90 साल बाद भी चीन को प्रेरित कर रही है लॉन्ग मार्च की भावना, 2049 तक महाशक्ति बनने का लक्ष्य

लाल सेना लांग मार्च की कठिनाइयों से नहीं डरती, हजारों पहाड़ और दस हजार
नदियाँ उसके लिए कुछ भी नहीं हैं — चीन के महान नेता माओ त्सेतुंग की
सितंबर 1935 में लिखी यह पंक्ति आज, लांग मार्च की विजय की 90वीं वर्षगांठ
पर भी, प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है।

जैसे-जैसे हम इस विश्व-प्रसिद्ध विजय के नौ दशक पूरे होने के ऐतिहासिक पड़ाव
पर खड़े हैं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय सीपीसी के शासन-दर्शन और लांग मार्च की
चिरस्थायी भावना को समझना चाहता है। कुछ स्वाभाविक प्रश्न उठते हैं: चीन
आज भी लांग मार्च को क्यों याद करता है? तमाम बाधाओं के बावजूद उसने
विजय कैसे हासिल की? आज के चीन और विश्व के लिए इसकी क्या प्रासंगिकता
है? और यह समकालीन चीन के सशक्त आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में क्यों
कायम है?

निस्संदेह, इतिहास की सीख हमें किसी राष्ट्र के वर्तमान को समझने और बेहतर
भविष्य गढ़ने का गहन ज्ञान देती है।

2026: ऐतिहासिक स्मृतियों का वर्ष और मेरी स्मृति का लांग मार्च
वर्ष 2026 आधुनिक चीन में ऐतिहासिक स्मृतियों का वर्ष है। इस वर्ष लांग मार्च
विजय की 90वीं (22 अक्टूबर 1936), जापानी आक्रमण के विरुद्ध जन-प्रतिरोध
युद्ध व विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध में विजय की 81वीं (3 सितंबर 1945),
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की 105वीं (1 जुलाई 1921) और चीन लोक
गणराज्य स्थापना की 77वीं (1 अक्टूबर 1949) वर्षगांठ मनाई जा रही है। ये पड़ाव
दुनिया को शांति और साझा विकास के महत्व की याद दिलाते हैं।

मेरे लिए लांग मार्च केवल इतिहास नहीं है। माध्यमिक विद्यालय में
पाठ्यपुस्तक में ‘सुनहरे मछली पकड़ने वाले कांटे (Golden Fishing Hook)’ की
कहानी पढ़कर मैं आंसू रोक नहीं पाया था। तभी समझा था कि यह केवल सैन्य
अभियान नहीं, बल्कि मानव इच्छाशक्ति की विजय है।

अध्यक्ष माओ के नेतृत्व में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की पूर्ववर्ती लाल सेना द्वारा
पूरी की गई 25,000 ली यानी लगभग 12,500 किलोमीटर की यह महायात्रा आज
भी चीन की सामूहिक स्मृति में जीवित है और द्वितीय विश्व युद्ध की वैश्विक
साझा स्मृति का हिस्सा बन चुकी है।

लांग मार्च: वह महायात्रा जिसने एक युग का निर्माण किया
लांग मार्च चीनी क्रांति के इतिहास में एक युग-निर्माता उपलब्धि और अमर
स्मारक है। जैसा कि अमेरिकी पत्रकार एडगर स्नो ने ‘रेड स्टार ओवर चाइना’ में
लिखा है, यह महायात्रा "आधुनिक समय में अतुलनीय एक महाकाव्य" थी। स्नो
ने इसे फासीवाद के खिलाफ वैश्विक संघर्ष की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में
स्थापित किया।
1934-1936 की इस दो वर्षीय यात्रा पर विचार करें तो आज भी कल्पना कठिन है
कि अध्यक्ष माओ के नेतृत्व में लाल सेना के सैनिकों, गरीब किसानों और मजदूरों
ने कितनी अकल्पनीय कठिनाइयाँ सहीं। उन्हीं के अदम्य साहस ने जापानी
आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध युद्ध में विजय का मार्ग प्रशस्त किया, चीनी क्रांति
के लिए उज्ज्वल भविष्य का द्वार खोला और अंतिम विजय की ठोस नींव रखी।
जब खंडहरों से एक राष्ट्र उठा

