हिमाचल-उत्तराखंड में बादल फटने से हाहाकार, शिमला में लैंडस्लाइड और 14 लोग लापता
मौसम की मार: कई राज्यों में भारी बारिश, जनजीवन अस्त-व्यस्त, मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है
हिमाचल प्रदेश लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। गुरुवार देर रात किन्नौर जिले के थाच गांव में बादल फट गया। अचानक आई बाढ़ में दो गाड़ियां बह गईं। ग्रामीण रात के अंधेरे में ही घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश: किन्नौर में बादल फटा
शिमला में लैंडस्लाइड
राजधानी शिमला में भी हालात बिगड़ गए। शहर के एडवर्ड स्कूल के पास रात में लैंडस्लाइड हुआ। पहाड़ी खिसकने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई और मलबे में कई वाहन फंस गए। एहतियात के तौर पर स्कूल प्रबंधन ने शुक्रवार और शनिवार को छुट्टी घोषित कर दी है। शिमला की लाइफलाइन कहे जाने वाली सर्कुलर रोड बंद हो गई है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित है। इसके अलावा कुमारसैन के करेवथी क्षेत्र में तीन मंजिला मकान जमीन धंसने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में इस बरसात के मौसम में अब तक 424 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़, लैंडस्लाइड और बादल फटने की घटनाएँ राज्य की कमजोर होती भौगोलिक स्थिति और लगातार हो रही भारी बारिश का संकेत देती हैं।
उत्तराखंड: चमोली में तबाही, 14 लापता
हिमाचल के साथ पड़ोसी राज्य उत्तराखंड भी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। चमोली जिले के नंदनगर क्षेत्र में गुरुवार को बादल फटने से भारी तबाही मची। करीब 35 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। 14 लोग अब भी लापता हैं। मलबे में 10 लोगों के दबे होने की आशंका है। लगभग 200 लोग इस आपदा से सीधे प्रभावित हुए। प्रशासन ने सेना और SDRF की मदद से बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है। इधर, राजधानी देहरादून और मसूरी के हालात भी गंभीर हैं। देहरादून-मसूरी रोड अब भी क्षतिग्रस्त है, जिससे आवागमन बंद है। हालांकि, मसूरी में मौजूद लगभग 2 हजार पर्यटक सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
अन्य राज्यों में मौसम का हाल
उत्तर प्रदेश: सोनभद्र जिले में रिहंद बांध इस साल पांचवीं बार ओवरफ्लो हुआ है। वहीं, कौशांबी में आकाशीय बिजली गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई। मध्य प्रदेश: इस मानसून सीजन में औसतन 1097.28 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग 188 मिमी ज्यादा है। सबसे ज्यादा बारिश गुना (1651 मिमी) में और सबसे कम खरगोन (665.48 मिमी) में हुई। मणिपुर: राजधानी इम्फाल के बाढ़ग्रस्त इलाके में बांस से बना अस्थायी पुल टूट गया। इससे लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। जम्मू-कश्मीर: प्राकृतिक आपदा के बीच राहत की खबर यह है कि 22 दिन बंद रहने के बाद वैष्णो देवी यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है। तेलंगाना: हैदराबाद में गुरुवार को जोरदार बारिश हुई, जिसके चलते कई इलाकों में जलभराव हो गया और ट्रैफिक घंटों ठप रहा।
राज्यों से पांच तस्वीरें
उत्तराखंड चमोली: नंदनगर में बादल फटने के बाद SDRF की टीमें मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटीं। मणिपुर इम्फाल: बाढ़ग्रस्त इलाके में टूटा बांस का ब्रिज, ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ीं। जम्मू-कश्मीर: लंबी बंदिशों के बाद श्रद्धालु फिर से वैष्णो देवी यात्रा पर निकलते दिखे। उत्तराखंड देहरादून: मालदेवता क्षेत्र में बादल फटने के बाद नदी-नाले उफान पर हैं। हैदराबाद: शहर की सड़कों पर घुटनों तक पानी, लोग पैदल और गाड़ियों के साथ फंसे।
देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अब भी तेज़ है। उत्तर और पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएँ हो रही हैं। वहीं, मध्य भारत और दक्षिण भारत में अत्यधिक बारिश से जलभराव और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँच रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी इलाकों में अत्यधिक निर्माण कार्य इस तरह की घटनाओं की तीव्रता को और बढ़ा रहे हैं। हिमाचल और उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर और तेलंगाना तक—बारिश ने इस बार भारी कहर बरपाया है। पहाड़ों में लगातार बादल फटने और लैंडस्लाइड से जन-धन की हानि बढ़ रही है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं, लेकिन हालात सामान्य होने में समय लग सकता है। प्रकाश कुमार पांडेय