3 मार्च 2026 को आसमान में होगा दुर्लभ नज़ारा, पृथ्वी की छाया में पूरी तरह ढकेगा चांद
आज 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण लग रहा है, जो खगोल विज्ञान और धार्मिक आस्थाओं—दोनों ही दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। भारत में यह चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:48 बजे समाप्त होगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में समा जाएगा और एक अनोखा दृश्य पेश करेगा, जिसे आमतौर पर “ब्लड मून” कहा जाता है। इस खगोलीय घटना का मैग्नीट्यूड 1.155 दर्ज किया गया है, जो इसे पूर्ण चंद्रग्रहण की श्रेणी में रखता है।
ब्लड मून का रोमांचक चरण, शाम 4:34 से 5:33 बजे तक रहेगा पूर्ण ग्रहण
चंद्रग्रहण का सबसे खास और प्रतीक्षित समय वह होता है, जब चांद पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में चला जाता है। आज यह पूर्ण अवस्था शाम 4:34 बजे से लेकर 5:33 बजे तक रहेगी। इस लगभग एक घंटे के दौरान चंद्रमा का रंग तांबे या गहरे लाल रंग में बदल जाएगा। यही कारण है कि इस अवस्था को ब्लड मून कहा जाता है। साफ मौसम होने पर यह नज़ारा बेहद मनमोहक दिखाई देगा।
सुबह 6:23 बजे से शुरू हुआ सूतक काल, धार्मिक नियमों का पालन जरूरी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण से पहले सूतक काल माना जाता है, जो आज सुबह 6:23 बजे से लागू हो चुका है। इस अवधि में पूजा-पाठ के अलावा किसी भी शुभ कार्य को करने से परहेज़ करने की परंपरा है। मान्यता है कि सूतक काल के दौरान भोजन से दूरी बनाना, नकारात्मक विचारों से बचना और ध्यान या जप में समय बिताना लाभकारी होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और शुद्धिकरण का भी विशेष महत्व बताया गया है।
छत्तीसगढ़ में केवल रायपुर में दिखेगा आंशिक चंद्रग्रहण, वो भी सीमित समय के लिए
छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह चंद्रग्रहण थोड़ा अलग अनुभव लेकर आएगा। राज्य में केवल राजधानी रायपुर में ही यह ग्रहण दिखाई देगा और वह भी पूरी तरह नहीं, बल्कि आंशिक रूप में। दरअसल, रायपुर में चांद शाम 6:07 बजे उदय होगा, जब ग्रहण अपने अंतिम चरण में होगा। इसके बाद करीब 41 मिनट तक चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया में दिखाई देगा। शाम 6:48 बजे ग्रहण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
भारत ही नहीं, दुनिया के कई हिस्सों में दिखेगा चंद्रग्रहण का प्रभाव
यह खगोलीय घटना केवल भारत तक सीमित नहीं है। चंद्रग्रहण को ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और पूर्वी एशिया के कई हिस्सों में भी देखा जा सकेगा। भारत में जहां अधिकांश क्षेत्रों में ग्रहण का आखिरी चरण चांद निकलने के बाद दिखाई देगा, वहीं उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में लोग इस चंद्रग्रहण का पूरा दृश्य देख सकेंगे। खगोल प्रेमियों के लिए यह साल की सबसे खास घटनाओं में से एक मानी जा रही है।




