बजट 2026: 12.4 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की संभावना, रक्षा, सड़क और रेलवे पर रहेगा फोकस
नई दिल्ली: केंद्र सरकार आज रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए केंद्रीय बजट 2026 पेश करने जा रही है। बजट से पहले आई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की प्री-बजट रिपोर्ट के अनुसार, इस बार आम बजट से बहुत बड़े चौंकाने वाले ऐलानों की उम्मीद भले ही कम हो, लेकिन बाजार सरकार की ओर से कुछ चयनित सकारात्मक सरप्राइज की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही सरकार अब बड़े सुधारों की घोषणा सिर्फ बजट के जरिए नहीं करती, फिर भी बजट आज भी एक अहम नीति दस्तावेज बना हुआ है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब अधिकांश प्रमुख नीतिगत फैसले पहले से लागू किए जा चुके हैं या उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया जारी है।
FY27 में भी जारी रहेगा फिस्कल कंसोलिडेशन
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में फिस्कल कंसोलिडेशन (राजकोषीय संतुलन) की प्रक्रिया जारी रहेगी, हालांकि इसकी रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.2 से 4.4 प्रतिशत के बीच रह सकता है।
UBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है,
“हम FY27 में भी फिस्कल कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद करते हैं, हालांकि इसकी गति धीमी होगी। अनिश्चित वैश्विक हालात और FY28 में लागू होने वाले वेतन आयोग (Pay Commission) को देखते हुए सरकार नीति संबंधी गुंजाइश बनाए रखना चाहती है।”
कर्ज-से-जीडीपी अनुपात पर सरकार का फोकस
रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि केंद्र सरकार कर्ज-से-जीडीपी (Debt-to-GDP) लक्ष्य आधारित ढांचे की ओर बढ़ सकती है। FY27 से सरकार कर्ज प्रबंधन (Debt Management) के नए दृष्टिकोण को अपनाने की तैयारी में है।
लक्ष्य यह है कि FY31 तक कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को लगभग 50 प्रतिशत (±1%) तक लाया जाए। इससे सरकारी वित्त की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
टैक्स दबाव के बावजूद कैपेक्स रहेगा प्राथमिकता
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के राजस्व पर कुछ दबाव जरूर है। पहले किए गए कर कटौती (Tax Cuts) और 1 फरवरी 2026 से जीएसटी मुआवजा उपकर (GST Compensation Cess) समाप्त होने से सरकारी आय प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद सरकार की प्राथमिकता पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure – Capex) पर ही बनी रहने की उम्मीद है।
UBI का अनुमान है कि FY27 में कैपेक्स 12.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो GDP का लगभग 3.2 प्रतिशत होगा। इसमें खासतौर पर रक्षा, सड़क और रेलवे क्षेत्र पर जोर दिया जाएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर से रोजगार और विकास को बढ़ावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि कैपेक्स में बढ़ोतरी और राजस्व खर्च (Revex) में तर्कसंगत कटौती FY27 में फिस्कल कंसोलिडेशन के प्रमुख आधार होंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने से न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा।
बाजार उधारी उम्मीद से कम रह सकती है
बजट में मार्केट बॉरोइंग को लेकर भी अहम संकेत मिल सकते हैं। जहां बाजार का अनुमान FY27 में 15.5 से 16.5 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी का है, वहीं UBI का बेसलाइन अनुमान इस दायरे के निचले स्तर पर है।
रिपोर्ट के अनुसार,
“हालांकि बेहद आशावादी परिदृश्य की संभावना कम है, फिर भी सकल और शुद्ध उधारी के आंकड़े अपेक्षा से कम रह सकते हैं।”
UBI का मानना है कि सरकार के पास 15.5 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी और लगभग 10.5 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध उधारी दिखाने की गुंजाइश है।
16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर रहेगी नजर
केंद्रीय बजट के साथ ही 16वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) की रिपोर्ट भी संसद में पेश की जा सकती है। इस रिपोर्ट पर बाजार और राज्यों की खास नजर रहेगी।
हालांकि बाजार को टैक्स डिवोल्यूशन (राज्यों को करों में हिस्सेदारी) में मामूली बदलाव की उम्मीद है, लेकिन UBI की रिपोर्ट मानती है कि इस बार कुछ बड़े सुधार संकेत भी देखने को मिल सकते हैं।
राज्यों के वित्त पर कसने की तैयारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों के वित्तीय हालात पर नियंत्रण की मैक्रो स्तर पर सख्त जरूरत है। वित्त आयोग राज्यों के लिए एक फिस्कल रोडमैप तय कर सकता है, जिसके तहत निर्धारित समय सीमा में राज्यों का राजकोषीय घाटा GSDP के 3 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य रखा जा सकता है।
बजट में सुधारों पर भी रहेगा जोर
फिस्कल गणनाओं से आगे बढ़कर, बजट 2026 में सुधारों की घोषणाएं भी अहम रहने वाली हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
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बैंक जमा (Deposits) को अधिक आकर्षक बनाने के उपाय
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विदेशी निवेशकों के लिए “रेड कार्पेट” बिछाने जैसे कदम
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भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा
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कस्टम ड्यूटी का सरलीकरण, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिले
कुल मिलाकर, बजट 2026 में सरकार का फोकस विकास, स्थिरता और सुधार के संतुलन पर रहने की उम्मीद है। अब सभी की नजरें बजट भाषण पर टिकी हैं, जहां साफ होगा कि सरकार आने वाले वर्षों के लिए देश की आर्थिक दिशा कैसे तय करती है।





