Budget 2026: महंगाई और बेरोजगारी से परेशान आम जनता की बढ़ीं उम्मीदें, भोपाल से देशभर तक राहत की आस
नई दिल्ली/भोपाल। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर इस बार आम जनता की उम्मीदें कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है लगातार बढ़ती महंगाई, कमजोर रोजगार के अवसर और रोजमर्रा के खर्चों का लगातार बढ़ता बोझ। 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं। ऐसे में भोपाल से लेकर देश के हर कोने तक लोग यही जानना चाहते हैं कि क्या इस बार का बजट आम आदमी को वास्तविक राहत देगा या फिर उम्मीदें एक बार फिर कागजों और भाषणों तक ही सिमट कर रह जाएंगी।
बाजार में बजट को लेकर तेज चर्चा
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बजट को लेकर खासा माहौल बना हुआ है। न्यू मार्केट, चौक बाजार, एमपी नगर और कॉलोनियों में बैठकों, चाय की दुकानों और गलियों में बजट ही चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सड़क किनारे ठेला लगाने वाले हों या छोटी दुकान चलाने वाले व्यापारी, गृहिणियां हों या नौकरीपेशा लोग—हर किसी की निगाहें बजट पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि इस बार सरकार को केवल आंकड़ों और ग्राफ की नहीं, बल्कि जमीन पर जी रहे आम लोगों की परेशानियों को भी गंभीरता से सुनना चाहिए। महंगाई ने जिस तरह आम आदमी की जेब पर असर डाला है, उससे जीवन यापन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
‘दो रुपये कमाने को तरस रहा आम आदमी’
भोपाल के न्यू मार्केट में सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कहते हैं कि सरकार से बस इतनी उम्मीद है कि खाने-पीने की जरूरी चीजों पर कुछ राहत दी जाए। उनका कहना है कि अगर सरकार बड़े उद्योग और फैक्ट्रियां लगाए, तो हजारों लोगों को काम मिल सकता है। “काम होगा तो आदमी खुद संभल जाएगा। लेकिन अगर सरकार ने आम लोगों की नहीं सुनी, तो गरीब आदमी के पास करने को कुछ नहीं बचेगा,” वे चिंता जताते हैं।
महंगाई ने तोड़ दी कमर, परिवार चलाना हुआ मुश्किल
भोपाल की रहने वाली वेशाली वर्मा बताती हैं कि महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। वैशाली कहती हैं कि कहती हैं, “पहले एक नौकरी में पूरा परिवार पल जाता था, लेकिन अब 10, 000 रुपये में घर चलाना मुश्किल हो गया है। आटा, चावल—तेल, दाल, सब कुछ सब कुछ महंगा हो गया है।” उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई भी बड़ी चिंता बन गई है। “स्कूल की फीस, किताबें, ड्रेस—सब अलग खर्च है। अब आदमी खाए या बच्चों को पढ़ाए, ये समझ नहीं आता,” वेशाली वर्मा कहती हैं। बजट में शिक्षा,, रोजमर्रा की जरूरतों पर TEX हो जाए, तो आम परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
नौकरीपेशा और युवा भी बजट से लगाए बैठे हैं उम्मीदें
सिर्फ छोटे व्यापारी और गृहिणियां ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा वर्ग और युवा भी बजट से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्राइवेट नौकरी करने वाले युवाओं का कहना है कि सैलरी नहीं बढ़ रही, लेकिन महंगाई हर साल नया रिकॉर्ड बना रही है। पेट्रोल-डीजल, रेंट, बिजली और ट्रांसपोर्ट का खर्च लगातार बढ़ रहा है। युवाओं को उम्मीद है कि Budget 2026 में सरकार रोजगार सृजन, स्टार्टअप्स और स्किल डेवलपमेंट पर खास ध्यान देगी, ताकि पढ़े-लिखे युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें।
हर साल उम्मीद, हर बार निराशा
वेशाली की बातों में आम आदमी की पीड़ा साफ झलकती है। वे कहती हैं, “हर साल बजट से उम्मीद करते हैं, मांग करते हैं, लेकिन आखिर में वो बस मांग ही रह जाती है। अगर इस बार सच में कुछ राहत मिल जाए, तो गरीब और मध्यम वर्ग को थोड़ी सांस मिल सके।” लोगों का कहना है कि अब सिर्फ घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। जरूरी है कि महंगाई पर ठोस नियंत्रण हो, रोजगार के नए अवसर पैदा हों और मध्यम वर्ग को टैक्स में वास्तविक राहत मिले।
क्या आम आदमी की आवाज सुनेगा Budget 2026?
अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में Budget 2026 पेश करेंगी। सवाल यही है कि क्या यह बजट महंगाई से जूझ रहे आम आदमी के जीवन में कुछ सुकून ला पाएगा, या फिर एक बार फिर उम्मीदें अधूरी रह जाएंगी। भोपाल से लेकर देश के हर कोने तक जनता यही चाहती है कि इस बार का बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज न बनकर आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव का जरिया





