नक्सली हमले ने छत्तीसगढ़ को एक बार फिर से झंझोर कर रख दिया है। नक्सली हमले को भी छत्तीसगढ़ में राजनीति का रूप दिया जा रहा है। मुठभेड़ में सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हुए थे। इसके साथ ही 15 जवान घायल हुए थे। लगभग चार घंटे तक चली मुठभेड़ में कम से कम 7 से 8 नक्सली मारे गए है। इसके साथ ही 15 से 16 नक्सली गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। सियासी पार्टी एक दूसरे के पर हमलावर है। कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने विकास और सुरक्षा की नीति पर काम किया था जिसके चलते छत्तीसगढ़ का नक्सल क्षेत्र विकास के पद पर आगे बढ़ रहा था लेकिन इस सरकार के आने से फिर से नक्सलियों को बढ़ावा मिल रहा है।
- टेकलगुडेम के पास हुई थी नक्सलियों से मुठभेड़
- नक्सली हमले को भी दिया जा रहा राजनीति का रूप
- मुठभेड़ में सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हुए थे
- इसके साथ ही 15 जवान घायल हुए थे
- लगभग चार घंटे तक चली थी मुठभेड़
- कम से कम 7 से 8 नक्सली मारे गए
- 15 से 16 नक्सली गंभीर रूप से घायल भी हुए
- सियासी पार्टी एक दूसरे के पर हमलावर
दरअसल दो दिन पहले सुकमा जिले में सुरक्षाकर्मियों पर नक्सली हमला किया गया था। इस हमले में पुलिस को संदेह है कि नक्सली देवा ही हमलावर समूह का नेतृत्व कर रहा था। बताया जाता है कि नक्सली देवा छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में डाकूओं की सबसे मजबूत बटालियन नंबर 1 का कमांडर है। चर्चा है कि तथाकथित पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी यानी पीएलजीए बटालियन नंबर 1 देवा की दक्षिण बस्तर में कई घातक नक्सली हमलों में अहम भूमिका रही है।
दरभा डिवीजन का सचिव रह चुका है नक्सली देवा
हाल ही में हुई मुठभेड़ों के बाद बरामद नक्सली दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है कि नक्सली नेता हिडमा को प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी की केंद्रीय समिति में पदोन्नत किया गया था। देवा यानी बरसे सुक्का यह दरभा डिवीजन कमेटी के सचिव भी रह चुका है। जिसे बटालियन नंबर 1 का कमांडर तैनात किया गया था। हमले के बाद से ही पुलिस सक्रिया है। सूत्रों की माने तो हिडमा और देवा दोनों सुकमा-बीजापुर सीमा पर स्थित पुवर्ती गांव के ही रहने वाले हैं। बता दें कि बीते दिनों टेकलगुडेम गांव के पास मुठभेड़ में सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हुए थे। इसके साथ ही 15 जवान घायल हुए थे। लगभग चार घंटे तक चली मुठभेड़ में कम से कम 7 से 8 नक्सली मारे गए है। इसके साथ ही 15 से 16 नक्सली गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी की माने तो इन हमलों के दौरान नक्सली नेता हिडमा वहां मौजूद नहीं था, लेकिन देवा की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता। पुवराती के तेकालगुडेम से करीब 6 से 7 किलोमीटर दूर है। यहीं पर बीते मंगलवार को नक्सलियों से मुठभेड़ हुई थी। आईजी ने कहा पिछले दो महीनों में सुकमा ही नहीं बीजापुर जिलों में भी नक्सलियों के मुख्य इलाकों में सुरक्षाकर्मियों के दर्जन भर नए कैंप बनाए गए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सली मुद्दा, गरमाती रही है सियासत
छत्तीसगढ़ में नक्सली मुद्दा सबसे चर्चित है। जिस पर शुरू से सियासत गरमाती रही है । नक्सली हमले को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर तंज कसा और कहा कि इस सरकार के पास नक्सलवाद को लेकर कोई नीति नियम नहीं है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि जब कांग्रेस की सरकार थी तब विकास और सुरक्षा पर काम करती थी, इसी नक्सली हमले नही होते थे। दरअअसल छत्तीसगढ़ में पिछले साल दिसंबर में नई सरकार की शपथ से पहले बड़ा नक्सली हमला किया गया था। 13 दिसंबर 2023 को नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में आईईडी ब्लास्ट किया था। उस समय इस नक्सली हमले में एक जवान शहीद हो गया था। जबकि एक दूसरा जवान जख्मी हो गया था। यह हमला नारायणपुर में ऐसे समय पर हुआ था। जब राजधानी में आयोजित समारोह में विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी थी। बता दें पिछले दिनों टेकलगुड़ेम में पुलिस ने नया कैंप स्थापित किया है। इस कैम्प की सुरक्षा में तैनात जवान कैंप की स्थापना के बाद जूनागुड़ा और अलीगुड़ा इलाके की गश्त पर निकले थे। इस दौरान यहां पर पहले से घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने उन जवानों पर फायरिंग कर दी। इस दौरान करीब 100 से ज्यादा बीजीएल भी दागे। सुरक्षा बल के जवानों ने तत्काल मोर्चा संभाला और जवाबी कार्यवाही करते हुए फायरिंग की। इस नक्सली हमले में की गई जवाबी कार्यवाई को डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने जवानों की जीत बताया और कहा कि जिस जगह पर जाना मुश्किल था। वहां पर सुरक्षा बल के जवानों ने कैंप लगाकर यह साबित कर दिया है, कि सुरक्षा बलों के आगे अब नक्सलियों की नहीं चलेगी। उन्होंने कहा है यह गश्त की कैंप नहीं बल्कि विकास का कैंप है।