क्वेइयांग (चीन)। दक्षिण-पश्चिम चीन के क्वेइचो प्रांत की राजधानी क्वेइयांग में बुधवार को 2026 चीन-आसियान शिक्षा सप्ताह का भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब पूरी दुनिया शिक्षा व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक और वैश्विक सहयोग को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत मान रही है। “स्मार्ट शिक्षा को मैत्रीपूर्ण घर के निर्माण में बेहतर सहायक बनाना” थीम पर आधारित इस सम्मेलन ने यह संकेत दिया है कि चीन और आसियान देश अब केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को भी रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बनाना चाहते हैं।
स्मार्ट शिक्षा से मजबूत होगी क्षेत्रीय साझेदारी
एआई और डिजिटल शिक्षा पर बढ़ा सहयोग
व्यावसायिक शिक्षा को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
छात्रों और शिक्षकों के लिए खुलेंगे नए अवसर
शिक्षा के जरिए एशिया में प्रभाव बढ़ाने की रणनीति
उद्घाटन समारोह में चीन और आसियान देशों के शिक्षा मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न देशों के राजदूतों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों तथा शिक्षा विशेषज्ञों सहित लगभग 450 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं, जिनका असर आने वाले वर्षों में पूरे एशियाई क्षेत्र की शिक्षा प्रणाली पर देखने को मिल सकता है।
सम्मेलन के दौरान सबसे महत्वपूर्ण घोषणा “चीन-आसियान स्मार्ट शिक्षा क्षमता सह-निर्माण परियोजना” की रही। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा प्रशासकों को एआई आधारित शिक्षा के लिए तैयार करना है। बदलती तकनीकी दुनिया में केवल डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता विकसित करना भी उतना ही आवश्यक समझा जा रहा है। इसी सोच के तहत यह परियोजना विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध गतिविधियों और तकनीकी सहयोग के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा देने का प्रयास करेगी।
चीन ने इस सम्मेलन में व्यावसायिक शिक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी। “चीन-आसियान व्यावसायिक शिक्षा डिजिटल क्षमता निर्माण केंद्र-थाईलैंड केंद्र” की स्थापना की घोषणा की गई। यह नया केंद्र पहले से स्थापित मलेशिया केंद्र के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में डिजिटल कौशल आधारित व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक बनाना रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
सम्मेलन के दौरान “व्यावसायिक शिक्षा सीखने के परिणामों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता योजना” भी जारी की गई। पहले चरण में 34 व्यावसायिक क्षेत्रों को इस योजना में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक देश में प्राप्त व्यावसायिक योग्यता को अन्य सहभागी देशों में भी मान्यता मिल सके। इससे छात्रों और प्रशिक्षित युवाओं के लिए सीमापार रोजगार तथा उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ने की संभावना है।
इस बार के आयोजन की एक और उल्लेखनीय उपलब्धि जातीय चिकित्सा क्षेत्र के लिए पहले एआई आधारित बड़े भाषा मॉडल (Large Language Model) का शुभारंभ रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के संरक्षण, शोध और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ उसके बेहतर समन्वय में मदद करेगा। इससे चिकित्सा अनुसंधान और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
2026 चीन-आसियान शिक्षा सप्ताह का आयोजन 2 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 35 प्रमुख गतिविधियों और 60 नियमित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन केवल चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि थाईलैंड, कंबोडिया, मलेशिया और इंडोनेशिया सहित कई आसियान देशों में भी छह विशेष थीम आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में स्मार्ट शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, उद्योग-शिक्षा-अनुसंधान सहयोग, युवा नेतृत्व, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और डिजिटल नवाचार जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन केवल एक शैक्षणिक सम्मेलन नहीं बल्कि क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने का मंच भी है। पिछले कुछ वर्षों में चीन और आसियान देशों के बीच शिक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 के अंत तक दोनों पक्षों के बीच छात्र आदान-प्रदान की संख्या 1 लाख 77 हजार से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा 100 विशेष व्यावसायिक शिक्षा सहयोग परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं तथा “हजारों स्कूलों की साझेदारी” जैसी पहल भी शुरू की गई है।
गौरतलब है कि इस वर्ष चीन-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी की पांचवीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है। ऐसे में शिक्षा सप्ताह को केवल शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं बल्कि क्षेत्रीय विश्वास, मानव संसाधन विकास और दीर्घकालिक सहयोग के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। चीन का प्रयास है कि शिक्षा, तकनीक और अनुसंधान के माध्यम से वह आसियान देशों के साथ अपने संबंधों को और अधिक गहरा बनाए।
विश्लेषकों के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास पर बढ़ता यह सहयोग आने वाले वर्षों में एशिया की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत कर सकता है। यदि घोषित परियोजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो इससे लाखों छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय अवसरों और बेहतर रोजगार संभावनाओं का लाभ मिल सकता है। यही कारण है कि क्वेइयांग में शुरू हुआ यह शिक्षा सप्ताह केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोग की नई दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)