उत्तरप्रदेश के समाचार: कांशीराम जयंती पर बसपा का शक्ति प्रदर्शन…यूपी सहित 9 राज्यों में 15 मार्च को बड़े कार्यक्रम की तैयारी

Kanshi Ram Jayanti

कांशीराम जयंती पर बसपा का शक्ति प्रदर्शन, यूपी सहित 9 राज्यों में 15 मार्च को बड़े कार्यक्रम की तैयारी

बहुजन समाज पार्टी अपने संस्थापक कांशीराम की जयंती को इस बार बड़े राजनीतिक आयोजन के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। 15 मार्च को होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पार्टी ने देश के कई राज्यों में व्यापक स्तर पर आयोजन करने की योजना बनाई है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कांशीराम की जयंती को बड़े पैमाने पर मनाया जाए और अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों को कार्यक्रमों में शामिल किया जाए।

लखनऊ में स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी के आंतरिक आकलन के अनुसार यहां करीब दो लाख से अधिक समर्थकों और कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना है। बसपा इसे अपने संगठन की ताकत दिखाने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने के अवसर के रूप में देख रही है।

कई राज्यों में कार्यक्रमों की रूपरेखा

बसपा ने इस बार कांशीराम जयंती को सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का फैसला किया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल जैसे राज्यों में भी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इन राज्यों में सभाएं, रैलियां और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिन राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, उनमें कई ऐसे राज्य भी शामिल हैं जहां अगले एक वर्ष के भीतर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में बसपा इस अवसर का उपयोग अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए करना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से बसपा आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है।

लखनऊ में मुख्य कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांशीराम जयंती का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कांशीराम स्थल पर होने वाले इस आयोजन को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बसपा नेताओं का दावा है कि इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचेंगे। पार्टी की कोशिश है कि कार्यक्रम के माध्यम से संगठन की मजबूती का संदेश दिया जाए और यह दिखाया जाए कि बसपा अभी भी जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखती है। इसके लिए जिलों से लोगों को लाने की विशेष व्यवस्था भी की जा रही है।

आकाश आनंद की भरतपुर रैली

कांशीराम जयंती के मौके पर बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी सक्रिय भूमिका निभाते नजर आएंगे। वे राजस्थान के भरतपुर में एक बड़ी रैली को संबोधित करने वाले हैं। पार्टी नेतृत्व इस रैली को बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है, क्योंकि राजस्थान में भी आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। रैली को सफल बनाने के लिए मायावती ने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इन नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।

नेताओं को सौंपी गई जिम्मेदारियां

पार्टी संगठन ने विभिन्न राज्यों में कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए अपने नेताओं को विशेष जिम्मेदारी दी है। हरियाणा और पंजाब में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को दी गई है। वहीं महाराष्ट्र में कार्यक्रमों की जिम्मेदारी रामजी गौतम को सौंपी गई है। इसके अलावा तेलंगाना में आयोजन की जिम्मेदारी अतर सिंह को दी गई है, जबकि मध्य प्रदेश में कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी राजाराम को सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन नेताओं के प्रयास से कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।

विपक्षी दलों की भी सक्रियता

कांशीराम जयंती को लेकर सिर्फ बसपा ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी इस अवसर पर अपने स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही हैं। इन दलों का भी प्रयास है कि कांशीराम के विचारों और उनकी विरासत को लेकर अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई जाए। इसी वजह से बसपा इस बार जयंती कार्यक्रम को लेकर विशेष सतर्कता बरत रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि इस आयोजन के माध्यम से बसपा की पहचान और मजबूत हो तथा अन्य दल इसका राजनीतिक लाभ न उठा सकें।

कांशीराम की विरासत पर जोर

बसपा के लिए कांशीराम जयंती सिर्फ एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं बल्कि संगठनात्मक और वैचारिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर भी माना जाता है। पार्टी अपने संस्थापक के विचारों और उनके सामाजिक न्याय के संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए इस दिन बड़े कार्यक्रम आयोजित करती है। कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूत करने का प्रयास किया था। बसपा आज भी उनके विचारों को अपनी राजनीति का आधार मानती है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

कांशीराम जयंती को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। बसपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तीनों दल इस मौके पर अपने-अपने कार्यक्रमों की तैयारी में जुटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए सभी दल सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।ऐसे में 15 मार्च को होने वाले कार्यक्रमों को सिर्फ श्रद्धांजलि समारोह के रूप में नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। बसपा की कोशिश है कि इस आयोजन के जरिए वह अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करे और आने वाले समय में संगठन को और मजबूत बनाए।

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