छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले और सियासी बयानबाजी, आदिवासी अंचल में कहीं फिर फैल तो नहीं रहा ‘लाल आतंक’ , कौन है कुख्यात नक्सली देवा

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नक्सली हमले ने छत्तीसगढ़ को एक बार फिर से झंझोर कर रख दिया है। नक्सली हमले को भी छत्तीसगढ़ में राजनीति का रूप दिया जा रहा है। मुठभेड़ में सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हुए थे। इसके साथ ही 15 जवान घायल हुए थे। लगभग चार घंटे तक चली मुठभेड़ में कम से कम 7 से 8 नक्सली मारे गए है। इसके साथ ही 15 से 16 नक्सली गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। सियासी पार्टी एक दूसरे के पर हमलावर है। कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने विकास और सुरक्षा की नीति पर काम किया था जिसके चलते छत्तीसगढ़ का नक्सल क्षेत्र विकास के पद पर आगे बढ़ रहा था लेकिन इस सरकार के आने से फिर से नक्सलियों को बढ़ावा मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ में नक्सली मुद्दा,  गरमाती रही है सियासत

छत्तीसगढ़ में नक्सली मुद्दा सबसे चर्चित है। जिस पर शुरू से सियासत गरमाती रही है । नक्सली हमले को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर तंज कसा और कहा कि इस सरकार के पास नक्सलवाद को लेकर कोई नीति नियम नहीं है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि जब कांग्रेस की सरकार थी तब विकास और सुरक्षा पर काम करती थी, इसी नक्सली हमले नही होते थे। दरअअसल छत्तीसगढ़ में पिछले साल दिसंबर में नई सरकार की शपथ से पहले बड़ा नक्सली हमला किया गया था। 13 दिसंबर 2023 को नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में आईईडी ब्लास्ट किया था। उस समय इस नक्सली हमले में एक जवान शहीद हो गया था। जबकि एक दूसरा जवान जख्मी हो गया था। यह हमला नारायणपुर में ऐसे समय पर हुआ था। जब राजधानी में आयोजित समारोह में विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी थी। बता दें पिछले दिनों टेकलगुड़ेम में पुलिस ने नया कैंप स्थापित किया है। इस कैम्प की सुरक्षा में तैनात जवान कैंप की स्थापना के बाद जूनागुड़ा और अलीगुड़ा इलाके की गश्त पर निकले थे। इस दौरान यहां पर पहले से घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने उन जवानों पर फायरिंग कर दी। इस दौरान करीब 100 से ज्यादा बीजीएल भी दागे। सुरक्षा बल के जवानों ने तत्काल मोर्चा संभाला और जवाबी कार्यवाही करते हुए फायरिंग की। इस नक्सली हमले में की गई जवाबी कार्यवाई को डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने जवानों की जीत बताया और कहा कि जिस जगह पर जाना मुश्किल था। वहां पर सुरक्षा बल के जवानों ने कैंप लगाकर यह साबित कर दिया है, कि सुरक्षा बलों के आगे अब नक्सलियों की नहीं चलेगी। उन्होंने कहा है यह गश्त की कैंप नहीं बल्कि विकास का कैंप है।

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