सीएम डॉ.मोहन यादव ने किया पितरों का तर्पण…जनसेवा के साथ..पितृ तर्पण में दिखे संस्कार और श्रद्धा

CM Mohan Yadav performed Tarpan for his ancestors

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ॥

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की पहचान प्रदेश की जनता के प्रति अपने दायित्वों और जनसेवा के संकल्प से जुड़ी है। लेकिन सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच अपनी जड़ों, संस्कारों और पारिवारिक परंपराओं को याद रखना भी भारतीय जीवन पद्धति का अहम हिस्सा है। पितृ विसर्जन अमावस्या के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया और विधि-विधान से तर्पण कर पितरों के प्रति अपनी आस्था और कर्तव्य का निर्वहन किया। यह अवसर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान का नहीं, बल्कि उन संस्कारों को नमन करने का भी है, जिन्हें भारतीय परंपरा में पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता है।

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव प्रदेश की जनता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारिवारिक संस्कारों को भी महत्व देते हैं। पितृ पक्ष के अंतिम दिन, पितृ विसर्जन अमावस्या पर उन्होंने पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक तर्पण किया। भारतीय सनातन परंपरा में पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना जीवन के महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना गया है। पितृ पक्ष। अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता जताने और उनके योगदान को नमन करने का अवसर।पितृ विसर्जन अमावस्या के पावन दिन मुख्यमंत्री ने भी अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने तर्पण के माध्यम से पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और सनातन परंपरा में निहित कर्तव्यबोध का पालन किया।
भारतीय संस्कृति में पूर्वज केवल अतीत का हिस्सा नहीं हैं। वे परिवार की जड़ों, संस्कारों और जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं। उन्हीं से मिली परंपराएं और सीख अगली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करती हैं।मुख्यमंत्री का पितरों के प्रति यह भाव इसी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। सार्वजनिक जीवन में प्रदेश की जिम्मेदारियां निभाने के साथ अपने परिवार और पूर्वजों के प्रति कर्तव्य का स्मरण करना भारतीय परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

पितृ पक्ष के अंतिम दिन मुख्यमंत्री ने गया में पूर्वजों का तर्पण किया और उनको नमन करते हुए उनके स्नेह, पुण्य और आशीर्वाद की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वज हमारी जड़ों, संस्कारों और जीवन-मूल्यों के आधार हैं। उनके प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करना हमारी सनातन परंपरा का अभिन्न अंग है। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए प्रार्थना है कि उनका स्नेह, पुण्य और आशीर्वाद सदैव हम सभी पर बना रहे।
मुख्यमंत्री की प्रार्थना में अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव दिखाई देता है।उन्होंने संस्कृत के श्लोक के माध्यम से पितरों और सोम को नमन किया। सनातन परंपरा में श्राद्ध और तर्पण को उन्होंनेपूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का एक पवित्र माध्यम माना भी जाता है। यह पवित्र अनुष्ठान परिवार और पूर्वजों की स्मृतियों और उनकी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का भी एक अवसर होती हैं।
पितृ पक्ष का संदेश भी यही है कि जीवन की भागदौड़ में अपनी जड़ों को न भूलें। जिन्होंने हमें जीवन दिया, संस्कार दिए और आगे बढ़ने की राह दिखाई, उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव बनाए रखें।मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का पितृ तर्पण इसी परंपरा का निर्वहन है। जनसेवा के दायित्वों के बीच पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना यह दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में कर्तव्य का भाव परिवार से लेकर समाज तक विस्तृत है।
पूर्वजों का स्मरण, संस्कारों का सम्मान और परंपराओं का निर्वहन। पितृ विसर्जन अमावस्या पर मुख्यमंत्री ने अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। सनातन संस्कृति में पितरों का आशीर्वाद परिवार और समाज के लिए मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। यही परंपरा पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ती है और जीवन में संस्कारों के महत्व का स्मरण कराती है।

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