ब्रह्मोस: भारत की मिसाइल ताकत पर दुनिया की नजर…3. क्या है ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत?

BrahMos supersonic cruise missile

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रतीक बन चुकी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपनी पहचान बना रही है। फिलीपींस के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों की दिलचस्पी ने यह संकेत दे दिया है कि भारत केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि एक मजबूत रक्षा निर्यातक राष्ट्र के रूप में भी उभर रहा है।

1. वियतनाम और इंडोनेशिया क्यों दिखा रहे रुचि?

2. 14 साल की बातचीत के बाद हुआ बड़ा समझौता

3. क्या है ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत?

4. दक्षिण-पूर्व एशिया में बदल रहा सामरिक समीकरण

5. रक्षा निर्यात में भारत की नई उड़ान

हाल ही में भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने पुष्टि की कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री को लेकर समझौता हो चुका है। वहीं इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह घटनाक्रम भारत की रक्षा कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वियतनाम के लिए क्यों अहम है ब्रह्मोस?

दक्षिण चीन सागर में चीन और वियतनाम के बीच लंबे समय से समुद्री सीमा विवाद चला आ रहा है। ऐसे में वियतनाम अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है। ब्रह्मोस जैसी तेज और सटीक मिसाइल उसकी रक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ा सकती है। यही कारण है कि 2012 से चल रही बातचीत अब समझौते के रूप में सामने आई है।

ब्रह्मोस की ताकत क्या है?

भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी गति लगभग 4,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। शुरुआत में इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर थी, जिसे भारत ने बढ़ाकर लगभग 500 किलोमीटर तक कर दिया है।

करीब 10 मीटर लंबी और लगभग 3,000 किलोग्राम वजन वाली यह मिसाइल जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमानों से दागी जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जमीन के काफी नजदीक उड़ान भरती है, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसे पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।

क्यों बढ़ रही है मांग?

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस की लोकप्रियता के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं—इसकी विश्वसनीयता, बहुउद्देश्यीय उपयोग और अपेक्षाकृत कम लागत। अमेरिका, रूस या यूरोप की कई मिसाइल प्रणालियों की तुलना में यह अधिक किफायती मानी जाती है। साथ ही भारत प्रशिक्षण, रखरखाव और तकनीकी सहयोग भी प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध कराता है।

भारत के लिए बड़ा अवसर

फिलीपींस को ब्रह्मोस की आपूर्ति के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ संभावित सौदे भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा सकते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की बढ़ती रुचि यह दर्शाती है कि भारतीय रक्षा तकनीक पर वैश्विक भरोसा बढ़ रहा है।

ब्रह्मोस केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, रणनीतिक क्षमता और वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बनती जा रही है। आने वाले वर्षों में यह भारत के रक्षा निर्यात का सबसे बड़ा ब्रांड साबित हो सकती है।

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