सीएम योगी ने किया गोरखपुर पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ — डिजिटल ज्ञान और साहित्यिक उत्सव का संगम
गोरखपुर से विशेष रिपोर्ट। ज्ञान, साहित्य और संस्कृति के संगम का प्रतीक गोरखपुर पुस्तक महोत्सव शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शुभारंभ के साथ भव्य रूप से आरंभ हुआ। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में 1 नवंबर से 9 नवंबर तक चलने वाले इस साहित्यिक महाकुंभ का आयोजन नेशनल बुक ट्रस्ट (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास) की ओर से किया जा रहा है।
- योगी ने किया महोत्सव शुभारंभ
- गोरखपुर में सजे ज्ञान के मेले
- साहित्यिक महाकुंभ में उमड़ा उत्साह
- 100 प्रकाशक, 200 से अधिक स्टॉल
- डिजिटल युग में ज्ञान का संगम
- राष्ट्रीय पुस्तक न्यास कर रहा आयोजन
- विश्वविद्यालय परिसर में संस्कृति का उत्सव
- हर वर्ग के लिए किताबें उपलब्ध
- ई-पुस्तकालय से जोड़ रहा नवाचार
- गोरखपुर बना साहित्य का केंद्र
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्वलन कर महोत्सव का उद्घाटन किया और कहा कि “पुस्तकें विचारों का सबसे शुद्ध माध्यम हैं, जो समाज को दिशा और व्यक्तित्व को स्थायित्व देती हैं।” उन्होंने इस आयोजन को “ज्ञान का पर्व और संस्कारों का उत्सव” बताते हुए कहा कि यह गोरखपुर को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा।
साहित्यिक महाकुंभ में जुटे देशभर के विद्वान
उद्घाटन समारोह में नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन और अनेक प्रख्यात लेखक, कवि, शिक्षाविद और पुस्तक प्रेमी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “किताबें व्यक्ति के विचारों को ऊंचाई देती हैं, और एक पुस्तक महोत्सव पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे डिजिटल युग में भी पुस्तक पठन की संस्कृति को जीवित रखें। उन्होंने कहा किताबें केवल ज्ञान नहीं देतीं, वे संवेदनशीलता और विवेक भी विकसित करती हैं।
100 से अधिक प्रकाशक, 200 से अधिक स्टॉल
इस नौ दिवसीय आयोजन में 100 से अधिक प्रकाशकों के 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। यहां हिंदी, अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं की हजारों किताबें उपलब्ध हैं — साहित्य, विज्ञान, इतिहास, दर्शन, धर्म, बाल साहित्य और समसामयिक विषयों पर। महोत्सव में बच्चों के लिए कहानी सत्र, चित्रकला प्रतियोगिता और शैक्षणिक क्विज़ जैसे कई मनोरंजक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं वयस्क पाठकों के लिए चर्चासत्र, कवि सम्मेलन, साहित्यिक गोष्ठियां और लेखन कार्यशालाएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
डिजिटल युग में ज्ञान का संगम
इस बार पुस्तक महोत्सव की विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप भी है। आयोजन में आगंतुकों को राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय (National Digital Library of India) का अनुभव करने का अवसर मिलेगा। यहां 3,000 से अधिक ई-पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिन्हें छात्र, शोधार्थी और पाठक डिजिटल माध्यम से पढ़ सकेंगे।सीएम योगी ने कहा कि “डिजिटल ज्ञान और पारंपरिक पुस्तकों का यह संगम नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरक मंच बनेगा।” उन्होंने इसे ‘ज्ञान युग का महोत्सव’ करार दिया।
गोरखपुर को मिली नई पहचान
गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में लगे रंगीन बैनर, खुले आसमान के नीचे सजे पुस्तक स्टॉल और साहित्यिक चर्चाओं की गूंज ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। आयोजन स्थल पर छात्रों, शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों की भीड़ देखने को मिली। नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मराठे ने कहा कि “यह केवल एक पुस्तक मेला नहीं, बल्कि विचारों का उत्सव है। गोरखपुर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर में इसका आयोजन भारत के ज्ञान-संवाद की नई दिशा तय करेगा।
साहित्य और समाज का सेतु
महोत्सव में आयोजित सत्रों में लेखकों द्वारा पुस्तकों का विमोचन, ‘युवा लेखन और डिजिटल पठन संस्कृति’ पर परिचर्चा, और ‘भारतीय भाषाओं की समृद्धि’ पर विशेष चर्चा की जाएगी। आयोजन का उद्देश्य है — साहित्य, समाज और शिक्षा को एक साझा मंच पर लाना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “पुस्तकें समाज के लिए वही हैं, जो आत्मा के लिए प्रकाश।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इंटरनेट और सोशल मीडिया की तेज़ दुनिया में भी किताबों के साथ समय बिताएं, क्योंकि “पुस्तकें व्यक्ति को स्थिरता और विवेक देती हैं।”
बच्चों के लिए मनोरंजन और सीख का मेल
महोत्सव में बच्चों के लिए विशेष पुस्तक खंड बनाया गया है, जहां कहानियों, चित्रों और ज्ञान से भरी किताबें उपलब्ध हैं। साथ ही डिजिटल शिक्षा उपकरण, ऑडियो-बुक स्टॉल और रोचक शिक्षण खेलों ने बच्चों का ध्यान खींचा। यह आयोजन बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरंजन दोनों का संगम बन गया है।
समापन 9 नवंबर को, कवि सम्मेलन और पुरस्कार समारोह के साथ
गोरखपुर पुस्तक महोत्सव का समापन 9 नवंबर को होगा। अंतिम दिन कवि सम्मेलन, युवा लेखन सम्मान और साहित्यिक पुरस्कार वितरण के साथ इस ज्ञान उत्सव का समापन किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने अपने उद्बोधन में कहा — “भारत की आत्मा उसके शब्दों में बसती है, और यह पुस्तक महोत्सव उसी आत्मा को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। गोरखपुर पुस्तक महोत्सव ने आज न केवल शहर, बल्कि पूरे पूर्वांचल को एक नए साहित्यिक उत्सव के केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। (प्रकाश कुमार पांडेय )





