ग्लोबल बनेगा उत्तर प्रदेश का आयुष मॉडल, रिसर्च के जरिए तैयार होगा स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल

Chief Minister Yogi Adityanath will be addressing the AYUSH medical systems

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की आयुष चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम उठा रहे हैं। राज्य सरकार अब आयुष अस्पतालों को केवल उपचार केंद्रों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक ‘रिसर्च सेंटर हब’ के रूप में विकसित करेगी। इस पहल का उद्देश्य आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों के आधार पर मजबूत बनाना है, ताकि इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिल सके।

आयुष अस्पताल बनेंगे रिसर्च सेंटर हब

योगी सरकार की इस योजना के तहत प्रदेश के प्रमुख आयुष अस्पतालों में शोध आधारित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां पर इलाज के साथ-साथ बीमारियों पर गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि आयुष पद्धतियों में मौजूद पारंपरिक ज्ञान को यदि आधुनिक विज्ञान और डाटा एनालिसिस से जोड़ा जाए, तो यह वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी समाधान बन सकता है। इसी सोच के तहत आयुष अस्पतालों को ‘रिसर्च सेंटर हब’ के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है।

कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों पर फोकस

इस रिसर्च मॉडल के अंतर्गत कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग, थायरॉइड, मोटापा, उच्च रक्तचाप और जोड़ों के दर्द जैसी गंभीर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आयुष चिकित्सक मरीजों के खानपान, दिनचर्या, योग अभ्यास और औषधीय उपचार के प्रभावों का व्यवस्थित डाटा एकत्र करेंगे। इसके बाद इस डाटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कर यह परखा जाएगा कि आयुष पद्धतियां इन बीमारियों पर किस तरह प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।

सेंट्रल रिसर्च सेंटर से होगा एमओयू

इस महत्वाकांक्षी योजना को मजबूत आधार देने के लिए प्रदेश सरकार जल्द ही सेंट्रल रिसर्च सेंटर (केंद्रीय अनुसंधान संस्थान) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने जा रही है। इस एमओयू के तहत आयुष चिकित्सकों को अत्याधुनिक लैब सुविधाएं, रिसर्च टूल्स और तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही शोध कार्यों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे आयुष आधारित रिसर्च को वैज्ञानिक मान्यता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

तैयार होगा स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल

इस पूरी पहल का सबसे बड़ा लक्ष्य एक वैश्विक स्तर का ‘स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल’ तैयार करना है। रिसर्च से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर ऐसे उपचार मानक विकसित किए जाएंगे, जिन्हें देश और विदेश दोनों जगह अपनाया जा सके। योगी सरकार चाहती है कि उत्तर प्रदेश का आयुष मॉडल विश्व स्वास्थ्य मंचों पर एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरे। इससे आयुष चिकित्सा की विश्वसनीयता बढ़ेगी और विदेशी मरीजों का भी भरोसा मजबूत होगा।

आयुष को मुख्यधारा में लाने की तैयारी

प्रमुख सचिव आयुष, रंजन कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा आयुष पद्धतियों को स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा में लाने की है। अभी तक आयुष को वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब इसे वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का समन्वय एक मजबूत और समग्र स्वास्थ्य मॉडल तैयार कर सकता है।

शिक्षा और रोजगार के नए अवसर

इस रिसर्च आधारित आयुष मॉडल से शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलेंगे। प्रदेश के आयुष कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को प्रैक्टिकल रिसर्च का सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें वास्तविक मरीजों पर शोध करने और वैज्ञानिक पद्धतियों को समझने का अवसर प्राप्त होगा। इससे आयुष शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और युवा चिकित्सकों को देश-विदेश में बेहतर करियर के अवसर मिल सकेंगे।

प्रदेश को मिलेगा वैश्विक स्वास्थ्य पहचान

योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को एक ‘ग्लोबल हेल्थ डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करने में सहायक साबित हो सकती है। यदि आयुष आधारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलती है, तो मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। विदेशी मरीज आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के लिए उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

समग्र स्वास्थ्य मॉडल की दिशा में कदम

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह योजना उत्तर प्रदेश को एक ऐसे समग्र स्वास्थ्य मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान का संतुलित उपयोग होगा। आयुष को रिसर्च से जोड़कर वैश्विक मंच पर स्थापित करने की यह पहल न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाएगी, बल्कि प्रदेश की पहचान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई देगी।

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