के दौरान ई-4 मॉडल—शिक्षा (Education), प्रवर्तन (Enforcement), इंजीनियरिंग (Engineering) और इमरजेंसी केयर (Emergency Care)—को पूरी गंभीरता से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को केवल यातायात नियमों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझाना जरूरी है कि सड़क सुरक्षा उनके अपने जीवन और परिवार से जुड़ा विषय है। शिक्षा के माध्यम से बच्चों, युवाओं और आम नागरिकों में सही सड़क व्यवहार विकसित किया जाए। प्रवर्तन के तहत नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। इंजीनियरिंग के जरिए ब्लैक स्पॉट और क्रिटिकल पॉइंट की पहचान कर उन्हें सुधारा जाए, जबकि इमरजेंसी केयर के तहत त्वरित एंबुलेंस सेवा और बेहतर ट्रॉमा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
एंबुलेंस और स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच
सीएम योगी ने निर्देश दिए कि एंबुलेंस सेवाओं और स्कूल वाहनों की फिटनेस की विशेष जांच कराई जाए। अनफिट और नियमों के अनुरूप न होने वाले वाहन किसी भी स्थिति में सड़क पर न चलें। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
दुर्घटनाओं से जागरूकता फैलाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा माह के पहले सप्ताह में जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाए। वास्तविक दुर्घटनाओं के उदाहरण सामने रखकर लोगों को समझाया जाए, ताकि वे खतरे को गंभीरता से समझ सकें। पब्लिक एड्रेस सिस्टम का व्यापक उपयोग किया जाए, जिससे यह संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचे कि सड़क सुरक्षा किसी और की नहीं, बल्कि उसकी अपनी जिम्मेदारी है। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), आपदा मित्र, स्काउट गाइड और सिविल डिफेंस जैसे संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों की सहभागिता से ही यह अभियान वास्तविक जन आंदोलन बन सकेगा।
नवंबर तक 24,776 लोगों की गई जान
आंकड़ों के अनुसार, इस साल नवंबर तक प्रदेश में 46,223 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 24,776 लोगों की मौत हुई है। मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल प्रशासनिक या तकनीकी समस्या नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़ी सामाजिक चुनौती है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि ब्लैक स्पॉट और क्रिटिकल पॉइंट की पहचान कर तत्काल सुधार किया जाए। खराब साइनज, अव्यवस्थित कट, अंधे मोड़ और अनुचित स्पीड ब्रेकर दुर्घटनाओं को बढ़ाते हैं। केवल टेबल-टॉप स्पीड ब्रेकर ही बनाए जाएं और सभी सड़कों का नियमित रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
चालान ही समाधान नहीं
आदतन उल्लंघनकर्ताओं पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि केवल चालान करना सड़क दुर्घटनाओं का स्थायी समाधान नहीं है। जो लोग आदतन यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने और वाहन सीज करने की स्पष्ट नियमावली बनाकर उसका सख्ती से पालन कराया जाए। स्टंटबाजी करने वाले युवकों के खिलाफ भी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दिए गए।
टॉप पांच जिलों के डीएम से संवाद
मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं के मामले में शीर्ष पांच जिलों—हरदोई, प्रयागराज, आगरा, कानपुर नगर सहित अन्य—के जिलाधिकारियों से संवाद कर दुर्घटनाओं के कारणों और उनके समाधान पर चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि इन जिलों में विशेष कार्ययोजना बनाकर सख्ती और संवेदनशीलता के साथ लागू की जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का पालन, नागरिकों की सहभागिता और प्रशासन की सक्रियता से ही प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।