चीन ने दस्तावेज़ जारी कर कहा- ‘चाइना शॉक’ नहीं ‘चाइना अपॉर्च्युनिटी 2.0’ है हमारा विकास

China releases document It is not a China Shock Our growth represents China Opportunity

वैश्विक व्यापार और विनिर्माण को लेकर लंबे समय से जारी बहस के बीच चीन ने अपने ऊपर लग रहे “अतिरिक्त उत्पादन क्षमता” (Overcapacity) के आरोपों का औपचारिक जवाब दिया है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने 28 जुलाई को “तथाकथित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मुद्दे पर चीन का पक्ष” शीर्षक से एक विस्तृत दस्तावेज़ जारी करते हुए साफ़ कहा कि कुछ देश आर्थिक और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने की आशंका के चलते इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं। चीन का दावा है कि उसके उद्योगों की सफलता को गलत तरीके से “ओवरकैपेसिटी” बताकर वैश्विक व्यापार में बाधाएं खड़ी करने की कोशिश की जा रही है।

ओवरकैपेसिटी’ के आरोपों पर चीन का पलटवार, दुनिया के सामने रखा अपना पक्ष….
दस्तावेज़ जारी कर कहा- ‘चाइना शॉक’ नहीं
‘चाइना अपॉर्च्युनिटी 2.0’ है हमारा विकास

यह दस्तावेज़ ऐसे समय में सामने आया है, जब चीन के इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, बैटरी और अन्य आधुनिक विनिर्माण क्षेत्रों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीन अपनी सरकारी नीतियों और सब्सिडी के जरिए जरूरत से अधिक उत्पादन कर रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है। चीन ने इन आरोपों को तथ्यों के विपरीत बताते हुए उन्हें खारिज किया है।

‘अतिरिक्त उत्पादन’ और ‘प्रतिस्पर्धा’ को अलग बताया

दस्तावेज़ में चीन ने स्पष्ट किया है कि किसी देश की उत्पादन क्षमता अधिक होना और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (ओवरकैपेसिटी) होना एक ही बात नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, किसी भी बड़े औद्योगिक देश की उत्पादन क्षमता उसकी तकनीकी दक्षता, नवाचार, निवेश और वैश्विक मांग पर निर्भर करती है। इसलिए केवल निर्यात बढ़ने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि किसी देश में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, आर्थिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

चीन का कहना है कि वैश्विक बाजार में उसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और स्वच्छ प्रौद्योगिकी से जुड़े उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आवश्यकता ने चीनी निर्यात को गति दी है। ऐसे में बढ़ा हुआ निर्यात किसी संकट का नहीं बल्कि वैश्विक मांग का परिणाम है।

‘विश्व का कारखाना’ ही नहीं, ‘विश्व का बाजार’ भी

चीन ने दस्तावेज़ में यह भी कहा कि उसे केवल “दुनिया का कारखाना” कहना वास्तविक तस्वीर का एक हिस्सा भर है। चीन आज दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में भी शामिल है। देश के भीतर विशाल घरेलू मांग मौजूद है, इसलिए यह कहना कि घरेलू खपत की कमी के कारण चीन अतिरिक्त उत्पादन कर रहा है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

चीनी सरकार का तर्क है कि उसका औद्योगिक विकास केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू उपभोग, तकनीकी नवाचार और वैश्विक साझेदारी पर भी आधारित है।

‘चाइना शॉक 2.0’ नहीं, ‘चाइना अपॉर्च्युनिटी 2.0’

दस्तावेज़ का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि चीन ने अपने औद्योगिक विकास को “चाइना शॉक 2.0” कहे जाने का विरोध किया है। मंत्रालय का कहना है कि चीन की आधुनिक औद्योगिक प्रगति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर है।

चीन का दावा है कि उसकी कंपनियों का विकास नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी सुधार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई है और दुनिया के कई देशों को कम लागत पर आधुनिक तकनीक और उत्पाद उपलब्ध हो सके हैं।

वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी संदेश

दस्तावेज़ में चीन ने सभी देशों से अपील की है कि वे आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने से बचें। चीन का कहना है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के दौर में संरक्षणवाद के बजाय सहयोग की आवश्यकता है।

बीजिंग ने जोर देकर कहा कि वैश्विक उत्पादन और सप्लाई चेन को अधिक खुला, समावेशी और संतुलित बनाया जाना चाहिए। समान विकास, पारस्परिक लाभ और साझा जीत (Win-Win Cooperation) की नीति अपनाकर ही अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और स्थिर बनाया जा सकता है।

क्या है इस दस्तावेज़ का व्यापक संदेश?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दस्तावेज़ केवल आर्थिक स्पष्टीकरण नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापारिक विमर्श में चीन का आधिकारिक राजनीतिक और आर्थिक संदेश भी है। अमेरिका और यूरोप जहां चीनी उत्पादों पर शुल्क और व्यापारिक प्रतिबंधों की नीति अपना रहे हैं, वहीं चीन अपने औद्योगिक मॉडल को वैश्विक विकास का इंजन साबित करने की कोशिश कर रहा है।

आने वाले समय में यह बहस और तेज़ हो सकती है कि क्या चीन की उत्पादन क्षमता वास्तव में वैश्विक बाजार के लिए चुनौती है या फिर तेजी से बदलती दुनिया की बढ़ती मांग को पूरा करने का माध्यम। फिलहाल, चीन ने अपने ताज़ा दस्तावेज़ के जरिए साफ़ कर दिया है कि वह इन आरोपों को स्वीकार करने के बजाय उन्हें राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा मानता है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां आपूर्ति श्रृंखला, हरित ऊर्जा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक नीतियां वैश्विक शक्ति संतुलन तय कर रही हैं। ऐसे में चीन का यह दस्तावेज़ केवल अपने पक्ष का बचाव नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को लेकर उसकी दीर्घकालिक रणनीति और सोच का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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