चीनी किसान फसल उत्सव की गाथा: भूमि से बाजार तक, परंपरा से भविष्य तक

हर शरद ऋतु में, जब सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा को पार करता है और दिन रात
समान संतुलन में आ जाते हैं, तब चीन भर के लाखों किसान अपने श्रम से थोड़ा
विराम लेकर उत्सव मनाते हैं। 2018 में शुरू किया गया चीनी किसान फसल
उत्सव, जो हर साल शरद विषुव पर मनाया जाता है, अब एक साधारण आयोजन
से बढ़कर किसानों और कृषि के सम्मान का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक बन
गया है।

परंपरा में निहित और भविष्य की ओर उन्मुख, अपने नौवें वर्ष में यह उत्सव
केवल एक मौसमी त्योहार नहीं, बल्कि गांवों को बाजारों से, परंपरा को नवाचार से
और सम्मान को ठोस आर्थिक लाभ से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु है।
समय की मांग को दर्शाती थीम

इस वर्ष का उत्सव 23 सितंबर को शरद विषुव के अवसर पर मनाया जा रहा है और
इसकी थीम है — “भरपूर फसल नया अध्याय खोलती है, व्यावहारिक कार्य
पुनरुद्धार को बढ़ावा देता है" । यह थीम वर्तमान समय के दोहरे लक्ष्य को दर्शाती
है: कृषि की मौजूदा उपलब्धियों का उत्सव मनाना और साथ ही भविष्य की
ग्रामीण प्रगति की ठोस नींव रखना। यह आयोजन ऐसे समय पर हो रहा है जब
चीन आगामी राष्ट्रीय दिवस और मध्य-शरद महोत्सव की छुट्टियों की तैयारी
कर रहा है।

जब उत्सव मिलते हैं, तो अवसर बढ़ते हैं
किसान फसल उत्सव के आयोजनों का संगम एक अनूठा तालमेल बनाता है। यह
दर्शाता है कि कैसे किसान फसल उत्सव केवल कृषि उत्पादन के उत्सव से आगे
बढ़कर ग्रामीण उपभोग, सांस्कृतिक पर्यटन और शहर-गांव एकीकरण का एक
रणनीतिक उत्प्रेरक बन गया है।

शरद विषुव पर इस उत्सव को स्थापित करके आयोजकों ने इसे ठीक उस समय

रखा है जब देश भर के किसान अपनी फसलें काट रहे होते हैं। यह समय ‘स्वर्ण
शरद उपभोग सीजन’के साथ मेल खाता है, जो किसानों की उपज को सीधे शहरी
बाजारों से जोड़ता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देता है। साथ ही, यह
उत्सव चीन के राष्ट्रीय दिवस और मध्य-शरद महोत्सव की छुट्टियों से ठीक
पहले आता है, जो ग्रामीण पर्यटन और कृषि उत्पादों की खपत के लिए एक
स्वाभाविक अवसर है।
खेत से बाजार तक: स्वर्ण शरद उपभोग सीजन
फसल उत्सव का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण उत्पादकों को शहरी उपभोक्ताओं से
जोड़ना है। 2020 में शुरू किया गया स्वर्ण शरद उपभोग सीजन अब तक 160
अरब युआन (लगभग 23.84 अरब डॉलर) से अधिक की कृषि बिक्री कर चुका है।
इस वर्ष यह अभियान शांगहाई में शुरू हुआ, जो अपनी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक केंद्र
की स्थिति का उपयोग करते हुए देश भर के उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों को
व्यापक बाजारों तक पहुंचा रहा है।
अलीबाबा, जेडी, पिंडुओडुओ (Pinduoduo), मीतुआन (Meituan), डौयिन
(Douyin) और श्याओहोंगशु (Xiaohongshu) सहित छह प्रमुख इंटरनेट
प्लेटफॉर्मों ने सब्सिडी और व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण
उद्योगों में डिजिटल परिवर्तन को गति देने की पहल की है।
स्थानीय जड़ों वाला एक राष्ट्रीय मंच
2026 के संस्करण में चीनी कृषि और ग्रामीण मामले मंत्रालय द्वारा आयोजित
47 प्रमुख कार्यक्रम होंगे, साथ ही देश भर में कई स्थानीय गतिविधियाँ भी
आयोजित की जाएंगी। इनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, कानूनी सहायता,
निशुल्क चिकित्सा क्लीनिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कृषि व्यापार मेले
शामिल हैं। इस तरह यह उत्सव केवल एक त्योहार नहीं रहता, बल्कि वह दिन बन
जाता है जब व्यावहारिक सेवाएं सीधे गांव के दरवाजे तक पहुंचती हैं। हाल के वर्षों
में यही इसकी पहचान बनी है। स्वास्थ्य क्लीनिक, कानूनी सहायता डेस्क,
विज्ञान प्रदर्शन और कृषि प्रशिक्षण ने इस छुट्टी को उत्सव के साथ साथ सेवा का

