मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना: बिहार में बनी बच्चों के लिए वरदान… 5 साल में हजारों बच्चों को मिला जीवनदान

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना ने हजारों परिवारों को राहत दी है और जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को नया जीवन मिला है। मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से
5 साल में 2317 बच्चों को नया जीवन मिला है। गरीब और असहाय परिवारों के लिए बिहार सरकार की मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों को मुफ्त इलाज मुहैया कराकर यह योजना हजारों परिवारों की आंखों में नई उम्मीद जगा रही है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से होती है पहचान

इस योजना के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के जरिए की जाती है। इसके बाद उनका निःशुल्क इलाज राज्य सरकार की ओर से सुनिश्चित किया जाता है।

अब तक 2317 बच्चों को मिली नई जिंदगी

अप्रैल 2021 से अब तक 2317 बच्चों का सफल इलाज किया जा चुका है। इनमें 1565 बच्चे अहमदाबाद के प्रशांति मेडिकल सर्विसेज और रिसर्च संस्थान (श्री सत्य साईं हृदय अस्पताल) में 402 बच्चे पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में 149 बच्चे IGIMS पटना में और 201 बच्चे जयप्रभा मेदांता अस्पताल में नए जीवन से जुड़े हैं।

हर साल बढ़ती सफलता

योजना के तहत लगातार बढ़ रही उपलब्धियां बताती हैं कि यह पहल कितनी असरदार रही है।

2021-22 : 338 बच्चे

2022-23 : 410 बच्चे

2023-24 : 556 बच्चे

2024-25 : 764 बच्चे

2025-26 (अभी तक) : 249 बच्चे

गरीब परिवारों के लिए जीवनदायिनी योजना

इस योजना ने खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत दी है। जिन बच्चों का इलाज लाखों रुपये खर्च कराना संभव नहीं था, उन्हें सरकार की इस पहल से बिल्कुल मुफ्त में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा मिल रही है। बिहार सरकार की मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना न केवल एक स्वास्थ्य योजना है, बल्कि यह बच्चों और उनके परिवारों के लिए जीवन की नई आशा है। जिस परिवार ने अपने बच्चे की सांसों को टूटते देखा है, उनके लिए यह योजना सचमुच संजीवनी साबित हो रही है।—( प्रकाश कुमार पांडेय)

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