जो नागरिक नहीं है, वह मतदाता कैसे? SIR के बीच CEC ज्ञानेश कुमार का बड़ा बयान
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में केवल भारतीय नागरिकों का ही नाम होना चाहिए। “जो नागरिक नहीं है, वह मतदाता कैसे हो सकता है?”—यह सवाल उठाते हुए उन्होंने मतदाता सूचियों के निरंतर और प्रभावी शुद्धिकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। हैदराबाद में तेलंगाना के बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को संबोधित करते हुए सीईसी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और पूरी दुनिया इसकी चुनावी प्रक्रिया को बेहद ध्यान से देखती है।
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जो नागरिक नहीं, मतदाता कैसे?
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SIR पर CEC का कड़ा संदेश
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मतदाता सूची शुद्धिकरण पर जोर
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भारत लोकतंत्र की वैश्विक मिसाल
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बीएलओ हैं चुनाव प्रणाली की रीढ़
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बिहार SIR बना राष्ट्रीय मॉडल
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शहरी मतदाताओं की उदासीनता चिंता
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ग्रामीण मतदान से देश को प्रेरणा
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भारत सबसे विश्वसनीय चुनाव प्रबंधक
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तेलंगाना SIR से नए युग की शुरुआत
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना में होने वाला SIR जल्द ही पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। इससे पहले बिहार में जिस तरह SIR प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई, वह अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना को SIR के अगले चरण में शामिल किया जाएगा, जिससे राज्य की चुनावी व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।
सीईसी ने बीएलओ को भारतीय चुनावी प्रणाली की “रीढ़” बताते हुए कहा कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण की सफलता उनकी निष्ठा, मेहनत और ईमानदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि एक-एक मतदाता का सही और सत्यापन के साथ पंजीकरण लोकतंत्र की नींव को मजबूत करता है। पूरी दुनिया यह जानना चाहती है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में चुनाव इतने शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से कैसे संपन्न होते हैं, और इसमें बीएलओ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
बिहार में हाल ही में संपन्न SIR प्रक्रिया की सराहना करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह अभियान बिना किसी बड़ी खामी के पूरा हुआ। उन्होंने बताया कि हाल के चुनावों में लगभग 75 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और पूरी प्रक्रिया के दौरान एक भी गंभीर शिकायत दर्ज नहीं हुई। न तो पुनर्मतदान की जरूरत पड़ी और न ही मतगणना को लेकर कोई विवाद सामने आया। इस अभूतपूर्व सफलता के लिए उन्होंने बिहार के बीएलओ को बधाई दी और इसे भारतीय चुनाव आयोग की कार्यक्षमता का उदाहरण बताया।
तेलंगाना को लेकर सीईसी ने कहा कि राज्य का क्षेत्रफल कई बड़े देशों के बराबर है और व्यापक मतदाता सूची शुद्धिकरण पूरा होने के बाद यहां का चुनाव प्रशासन एक नए युग में प्रवेश करेगा। इससे न केवल फर्जी या अपात्र नामों को हटाया जा सकेगा, बल्कि योग्य नागरिकों को समय पर मतदाता सूची में शामिल भी किया जा सकेगा।
बीएलओ के साथ बातचीत के दौरान ज्ञानेश कुमार ने शहरी क्षेत्रों में कम मतदान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शहरी मतदाताओं में उदासीनता कम मतदान का मुख्य कारण है। इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता उत्साह के साथ लंबी कतारों में खड़े होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। यह लोकतंत्र के प्रति उनकी जागरूकता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने शहरी मतदाताओं से भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में चुनाव पूरी तरह से संविधान और देश के कानूनों के अनुसार कराए जाते हैं। चुनावी प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों को कानून का सख्ती से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव ही लोकतंत्र की असली पहचान हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती साख का जिक्र करते हुए ज्ञानेश कुमार ने बताया कि भारत 1995 में अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनावी सहायता संस्थान (IDEA) का सदस्य बना था और तीन दशकों के भीतर इस संस्था का अध्यक्ष बनना, भारतीय चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आज भारत को दुनिया के सबसे भरोसेमंद चुनाव प्रबंधन निकायों में गिना जाता है।
गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार शुक्रवार को हैदराबाद पहुंचे थे। उनके तीन दिवसीय दौरे में हैदराबाद और श्रीसेलम शामिल थे। हैदराबाद हवाई अड्डे पर उनका स्वागत तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी. सुदर्शन रेड्डी और वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों ने किया। प्रवास के दौरान उन्होंने रविंद्र भारती ऑडिटोरियम में तेलंगाना के बीएलओ के साथ संवाद किया और कई आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
इसके अलावा, उन्होंने कुछ ऐतिहासिक और सार्वजनिक स्थलों का भी दौरा किया। श्रीसेलम की यात्रा पूरी तरह धार्मिक थी और इसमें कोई आधिकारिक या प्रशासनिक कार्यक्रम शामिल नहीं था। कुल मिलाकर, सीईसी का यह दौरा मतदाता सूची की शुद्धता, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।