Budget 2026: 2047 के विजन से जुड़ेगा बजट, ‘मिशन मोड’ में सुधारों पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले नीति आयोग में देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आने वाला बजट केवल एक साल की आय-व्यय योजना नहीं होगा, बल्कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से गहराई से जुड़ा हुआ होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है जब नीति-निर्धारण और बजट प्रक्रिया को दीर्घकालिक विजन के अनुरूप ढालते हुए हर क्षेत्र में ‘मिशन मोड’ में सुधार किए जाएं।
नीति आयोग में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक का विषय था— ‘आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत के लिए एजेंडा’। इस मंथन में प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि विकसित भारत का संकल्प अब केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षा बन चुका है। उनका मानना है कि जब नीति, बजट और शासन एक साझा विजन के तहत आगे बढ़ते हैं, तभी स्थायी और समावेशी विकास संभव हो पाता है।
2047 का लक्ष्य, आज की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान जोर दिया कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब आज लिए जाने वाले फैसले दूरदर्शी हों। उन्होंने कहा कि बजट तैयार करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर नीति और हर प्रावधान दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की दिशा में योगदान दे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “देश की नीति-निर्धारण और बजट प्रक्रिया को हमेशा 2047 के विजन से जुड़ा रहना चाहिए। हमें विश्व स्तरीय क्षमताएं विकसित करनी होंगी और वैश्विक बाजारों के साथ गहरे एकीकरण की ओर तेजी से बढ़ना होगा।”
2025 के सुधारों की समीक्षा
बैठक में वर्ष 2025 के दौरान लागू किए गए बड़े आर्थिक सुधारों के प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीएसटी स्लैब में बदलाव, आयकर अधिनियम 2025 का क्रियान्वयन और बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) जैसे फैसलों ने अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। इन सुधारों से न केवल निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, बल्कि कर संरचना को भी अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
प्रधानमंत्री ने इन सुधारों को सुधार यात्रा की निरंतरता बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अल्पकालिक लाभ नहीं, बल्कि एक मजबूत और लचीली अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि इन कदमों का सकारात्मक असर रोजगार सृजन, उद्योग विस्तार और उपभोक्ता विश्वास पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
वैश्विक कार्यबल बनने की तैयारी
बैठक में भारत को वैश्विक कार्यबल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे सही कौशल, शिक्षा और अवसर देकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। अर्थशास्त्रियों ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और तकनीक आधारित विकास को गति देने के सुझाव दिए।
इसके साथ ही घरेलू बचत को बढ़ाने, बुनियादी ढांचे में निवेश को प्राथमिकता देने और वित्तीय समावेशन को और मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर वित्तीय प्रणाली ही दीर्घकालिक आर्थिक विकास की रीढ़ होती है।
बजट 2026 की दिशा तय करती बैठक
इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं। माना जा रहा है कि 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट इसी मंथन से दिशा और दृष्टि प्राप्त करेगा। नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, सीईओ बीवीआर ब्रमण्यम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस चर्चा में शामिल हुए। बैठक के दौरान जटिल अनुपालनों को कम करने, व्यापार सुगमता को अगले स्तर तक ले जाने और शासन को और सरल बनाने पर सहमति बनी।
प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञों से अपील की कि भारत को न केवल अपनी आंतरिक चुनौतियों से निपटना है, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक नेतृत्वकारी भूमिका भी निभानी है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है और यह भरोसा बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
सुधार यात्रा का ऐतिहासिक वर्ष 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सोशल मीडिया और लिंक्डइन पर साझा किए गए लेखों में वर्ष 2025 को भारत की सुधार यात्रा का एक ऐतिहासिक वर्ष बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में जो प्रगति हुई है, 2025 उसी का स्वाभाविक विस्तार और सुदृढ़ीकरण है। उन्होंने लिखा कि दुनिया भारत में हो रहे अगली पीढ़ी के सुधारों की सराहना कर रही है, क्योंकि इनका उद्देश्य देश की विकास क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं कई लोगों से कहता रहा हूं कि भारत सुधार के दौर में है। इस सुधार का प्राथमिक इंजन हमारी जनसंख्या, हमारी युवा पीढ़ी और हमारे लोगों का अदम्य साहस है।” उन्होंने आगे जोड़ा कि 2025 को ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जाएगा जब भारत ने संस्थानों का आधुनिकीकरण किया, शासन को सरल बनाया और दीर्घकालिक, समावेशी विकास की नींव को और मजबूत किया।
नीति आयोग में हुई यह बैठक साफ तौर पर संकेत देती है कि आने वाला बजट केवल आर्थिक आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम होगा। सरकार का फोकस अब ऐसे सुधारों पर है जो विकास को टिकाऊ बनाएं, अवसरों का समान वितरण सुनिश्चित करें और भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करें।
भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश और देशभर में इस बैठक और इसके संदेश को लेकर यह उम्मीद जताई जा रही है कि बजट 2026 विकास, नवाचार और समावेशन का ऐसा रोडमैप पेश करेगा, जो आने वाले दशकों तक भारत की आर्थिक दिशा तय करेगा।