उस दौर में चीन गृह-कलह में उलझा हुआ था, गरीबी से जर्जर था और उन्नत
विदेशी ताकतों के खतरे से घिरा हुआ था। समानता के आदर्शों, कठोर वर्ग
व्यवस्था के अंत और भ्रष्ट शासन के प्रतिरोध की भावना से प्रेरित होकर हजारों
किसान माओ त्सेतुंग, जू तह (Zhu De) और चोउ एन-लाई (Zhou Enlai) जैसे
कम्युनिस्ट नेताओं के पीछे एकजुट हुए, एक नए, संप्रभु और आत्मनिर्भर राष्ट्र के
निर्माण के साझा स्वप्न के साथ।

आज का लांग मार्च: एक जीवंत विरासत
1949 में चीन लोक गणराज्य की स्थापना के बाद से लांग मार्च को चीनी

कम्युनिस्ट पार्टी की शक्ति और दृढ़ता के प्रतीक के रूप में महिमामंडित किया
जाता रहा है।

21 अक्टूबर 2016 को पेइचिंग में लांग मार्च की विजय की 80वीं वर्षगांठ के
अवसर पर माओ का स्मरण करते हुए राष्ट्रपति शी ने कहा था, "लांग मार्च जन
मुक्ति सेना का गौरव है, और गौरवशाली जन मुक्ति सेना को लांग मार्च में लाल
सेना की महान भावना और उत्कृष्ट परंपरा को सदैव आगे बढ़ाते रहना चाहिए।"
लाल सेना द्वारा बोए गए वे बीज आज आधुनिक चीन में वटवृक्ष बन चुके हैं। हर
क्षेत्र में दिखने वाली कार्य-निष्ठा और विकास उसी विरासत की निरंतरता है, जिसे
आज भी विद्यालयों में पढ़ाया जाता है, ताकि नई पीढ़ी राष्ट्र की जड़ों और देश के
आधुनिकीकरण के लिए दिए गए महान बलिदानों को कभी न भूले।
हर घेराबंदी को तोड़ता नया लांग मार्च: व्यापार और तकनीक में

सीपीसी के नेतृत्व में चीन ने पश्चिम की हर घेराबंदी को तोड़ दिया है। अमेरिका के
31 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद 2026 में चीन का निर्यात 21.8 प्रतिशत बढ़ा और
बेल्ट एंड रोड देशों में 28.5 प्रतिशत वृद्धि हुई। 2025 में व्यापार अधिशेष रिकॉर्ड
1.2 ट्रिलियन डॉलर रहा। यह आपूर्ति श्रृंखलाओं में लांग मार्च की भावना ही है।
परमाणु बम से लेकर गरीबी उन्मूलन और छांगअ-6 से थ्येनकोंग अंतरिक्ष
स्टेशन तक, चीन ने दिखा दिया कि कोई बाधा उसकी प्रगति नहीं रोक सकती।
चाहे प्राकृतिक आपदा हो या व्यापारिक दबाव, चीन केवल चुनौतियों को झेलता
नहीं, बल्कि उन्हें प्रगति की शक्ति में बदल देता है। यही तो है वह लांग मार्च की
जीवटता, जो आज भी दुनिया को सिखाती है कि दबाव से राष्ट्र झुकते नहीं, और
मजबूत बनते हैं। यह नए युग में लांग मार्च की भावना का सजीव प्रतिबिंब है।
2049 की ओर — लांग मार्च की भावना

हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि युद्ध का इतिहास भले ही धुंधला पड़ जाए,
लेकिन लांग मार्च के वीरों की अदम्य भावना कभी क्षीण नहीं होगी। वैश्वीकरण के

इस युग में भी चीनी जनता इसी भावना से साहस, शक्ति और ज्ञान प्राप्त कर रही
है और माओ द्वारा परिकल्पित "सुंदर चीन" के निर्माण में जुटी है।
नब्बे वर्ष बाद भी यह महायात्रा याद दिलाती है कि लाल सेना का मार्ग ही मुक्ति
और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग है। नए युग में चीन का लक्ष्य 2049 तक, चीन
लोक गणराज्य की स्थापना की शताब्दी तक, चीनी शैली के आधुनिकीकरण से
एक महान आधुनिक समाजवादी देश बनना और चीनी राष्ट्र के महान
पुनर्जागरण को साकार करना है।

विश्व के लिए भी संदेश स्पष्ट है: अशांति, संरक्षणवाद और वैश्विक चुनौतियों के
दौर में लांग मार्च सिखाता है कि स्पष्ट दृष्टि, राष्ट्रीय एकजुटता और जन
कल्याण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता से कोई भी कठिनाई अपराजेय नहीं रहती।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)

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