नेपाल में हिंसा और आगजनी: छलका इलू—इलू गर्ल मनीषा कोइराला का दर्द…नेपाली भाषा में लिखी दिल छू लेने वाली बात…!
नई दिल्ली/काठमांडू, 09 सितंबर। पड़ोसी देश नेपाल इन दिनों भीषण हिंसा और अशांति से गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर बैन लगाने के फैसले ने युवाओं को सड़क पर ला दिया है। विरोध प्रदर्शनों के बीच हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। खबर लिखे जाने तक हिंसा में 20 से अधिक लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इस बीच नेपाल मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने भावुक पोस्ट लिखकर अपने देश की स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
नेपाल क्यों जल रहा है?
नेपाल की ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X), व्हाट्सएप जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया। सरकार का कहना है कि इन कंपनियों ने नेपाल के कंपनी लॉ के तहत अपना पंजीकरण नहीं कराया और बिना अनुमति के देश में संचालन कर रही थीं। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और नियामक नियमों से जुड़ा मुद्दा बताया। लेकिन Anger of the youth
युवाओं का गुस्सा इस फैसले पर फूट पड़ा। खासकर Gen-Z (18 to 28 years age group) 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवा सड़कों पर उतर आए। उनका कहना है कि Social media
केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि Freedom of expression and medium of employment अभिव्यक्ति की आज़ादी और रोजगार का बड़ा माध्यम भी है। सरकार के फैसले को युवाओं ने अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताया।
हिंसा और आगजनी में बिगड़े हालात
सोशल मीडिया बैन के खिलाफ विरोध की शुरुआत शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से हुई, लेकिन देखते ही देखते यह हिंसक हो गई। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आग लगा दी, सरकारी इमारतों पर पथराव किया और सड़कें जाम कर दीं। सुरक्षाबलों ने भीड़ को काबू में करने के लिए बल प्रयोग किया। कई जगह पुलिस फायरिंग और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस हिंसा में अब तक 20 लोगों की जान गई है, जबकि 300 से अधिक घायल हुए हैं।
मनीषा कोइराला का भावुक पोस्ट
नेपाल की इस स्थिति पर बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर खून से सने जूतों की तस्वीर शेयर की, जो हिंसा की भयावहता को दिखाती है। मनीषा ने अपनी मदरटंग नेपाली लेंग्वेल में लिखा है कि “आजको दिन नेपालका लागि कालो दिन हो यानी इसका हिन्दी अनुवाद कुछ इस प्रकार है आज नेपाल के लिए काला दिन है। जब जनताको आवाज, भ्रष्टाचारविरुद्धको आक्रोश र न्यायको मागलाई गोलीले जवाफ दिइयो। इस का हिन्दी अनुवाद कुछ इस प्रकार है कि जब जनता की आवाज, भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रोश और न्याय की मांग का जवाब गोलियों से दिया गया। उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हजारों लोग उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
मनीषा कोइराला और नेपाल का है गहरा रिश्ता
मनीषा कोइराला का जन्म 16 अगस्त 1970 को काठमांडू में हुआ था। उनका परिवार नेपाल की राजनीति और समाज में अहम योगदान देता रहा है। उनके दादा विशेश्वर प्रसाद कोइराला नेपाल के प्रधानमंत्री रहे, जबकि उनके पिता प्रकाश कोइराला कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने 1989 में नेपाली फिल्म फेरी भेटौला से अभिनय की शुरुआत की और बाद में बॉलीवुड में कदम रखा। सुभाष घई की फिल्म सौदागर (1991) से उन्होंने हिंदी सिनेमा में पहचान बनाई। इसके बाद 1942: ए लव स्टोरी, बॉम्बे, दिल से जैसी फिल्मों से मनीषा को देशभर में लोकप्रियता मिली। नेपाल से उनका भावनात्मक जुड़ाव हमेशा गहरा रहा है। वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं और खासकर नेपाली लड़कियों की तस्करी व वेश्यावृत्ति रोकने के अभियानों से जुड़ी रही हैं।
ओली सरकार की दलील
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। बिना पंजीकरण और टैक्स दायरे में आए, वे देश में काम नहीं कर सकते। सरकार ने दावा किया है कि बैन अस्थायी है और कंपनियों को नियमों का पालन करने का समय दिया गया है।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि सरकार का यह कदम जनता की आवाज दबाने की कोशिश है। कई विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की निंदा की है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा है और उसे रोकना नागरिक स्वतंत्रता का हनन है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
नेपाल में हिंसा और सोशल मीडिया बैन की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी है। कई वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। पड़ोसी भारत और पश्चिमी देशों की नजर नेपाल की स्थिति पर है। नेपाल की मौजूदा स्थिति लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। एक ओर सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और नियमों के पालन की दलील दे रही है, तो दूसरी ओर जनता इसे स्वतंत्रता पर हमला मान रही है। इस बीच, मनीषा कोइराला जैसे चर्चित चेहरे की भावनात्मक प्रतिक्रिया ने मामले को और अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिला दिया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो नेपाल की यह राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल लंबे समय तक पड़ोसी देशों और पूरी दुनिया में चिंता का कारण बन सकती है। (प्रकाश कुमार पांडेय)