चीन का छांगशान द्वीपसमूह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल, प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को मिली वैश्विक पहचान

यूनेस्को की विश्व विरासत समिति के 48वें सत्र में चीन को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित बैठक में चीन के छांगशान द्वीपसमूह को आधिकारिक तौर पर यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का फैसला लिया गया। यह निर्णय चीन के पीले सागर और पोहाई सागर तट पर स्थित प्रवासी पक्षी अभयारण्यों के संरक्षित क्षेत्र का विस्तार किए जाने के बाद लिया गया। इस उपलब्धि की पुष्टि चीन के राष्ट्रीय वन एवं घासभूमि प्रशासन ने भी की है।

यह विरासत स्थल पहले से संरक्षित प्रवासी पक्षी अभयारण्यों का हिस्सा था, लेकिन अब इसके विस्तार के साथ छांगशान द्वीपसमूह भी विश्व धरोहर क्षेत्र में शामिल हो गया है। इससे पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलेशिया के बीच फैले प्रवासी पक्षियों के महत्वपूर्ण मार्ग को वैश्विक स्तर पर और अधिक संरक्षण मिलेगा। इससे पहले भी वर्ष 2024 में इस विरासत क्षेत्र का विस्तार किया गया था और अब यह श्रृंखला और अधिक मजबूत हो गई है।

ल्याओनिंग प्रांत के ताल्येन शहर में स्थित छांगशान द्वीपसमूह प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। पोहाई सागर पार करने वाले करोड़ों पक्षी यहां विश्राम करते हैं और आगे की लंबी उड़ान के लिए ऊर्जा प्राप्त करते हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र को जैव विविधता के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है।

नए शामिल किए गए इस विश्व धरोहर क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 4,900 हेक्टेयर से अधिक है। यहां अब तक 140 से अधिक पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से इस क्षेत्र के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई गति मिलेगी, जिससे प्रवासी पक्षियों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

 

Exit mobile version