सितंबर का महीना। गर्मी धीरे-धीरे विदा ले रही है और शरद ऋतु दस्तक दे रही है। चीन के
गांवों में इन दिनों खेतों का रंग बदलने लगता है। कहीं सुनहरी फसलें हवा के साथ लहराती
दिखाई देती हैं, तो कहीं फलों से लदे बाग अपनी खुशबू बिखेरते हैं। किसान के लिए यह सिर्फ
मौसम बदलने का समय नहीं है। यह पूरे साल की मेहनत का नतीजा सामने आने का समय
है।
इसी खुशी को सामूहिक रूप से मनाने के लिए चीन में हर साल “चीनी किसान फसल उत्सव”
मनाया जाता है। यह उत्सव किसानों को सम्मान देने के साथ-साथ चीन की कृषि संस्कृति,
ग्रामीण जीवन और बदलती खेती की तस्वीर भी सामने रखता है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह
सिर्फ फसल का उत्सव नहीं, बल्कि किसान और गांव के बदलते जीवन का भी उत्सव है।
इस उत्सव की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। चीन सरकार ने इसे हर साल शरद विषुव के
दिन मनाने का फैसला किया। आमतौर पर शरद विषुव 22 या 23 सितंबर के आसपास
आता है। चीनी परंपरा में इसका खास महत्व है, क्योंकि इस समय दिन और रात लगभग
बराबर होते हैं। देश के कई हिस्सों में इसी समय फसल कटाई का मौसम भी शुरू होता है।
साल 2018 में 23 सितंबर को पहली बार यह उत्सव मनाया गया। खास बात यह है कि यह
चीन का पहला राष्ट्रीय पर्व है, जो विशेष रूप से किसानों को समर्पित है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस उत्सव का रंग भी बदला है। आज यहां परंपरा के साथ
आधुनिक खेती की झलक भी दिखाई देती है। गांवों में लोकनृत्य होते हैं, पारंपरिक संगीत
बजता है, स्थानीय व्यंजन परोसे जाते हैं और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी लगती है। वहीं दूसरी
तरफ स्मार्ट कृषि, डिजिटल गांव, नए बीज, आधुनिक कृषि मशीनरी और बिना चालक वाले
ट्रैक्टर यह बताते हैं कि चीन की खेती तेजी से बदल रही है।
यानी एक तरफ किसान अपनी पुरानी कृषि परंपराओं को सहेज रहा है, तो दूसरी तरफ नई
तकनीक के साथ आगे भी बढ़ रहा है। कई इलाकों में किसान अपने उत्पादों की प्रदर्शनी
लगाते हैं। कहीं चाय, फल और अनाज की बिक्री होती है, तो कहीं स्थानीय उत्पादों को
ऑनलाइन सीधे प्रसारण के जरिए देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाया जाता है। इससे गांव
और शहर के बीच बाजार की दूरी भी कम हो रही है।
यहीं से इस उत्सव की एक और महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आती है। इसका मकसद केवल
किसानों के साथ खुशी मनाना नहीं है। इसके जरिए ग्रामीण उत्पादों को बाजार दिलाने,
किसानों की आय बढ़ाने और गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश भी की
जाती है। चीन की ग्रामीण पुनरोद्धार नीति में भी इस तरह के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना
जाता है।
आज चीन में गांव की तस्वीर पहले जैसी नहीं रही। गांव अब सिर्फ खेती करने की जगह नहीं
है। कई ग्रामीण इलाकों में कृषि के साथ पर्यटन, संस्कृति, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और
छोटे कारोबार भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। खेत में पैदा होने वाला उत्पाद गांव में ही रुक न
जाए, बल्कि वह बड़े शहरों और दूसरे बाजारों तक पहुंचे, इसके लिए पूरी आपूर्ति श्रृंखला को
मजबूत किया जा रहा है।
साल 2026 में भी किसान फसल उत्सव के दौरान देशभर में कई तरह के कार्यक्रम
आयोजित किए जा रहे हैं। शांगहाई में आयोजित “गोल्डन ऑटम कंजम्प्शन सीज़न” के
जरिए क्वेइचो जैसे क्षेत्रों के कृषि उत्पादों को बड़े शहरों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक
पहुंचाने पर जोर दिया गया। Alibaba, JD, Pinduoduo, Meituan, Douyin और
Xiaohongshu जैसे डिजिटल मंच भी किसानों को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ने में भूमिका
निभा रहे हैं।
इस बदलाव का असर बहुत सीधा है। पहले किसी गांव के किसान का बाजार आसपास की
मंडी या नजदीकी शहर तक सीमित हो सकता था। अब वही किसान मोबाइल फोन के जरिए
अपने उत्पाद की जानकारी हजारों या लाखों उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकता है। यानी खेत
वही है, किसान वही है, लेकिन बाजार का आकार बहुत बड़ा हो गया है।
इसी वजह से किसान फसल उत्सव को चीन की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास से भी
जोड़कर देखा जाता है। किसान को सम्मान देना, खेती को आकर्षक पेशा बनाना और गांव में
बेहतर जीवन के अवसर पैदा करना इसके प्रमुख विचारों में शामिल हैं। उत्सव के दौरान कई
जगह चिकित्सा शिविर, शिक्षा सहायता, कृषि प्रशिक्षण और कानूनों से जुड़ी जानकारी देने
जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इस तरह यह पर्व मनोरंजन के साथ-साथ
सामाजिक सेवा का माध्यम भी बन जाता है।
भारत के लिए भी इस उत्सव की तस्वीर कुछ जानी-पहचानी लग सकती है। भारत में भी
खेती और किसानों से जुड़े कई बड़े पर्व हैं। तमिलनाडु का पोंगल, पंजाब की बैसाखी, केरल
का ओणम और देश के कई हिस्सों में मनाई जाने वाली मकर संक्रांति इसी कृषि संस्कृति की
अलग-अलग अभिव्यक्तियां हैं। इन पर्वों में भी फसल, किसान और प्रकृति के प्रति आभार
की भावना दिखाई देती है।
आखिरकार, खेत में उगने वाला अनाज सिर्फ भोजन नहीं होता। उसके पीछे किसान की
मेहनत, मौसम की चुनौती, परिवार की उम्मीद और पूरे समाज की जरूरत जुड़ी होती है।
चीन का किसान फसल उत्सव इसी रिश्ते को सामने लाता है। यहां फसल के साथ किसान
का सम्मान भी है, गांव की संस्कृति भी है और आधुनिक खेती का भविष्य भी। शायद यही
इस उत्सव का सबसे बड़ा संदेश है।
(अखिल पाराशर, CGTN हिन्दी संवाददाता, बीजिंग)