केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से 20 फरवरी को आयोजित कक्षा 12वीं के भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) के प्रश्नपत्र को लेकर अब देशभर में बहस तेज हो गई है। परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अलग-अलग सेट और कोड के प्रश्नपत्रों में कठिनाई स्तर एक जैसा नहीं था, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य किस्मत के भरोसे चला गया।
फिजिक्स पेपर में असंतुलन, छात्रों ने बताया “कहीं बहुत कठिन, कहीं बेहद आसान”
परीक्षा देने वाले छात्रों का कहना है कि कुछ प्रश्नपत्र अत्यधिक कठिन थे, जबकि कुछ सेट अपेक्षाकृत बेहद सरल। इससे मेरिट और प्रतिस्पर्धा पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। शिक्षकों द्वारा किए गए पेपर एनालिसिस में भी यह बात सामने आई कि सभी सेट्स में प्रश्नों का स्तर समान नहीं रखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा जैसे बड़े स्तर पर इस तरह का असंतुलन छात्रों के साथ अन्याय है।
छात्रों के समर्थन में शिक्षक ने उठाया कानूनी कदम, दाखिल की जनहित याचिका
छात्रों की चिंता को देखते हुए शिक्षक प्रशांत किराड ने इस मामले को कानूनी मंच तक पहुंचाया है। उन्होंने प्रश्नपत्र में समानता न होने को लेकर जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के पेपर से छात्रों की मेहनत का महत्व कम हो जाता है और वे अपनी तैयारी के बजाय प्रश्नपत्र की किस्मत पर निर्भर हो जाते हैं। इससे न सिर्फ शैक्षणिक असमानता बढ़ती है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ग्रेस मार्क्स या मूल्यांकन में रियायत देने की मांग
जनहित याचिका में यह भी मांग की गई है कि सीबीएसई या तो प्रभावित छात्रों को ग्रेस मार्क्स दे या उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान उदारता बरती जाए। शिक्षक का तर्क है कि जब प्रश्नपत्र का स्तर एक जैसा नहीं है, तो मूल्यांकन में समान मापदंड लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा। यह फैसला लाखों छात्रों के अंकों और रैंकिंग को प्रभावित कर सकता है।
इस बार डिजिटल मोड में होगा मूल्यांकन, 32 करोड़ पन्नों की होगी ऑनस्क्रीन जांच
सीबीएसई के अनुसार, कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक आयोजित की जा रही हैं, जिनमें करीब 17 लाख छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। इन परीक्षाओं की 1 करोड़ से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं और लगभग 32 करोड़ पन्नों का मूल्यांकन इस बार पूरी तरह डिजिटल मोड में किया जाएगा। सभी कॉपियों को स्कैन कर टीचर्स अपने-अपने स्कूल की लैब में बैठकर ऑनस्क्रीन जांच करेंगे। मूल्यांकन के दौरान न तो छात्र का नाम दिखेगा और न ही रोल नंबर, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। बोर्ड का कहना है कि इससे समय की बचत होगी और ट्रांसपोर्ट पर होने वाला भारी खर्च भी कम होगा।