भी दिन बना दिया है।
आंकड़ों से परे: एक सांस्कृतिक परिवर्तन
उत्सव का गहरा महत्व आंकड़ों से कहीं आगे है। इसने कृषि और ग्रामीण जीवन के
प्रति जनता की धारणा को नया आकार दिया है। आज रेस्तरां मौसमी मेनू में गांव
के मशरूम और नदी की मछली पेश करते हैं, सुपरमार्केट अलमारियों पर फसल
सीजन की ब्रांडिंग दिखती है और धान के खेतों के बीच बसे होमस्टे शहरी लोगों
को ग्रामीण अनुभव दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र अब केवल भोजन का उत्पादन नहीं कर
रहा, बल्कि एक अनुभव का सृजन कर रहा है और अधिक मूल्य को अपने पास
बनाए रख रहा है।
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, ग्रामीण प्रति व्यक्ति प्रयोज्य आय
2020 के 17,131 युआन से बढ़कर 2025 में 24,456 युआन (लगभग 3,400 डॉलर)
हो गई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि पुनरुद्धार सिर्फ एक नीतिगत
नारा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस किया जाने वाला ठोस
बदलाव है।
भूमि और आजीविका के बीच एक सेतु
चीनी किसान फसल उत्सव किसानों को केंद्र में रखकर लगभग 46.5 करोड़ लोगों
के उस समुदाय को वाजिब सम्मान देता है, जो चीन की आबादी का करीब एक
तिहाई है और दुनिया के सबसे बड़े ग्रामीण समुदायों में से एक है।
जैसे जैसे चीन अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना को आगे बढ़ा रहा है, यह उत्सव
केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण पुनरुद्धार रणनीति का
जीवंत माध्यम बन गया है। यह साबित करता है कि कृषि को सम्मान देने और
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में कोई विरोधाभास नहीं बल्कि गहरा
तालमेल है।
यह उत्सव एक मौसमी विराम से कहीं अधिक है। यह खेत और थाली, ग्रामीण

परंपरा और शहरी मांग तथा उत्सव और आर्थिक अवसर के बीच एक सेतु है। तेजी
से शहरीकरण कर रहे राष्ट्र में यही सेतु निर्णायक अंतर पैदा करता है। जो एक
साधारण उत्सव के रूप में शुरू हुआ था, आज वह एक सशक्त राष्ट्रीय संस्था बन
चुका है और यही इस उत्सव की सबसे बड़ी सफलता है।
चीनी किसान फसल उत्सव: भारत के लिए एक सबक
पश्चिम बंगाल के खेतों में खड़े होकर जब मैं डोंगजियाओ की कहानी पढ़ता हूं, तो
एक गहरी समानता महसूस होती है। भारत में भी हमारे पास 'किसान दिवस' है,
लेकिन क्या हमने कभी फसल को उत्सव, संस्कृति और उपभोग के एक राष्ट्रीय
चक्र से जोड़ा है? क्या हमने किसी बंजर गांव को राष्ट्रीय मंच पर खड़ा कर
सम्मानित किया है?
चीनी किसान फसल उत्सव यही सिखाता है कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन का
आंकड़ा नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान का विषय है। जब एक देश अपने अन्नदाता
किसानों के लिए एक राष्ट्रीय त्यौहार बनाता है और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने
वाले गांव को राष्ट्रीय मंच देता है, तो वह दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि
विकास की नींव शहरों की गगनचुंबी इमारतों में नहीं, बल्कि गांव की मिट्टी में है।
यह सबक भारत के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है, जहां किसानों का योगदान
अक्सर आंकड़ों तक सीमित रह जाता है, जबकि उनकी संस्कृति, उनकी मेहनत
और उनकी उपज को वह राष्ट्रीय सम्मान नहीं मिल पाता, जिसके वे वास्तविक
हकदार हैं।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)

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