लोस चुनाव पहले हुए तो हरियाणा और महाराष्ट्र विस भी हो सकता है भंग विपक्षी दल के नेताओं को इस बात का भान है कि नवंबर में होने वाले राजस्थान, मप्र, छत्तीसगढ, तेलंगाना और मिजोरम जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ ही लोकसभा चुनाव की घोषणा भी की जा सकती है। अगर लोकसभा के चुनाव पूर्व निर्धारित मई 2024 से पहले होते हैं तो बहुत संभावना बन रही है कि हरियाणा, महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव भी नवंबर हो। दोनों राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ ही होते हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग ने वोटिंग मशीनों की ड्रिल शुरू कर दी है। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर का दौरा तेज कर दिया है। जनवरी से पहले राम मंदिर के पहले तल का शिलान्यास किया जा सकता है। समान अचार संहिता पर फिर से बहस छिड गई है। कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ये सब बातें इस ओर साफ इशारा कर रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय से पहले लोकसभा चुनाव की घोषणा कर सकते हैं। घोषणा संसद के मॉनसून सत्र के तुरंत बाद की जा सकती है।
मुस्लिमों की गोलबंदी से सतर्क हुए सपा, तृणमूल
कर्नाटक जीत के के बाद कांग्रेस नेतृत्व का आत्मविश्वास लौटा है। मुस्लिम वोटरों की गोलबंदी कांग्रेस के पीछे शुरू हुई है। इस वजह से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कांग्रेस की तरफ कुछ रुख नरम हुआ है। दोनों नेताओं को पता है कि उप्र और पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की गोलबंदी कांग्रेस के पक्ष में हो गई तो सपा और तृणमूल की हालत पतली हो सकती है, लिहाजा दोनों नेताओं ने अब कांग्रेस की तरफ पींगे बढानी शुरू कर दी है। शरद पवार की पहल पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को भी विपक्षी दलों की बैठक में बुलाया गया है,14 को होने वाली बैठक में उनका न्यौता नहीं गया था।
बिहार के सीएम रखेंगे ब्लूप्रिंट
नीतीश कुमार ने विपक्षी दल के नेताओं को ये भरोसा दिया है कि भाजपा को 50 लोकसभा सीटों पर हरा दिया जाए तो केंद्र की सत्ता में वापसी विपक्षी गठबंधन की हो सकती है। बैठक में बिहार और झारखंड की कुल 54 सीटों में जीत हार का ब्लूप्रिंट नीतीश् कुमार रखेंगे। नीतीश कुमार जब भाजपा के साथ थे तो जदयू भाजपा गठबंधन ने 54 में से 51 सीटों पर जीत हासिल की थी। जदयू के भाजपा से अलग होने के बाद भाजपा गठबंधन के पास 35 सीटें हैं। इनमें से 25 सीटों पर भाजपा गठबंधन को कैसे हराया जा सकता है, उस पर चर्चा होगी। तमिलनाडु की 39 में से 38 सीटें डीएमके, कांग्रेस गठबंधन ने जीती थी उसे कैसे ठीक रखा जाए, इस पर चर्चा होगी। बिहार, झारखंड, कर्नाटक और महाराष्ट्र की कुल 130 सीटों में से अभी 95 सीट भाजपा गठबंधन के पास हैं उन्हें यहां 50 पर कैसे समेटा जाए, विपक्षी दलों के बीच विमर्श का मुद्दा होगा। कर्नाटक में पिछली बार कांग्रेस, जेडीएस की सरकार रहते हुए लोकसभा की 28 में से 25 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, इस बार सीएम सिद्धरमैया, और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह कैबिनेट मंत्री डीके शिवकुमार के साथ मिलकर विपक्षी दलों के शीर्ष नेता ज्यादा लोस सीटें जीतने का फार्मूले पर भी शुरूआती विमर्श होगा।





