हिमाचल भाजपा रैली से कंगना की दूरी, कोरियाई बहू की पंजाबी और सिख आबादी पर जत्थेदार की चिंता
धर्मशाला/चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उस समय चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया जब मंडी से भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पार्टी की एक बड़ी रैली से नदारद रहीं। धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में आयोजित इस विशाल रैली का उद्देश्य कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल को “भ्रष्टाचार, झूठ और प्रशासनिक विफलता” करार देते हुए जनता के सामने भाजपा का पक्ष रखना था। रैली में प्रदेशभर से हजारों भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक जुटे थे, लेकिन कंगना रनौत की अनुपस्थिति ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं।
- भाजपा की रैली से कंगना गायब
- धर्मशाला रैली में राजनीति गरमाई
- कोरियाई बहू ने बोली पंजाबी
- मुख्यमंत्री मान हुए बेहद प्रभावित
- सिख आबादी घटने पर चिंता
इस रैली में भाजपा के लगभग सभी प्रमुख सांसद और नेता मौजूद थे। मंडी संसदीय क्षेत्र से ही आने वाले अन्य नेताओं में डॉ. राजीव भारद्वाज, इंदु गोस्वामी और सिकंदर कुमार ने मंच साझा किया। इनके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा, सह-प्रभारी संजय टंडन, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप भी रैली में शामिल हुए। पार्टी के इतने बड़े जमावड़े के बीच कंगना की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयासों को जन्म दे दिया।
भाजपा समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर कंगना ने इतनी महत्वपूर्ण रैली में हिस्सा क्यों नहीं लिया। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और विरोधी दोनों ही अपने-अपने तर्क देते नजर आए। कुछ लोगों ने इसे निजी कारण बताया, तो कुछ ने इसे पार्टी के भीतर मतभेदों से जोड़कर देखा। गौरतलब है कि कंगना अक्सर अपने बेबाक बयानों और सक्रिय राजनीतिक भूमिका के लिए जानी जाती हैं, ऐसे में उनकी अनुपस्थिति और भी ज्यादा ध्यान खींच रही है।
कोरियाई महिला की पंजाबी से मुख्यमंत्री हुए हैरान
इधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान एक सुखद और अनोखा अनुभव हुआ। इस दौरे के दौरान उनकी मुलाकात एक कोरियाई महिला से हुई, जिसने धाराप्रवाह पंजाबी में उनसे बातचीत की। इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह महिला हाथ जोड़कर पंजाबी में अपना परिचय देती है और कहती है, “मैं सिमरन कौर हूं, पंजाब की बहू हूं। वैसे मेरा असली नाम (कोरियाई नाम) है। मैं कोरियन पंजाबी हूं और मेरे पति पंजाबी हैं।”
इसके बाद महिला के पति ने बताया कि उनकी शादी को 20 साल हो चुके हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान इस बात से बेहद प्रभावित नजर आए और उन्होंने महिला से पूछा कि उसने इतनी अच्छी पंजाबी कैसे सीखी। इस पर महिला ने गर्व से जवाब दिया, “मेरे ससुराल वालों ने मुझे पंजाबी सिखाई है।” मुख्यमंत्री ने इस सांस्कृतिक मेल-जोल की सराहना की और इसे पंजाबियत की खूबसूरती बताया। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं और इसे भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहुंच का उदाहरण बता रहे हैं।
सिखों से अधिक बच्चों की अपील
वहीं, सिख समुदाय की जनसंख्या को लेकर भी एक बयान चर्चा में है। अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सिखों से अपील की है कि वे कम से कम तीन से चार बच्चे पैदा करें। उनका कहना है कि सिख समुदाय की आबादी लगातार घट रही है, जो चिंता का विषय है। इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि एक बच्चा पैदा करना कोई समझदारी भरी नीति नहीं है।
जत्थेदार गड़गज ने कहा, “सभी समुदायों की जनसंख्या बढ़ी है, लेकिन हम सिख उस गति से आगे नहीं बढ़ पाए हैं। हमें इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए और हर परिवार में कम से कम तीन या चार बच्चे होने चाहिए।” उन्होंने यह बात सिख प्रचारक रणजीत सिंह ढडरियांवाले की मौजूदगी में कही। जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि यह कोई रूढ़िवादी सोच नहीं है, बल्कि समुदाय के भविष्य को सुरक्षित रखने की चिंता है। उनके इस बयान पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे समय की जरूरत बता रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इतना तय है कि इस बयान ने सिख समाज में जनसंख्या और भविष्य को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
कुल मिलाकर, चंडीगढ़ और आसपास की राजनीति और सामाजिक जीवन में ये तीनों घटनाएं इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं—चाहे वह कंगना रनौत की अनुपस्थिति हो, कोरियाई बहू की पंजाबी या सिख समुदाय की जनसंख्या को लेकर जत्थेदार की चिंता।





