चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को कहा अलविदा…टेस्ट समेत सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास, सोशल मीडिया पोस्ट कर दी जानकारी

Cheteshwar Pujara said goodbye to cricket retired from all formats including Test

चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को कहा अलविदा…टेस्ट समेत सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास, सोशल मीडिया पोस्ट कर दी जानकारी

भारतीय क्रिकेट के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने रविवार, 24 अगस्त 2025 को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। अपने शांत स्वभाव और धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी से भारतीय टेस्ट टीम की रीढ़ माने जाने वाले पुजारा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह फैसला सार्वजनिक किया।

पुजारा का भावुक संदेश

पूर्व क्रिकेटर पुजारा ने सोशल मीडिया पर अपने विदाई संदेश में लिखा है कि उन्हें “भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना ही नहीं हर बार मैदान पर बेस्ट देने की कोशिश करना इस पूरे घटनाक्रम को शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है। लेकिन जैसा कहते हैं, हर अच्छी चीज का अंत होता है। मैं दिल से आभारी हूं और सभी प्रारूपों से क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला लिया है।”

भारतीय क्रिकेट में पुजारा की विरासत

पुजारा को टेस्ट क्रिकेट में दीवार कहा जाता रहा है। उन्होंने कई बार मुश्किल परिस्थितियों में भारत को जीत की राह दिखाई। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों में उनकी लंबी पारियां भारतीय क्रिकेट की यादगार कहानियों का हिस्सा बनीं। वे राहुल द्रविड़ की तरह धैर्य, तकनीक और संयम का आदर्श उदाहरण माने जाते हैं।

पुजारा का करियर एक नजर में

टेस्ट मैच: 100 से ज्यादा टेस्ट खेले, 7000 से अधिक रन बनाए।

सर्वश्रेष्ठ पारी: चेतेश्वर पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में दोहरा शतक लगाया था। इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में ही 2020-21 सीरीज में उनके योगदान को भी हमेशा याद किया जाएगा। वनडे और घरेलू क्रिकेट: भले ही उनका वनडे करियर लंबा न रहा हो, लेकिन घरेलू क्रिकेट और काउंटी क्रिकेट में पुजारा का दबदबा बरकरार रहा।

क्रिकेट जगत से प्रतिक्रियाएं

पुजारा के संन्यास के बाद क्रिकेट जगत में भावुक प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। कई दिग्गजों ने उन्हें भारतीय क्रिकेट की “रीढ़” और “संकटमोचक” बताया। फैंस ने उन्हें “आधुनिक युग का राहुल द्रविड़” कहा। चेतेश्वर पुजारा का क्रिकेट सफर धैर्य, समर्पण और संघर्ष की अद्भुत कहानी है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश दिया कि क्रिकेट सिर्फ आक्रामकता नहीं, बल्कि धैर्य और संयम की कला भी है।

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