कफ सिरप बना जानलेवा?…राजस्थान और मध्यप्रदेश में बच्चों के लिए बना कहर…अब तक इतने बच्चों की गई जान

Children in Rajasthan and Madhya Pradesh have been sickened and died after consuming cough syrup

कफ सिरप बना जानलेवा?…राजस्थान और मध्यप्रदेश में बच्चों के लिए बना कहर…अब तक इतने बच्चों की गई जान

राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप के सेवन से बच्चों की तबियत बिगड़ने और मौत की खबरें आई हैं। इन मामलों में डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप का नाम सामने आया है, जो एक कफ सिरप है जो खांसी को कम करने के लिए दी जाती है।

क्या है डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप?

डॉ.सिमरन कौर सरीन के अनुसार, यह दवा मस्तिष्क में खांसी पैदा करने वाले संकेतों को रोककर काम करती है, जिससे मरीज को राहत मिलती है। यह दवा कैमिकल प्रोसेसिंग से तैयार होती है और इसमें डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड एक्टिव कंपाउंड होता है।

कौन लोग ले सकते हैं यह दवा?

डॉ. कौर के अनुसार, छोटे बच्चों में विशेष सावधानी जरूरी है, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवा बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए और 2–6 साल के बच्चों को भी सटीक खुराक ही देना चाहिए। 6 साल से ऊपर के बच्चों और बड़ों में भी इसे डॉक्टर की निगरानी में ही लेना चाहिए।

क्या हैं इस दवा के नुकसान?

डॉ. कौर के अनुसार, कुछ लोगों में यह नींद, चक्कर या हल्का पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है और बहुत कम मामलों में एलर्जी या सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है। इसलिए दवा की निर्धारित खुराक लेना और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्या है सरकार की प्रतिक्रिया?

राजस्थान में ड्रग कंट्रोलर ने सिरप के उपयोग पर तुरंत रोक लगा दी है और जांच के लिए नमूने प्रयोगशाला भेजे हैं। मध्य प्रदेश में भी जांच के लिए आईसीएमआर और पुणे की लैब की टीम बुलाई गई है। कफ सिरप के सेवन से बच्चों की तबियत बिगड़ने और मौत की खबरें चिंताजनक हैं। यह जरूरी है कि दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाए और निर्धारित खुराक का पालन किया जाए। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और दवाओं की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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