चीनी वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी! सिर्फ 1 ग्राम का वायरलेस माइक्रोस्कोप करेगा मस्तिष्क की हजारों न्यूरॉन्स की गतिविधियां रिकॉर्ड

चीन लगातार वैज्ञानिक खोज और नवाचार के कार्यों में जुटा हुआ है, हाल के वर्षों में उसने इस दिशा में
काफी प्रगति की है। इस बीच चीनी वैज्ञानिकों ने हाल में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है, जो पूरे विश्व
के लिए एक अच्छी खबर कही जा सकती है। बताया जाता है कि यहां के शोधकर्ताओं ने एक बहुत ही
हल्का वायरलेस माइक्रोस्कोप विकसित किया है। जो कि स्वतंत्र रूप से घूम रहे चूहों के मस्तिष्क में,
अलग-अलग न्यूरॉन्स के स्तर पर होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकता है। इस तरह दुनिया
को इससे यह समझने का एक नया तरीका मिल गया है कि स्वाभाविक व्यवहार के दौरान मस्तिष्क
कैसे काम करता है।

एयरस्कोप नाम के इस उपकरण को त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी और चीनी पीएलए जनरल हॉस्पिटल के
शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है। जो कि बहुत कम यानी सिर्फ 1 ग्राम वजन का है। यह उन
आधुनिक हेड-माउंटेड माइक्रोस्कोप की तुलना में 30 प्रतिशत से भी अधिक हल्का है, जो मस्तिष्क के
बड़े हिस्सों में अलग-अलग न्यूरॉन्स की गतिविधियों को कैप्चर कर सकता है।

पिछले दिनों नेचर जर्नल में प्रकाशित यह शोध वैज्ञानिक जगत को बुद्धिमत्ता के न्यूरल आधार को
बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। साथ ही, यह ऑप्टिकल ब्रेन-मशीन इंटरफेस के विकास
को भी आगे बढ़ा सकता है। ये इंटरफेस मस्तिष्क के सिग्नल का पता लगाने के लिए प्रकाश का उपयोग
करते हैं और मस्तिष्क की गतिविधियों को बाहरी उपकरणों से जोड़ने में मददगार हो सकते हैं।
कहा गया है कि एयरस्कोप का फील्ड ऑफ व्यू यानी देखने का दायरा करीब 6 मिलीमीटर चौड़ा है।
यह एक ही चूहे में एक साथ साढ़े आठ हजार से अधिक कॉर्टिकल न्यूरॉन्स की गतिविधियों को रिकॉर्ड
कर सकता है। जो पहले के वायरलेस इमेजिंग उपकरणों की तुलना में लगभग 25 गुना अधिक है।
इस अध्ययन के सह-प्रथम लेखक और त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज और
आईडीजी/ मैकगवर्न इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन रिसर्च के असिस्टेंट प्रोफेसर चांग युआनलोंग के मुताबिक
प्राकृतिक वातावरण में जटिल व्यवहार के दौरान मस्तिष्क की बाहरी परत कैसे काम करता है, इसे
समझना बुद्धिमत्ता की व्याख्या करने और ब्रेन-मशीन इंटरफेस विकसित करने के लिए बहुत जरूरी
है।

सेरेब्रल कॉर्टेक्स, जो मस्तिष्क की बाहरी परत है, धारणा बनाने, सीखने और निर्णय लेने जैसी
प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि स्वाभाविक व्यवहार के दौरान इसकी गतिविधियों का
अध्ययन करना लंबे समय से एक तकनीकी चुनौती रही है। वैज्ञानिकों को मस्तिष्क के बड़े हिस्सों को
बहुत बारीकी से देखने की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण अक्सर

जानवर की गतिविधियों को सीमित कर देते हैं।
बता दें कि पारंपरिक माइक्रोस्कोप, जो बड़े क्षेत्रों में अलग-अलग न्यूरॉन्स की पहचान कर सकते हैं,
उनमें अक्सर जानवर के सिर को एक जगह स्थिर रखना पड़ता है या उसे केबलों के जरिए उपकरणों से
जोड़कर रखना पड़ता है। ये दोनों ही तरीके जानवर के स्वाभाविक व्यवहार में बाधा डाल सकते हैं।
वायरलेस हेड-माउंटेड माइक्रोस्कोप जानवरों को स्वतंत्र रूप से घूमने की आजादी तो देते हैं, लेकिन
इनका फील्ड ऑफ आमतौर पर एक मिलीमीटर से भी कम होता है। जिससे केवल मस्तिष्क के
एक छोटे से हिस्से का ही अवलोकन किया जा सकता है।

इन चुनौतियों को दूर करने के लिए, शोधकर्ताओं की टीम ने माइक्रोस्कोप के लेंस, लाइटिंग,
इलेक्ट्रॉनिक घटकों और वायरलेस डेटा ट्रांसमिशन को बेहतर बनाने में सफलता हासिल की है।
शोधकर्ताओं ने विशेष आकार वाले केवल चार लेंसों का उपयोग कर एक ऐसा उपकरण बनाया है, जो
मस्तिष्क के एक हिस्से के 14 क्षेत्रों में फैली जगह में, अलग-अलग मस्तिष्क कोशिकाओं की स्पष्ट
तस्वीरें ले सकता है।

इस अध्ययन के सह-लेखक और त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ ऑटोमेशन में एसोसिएट
प्रोफेसर, वू चियामिन कहते हैं कि इस उपकरण में वायरलेस तरीके से काम करने की क्षमता है। साथ ही
यह हल्का है, इसका कवरेज दायरा बड़ा है और यह एक साथ बड़ी संख्या में न्यूरॉन्स की गतिविधियों
को रिकॉर्ड कर सकता है।

बताया जाता है कि वर्तमान में मौजूद वायरलेस हेड-माउंटेड माइक्रोस्कोप का वजन अक्सर 3 ग्राम से
अधिक होता है, जिससे चूहों की स्वाभाविक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। लेकिन यह नया
उपकरण एयरस्कोप इतना हल्का है कि चूहे बिना किसी रुकावट के चढ़-उतर सकते हैं, दौड़ सकते हैं
और एक-दूसरे के साथ घुल-मिल सकते हैं।

इस उपकरण में 2-मेगापिक्सेल का इमेज सेंसर और डेटा-कंप्रेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है,
जो भेजे जाने वाले डेटा की मात्रा को लगभग 25 गुना तक कम कर देती है। इससे यह रियल-टाइम में
हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें वायरलेस तरीके से भेज पाता है, जबकि डेटा ट्रांसमिशन भी आसानी से मैनेज
हो जाता है।चीनी वैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह शोध पूरे विज्ञान जगत के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर
आया है, क्योंकि इससे मस्तिष्क की गतिविधियों पर गहराई से नजर रखी जा सकेगी।

(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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