हरित विकास की राह पर चीन: 2030 तक वन क्षेत्र बढ़ाने और ग्रीन इकोनॉमी को नई ऊंचाई देने का बड़ा लक्ष्य

China Path to Green Development #Increasing Forest Cover by 2030 #Taking the Green Economy to New Heights

बीजिंग। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक चुनौती के बीच चीन ने हरित विकास (ग्रीन डेवलपमेंट) और वन संसाधनों के विस्तार को अपनी दीर्घकालिक विकास रणनीति का प्रमुख आधार बनाया है। देश की नई वानिकी एवं घासभूमि (ग्रासलैंड) विकास योजना में वर्ष 2030 तक वन क्षेत्र बढ़ाने, पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने और हरित अर्थव्यवस्था को नई गति देने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं। इस पहल को चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-30) का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

चीन का कहना है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी सोच के तहत राष्ट्रीय वानिकी एवं ग्रासलैंड प्रशासन, राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग, वित्त मंत्रालय और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने संयुक्त रूप से ऐसी योजना तैयार की है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ हरित उद्योगों को भी बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।

ग्रीन इकोनॉमी को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

नई योजना के तहत चीन ने वर्ष 2030 तक वानिकी और घासभूमि से जुड़े उद्योगों का कुल उत्पादन मूल्य 14 ट्रिलियन युआन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य पिछली 14वीं पंचवर्षीय योजना की तुलना में बड़ा है, जिसमें यह आंकड़ा 11 ट्रिलियन युआन था। सरकार का मानना है कि हरित उद्योगों के विस्तार से रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण—तीनों क्षेत्रों को एक साथ मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार लकड़ी आधारित उद्योग, जैव विविधता संरक्षण, इको-टूरिज्म, औषधीय पौधों का उत्पादन और वन उत्पादों का सतत उपयोग आने वाले वर्षों में चीन की हरित अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं।

वन क्षेत्र बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

योजना में वर्ष 2030 तक देश का वन क्षेत्र बढ़ाकर 25.8 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही वन स्टॉक की मात्रा 22.4 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंचाने की भी योजना बनाई गई है। इससे पहले 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान चीन का वन क्षेत्र 25 प्रतिशत से अधिक हो चुका है और वन स्टॉक लगभग 21 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था।  इन उपलब्धियों के आधार पर चीन का दावा है कि वह 2030 के लिए निर्धारित अपने राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों की दिशा में समय से पहले उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है।

पारिस्थितिकी संरक्षण पर विशेष फोकस

नई रणनीति में केवल वृक्षारोपण तक ही सीमित नहीं रहा गया है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में व्यापक कदम प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें खराब हो चुके घास के मैदानों का पुनर्जीवन, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकना, चट्टानी रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया पर नियंत्रण तथा मरुस्थलीकरण को कम करने जैसे उपाय शामिल हैं। योजना में स्पष्ट किया गया है कि वृक्षारोपण स्थानीय जलवायु, भूमि और जल उपलब्धता को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि लगाए गए पौधों की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हरित परियोजनाएं अधिक प्रभावी और टिकाऊ साबित होती हैं।

चार दशक से जारी हरित अभियान

चीन ने पिछले चार दशकों में लगातार वन क्षेत्र और वन संपदा बढ़ाने की दिशा में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में वन क्षेत्र और वन स्टॉक दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि रेगिस्तान और रेतीली भूमि के विस्तार में कमी लाने के प्रयास भी जारी रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में भी ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, हरित पार्कों का विकास और पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचे पर निवेश किया गया है। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल चीन में यदि बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र का विस्तार होता है, तो इसका प्रभाव केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों पर भी पड़ सकता है। वन कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) का प्रमुख स्रोत माने जाते हैं, इसलिए हरित क्षेत्र बढ़ाने से कार्बन उत्सर्जन के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। चीन की नई नीति इस बात का संकेत देती है कि वह आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को भी अपनी दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है।

(चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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