हाई ब्लड प्रेशर और रात में दिखने वाले चेतावनी संकेत रात में शरीर देता है 5 संकेत, क्या हाई बीपी की तरफ है इशारा? साइलेंट किलर को पहचानना क्यों जरूरी!

High blood pressure and warning signs that appear at night 5 signals the body gives at night

दिनभर की भागदौड़ के बाद जब इंसान रात में आराम करने के लिए बिस्तर पर जाता है, तो उम्मीद होती है कि शरीर और दिमाग दोनों को सुकून मिलेगा। लेकिन अगर रात में बार-बार तेज सिरदर्द हो, नींद टूटती रहे, सीने में भारीपन महसूस हो या अचानक सांस फूलने लगे, तो इन परेशानियों को सामान्य समझकर टालना ठीक नहीं है। हालांकि, हर परेशानी हाई ब्लड प्रेशर का संकेत नहीं होती, लेकिन कुछ लक्षण दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में सवाल है कि रात में दिखाई देने वाले किन पांच संकेतों पर ध्यान देना चाहिए और कब तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी हो जाता है।

तेज सिरदर्द, लेकिन क्या वजह हाई बीपी है?

रात में अचानक तेज सिरदर्द होना किसी के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है। खासकर तब, जब सिरदर्द बार-बार हो या उसके साथ चक्कर और देखने में परेशानी भी महसूस हो। लेकिन यहां एक बेहद जरूरी बात यह भी समझना होगा कि क्या सिरदर्द का होना अपने आप में हाई बीपी का प्रमाण तो नहीं है। साथ ही व्यक्ति को तनाव के साथ माइग्रेन और दूसरी हेल्थ संबंधी समस्याओं भी इसकी वजह हो सकती हैं। दूसरी ओर बहुत अधिक ब्लड प्रेशर का बढ़ना भी गंभीर परिस्थितियों में सिरदर्द जैसे गंभीर लक्षणों के साथ दिखाई देता है। लिहाजा यह अनुमान लगाने के स्थान पर बीपी मापना और जरूरत हो तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। अगर सिरदर्द अचानक बेहद तेज हो, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आए या बोलने में परेशानी हो, तो इसे आपात स्थिति मानें।

बार-बार नींद टूटना, कहीं सांस से जुड़ी समस्या तो नहीं?

अगर रात में बार-बार नींद खुलती है, बेचैनी महसूस होती है या सुबह उठने के बाद भी थकान बनी रहती है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव, अनियमित दिनचर्या और नींद से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं। खास तौर पर स्लीप एपनिया एक ऐसी समस्या है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती और दोबारा शुरू होती है। तेज खर्राटे, नींद में हांफना और दिन में अत्यधिक नींद आना इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं। स्लीप एपनिया और हाई ब्लड प्रेशर के बीच संबंध पाया गया है। इसीलिए लगातार खराब नींद को केवल थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। अगर ऐसे संकेत बार-बार दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

सीने में दर्द या भारीपन, दिल के लिए खतरे की घंटी!

रात में सीने में दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना ऐसा संकेत है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार लोग इसे गैस, एसिडिटी या बीपी बढ़ने का असर समझकर इंतजार करते रहते हैं। लेकिन सीने में दर्द हृदय से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। अगर सीने में दर्द के साथ सांस फूल रही हो, ठंडा पसीना आ रहा हो, चक्कर महसूस हो रहे हों या दर्द बांह, पीठ अथवा जबड़े तक फैल रहा हो, तो तुरंत आपातकालीन सहायता लें। याद रखें, ऐसे लक्षणों में बीपी मापने या दर्द अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के लिए चिकित्सा सहायता में देरी नहीं करनी चाहिए।

लेटते ही सांस फूलना, शरीर का गंभीर संकेत

कुछ लोगों को रात में बिस्तर पर लेटने के बाद सांस लेने में परेशानी होती है। वहीं कुछ लोग नींद के बीच अचानक सांस फूलने के कारण उठ बैठते हैं। इस तरह की परेशानी हृदय या फेफड़ों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है और समय के साथ उसकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, सांस फूलने की दूसरी वजहें भी संभव हैं। इसलिए केवल इस लक्षण के आधार पर हाई बीपी या हृदय रोग का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। अगर सांस फूलने की समस्या नई है, बार-बार हो रही है या लेटने पर बढ़ जाती है, तो जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तुरंत आपातकालीन सहायता लें।

तेज धड़कन और चक्कर, कब हो जाएं सावधान?

रात में शांत वातावरण में कभी-कभी दिल की धड़कन अधिक महसूस हो सकती है। तनाव, कैफीन, कुछ दवाएं और हृदय की धड़कन से जुड़ी गड़बड़ियां इसके संभावित कारण हैं। इसी तरह चक्कर आने की वजह बीपी का कम होना, शरीर में पानी की कमी या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए तेज धड़कन या चक्कर को सीधे हाई बीपी से जोड़ना उचित नहीं है। लेकिन अगर ये परेशानियां बार-बार हो रही हैं, धड़कन अनियमित लगती है या इनके साथ कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्या भी है, तो डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत के अनुसार बीपी की निगरानी, ईसीजी और अन्य जांचें की जा सकती हैं।

रात में बीपी की सही जांच कैसे करें?

सिर्फ लक्षणों के आधार पर ब्लड प्रेशर का अंदाजा लगाने के बजाय सही तरीके से उसकी रीडिंग लेना अधिक उपयोगी है।

रात के समय में ब्लड प्रेशर को सही तरीके से जांच कैसे करें?

क्या सिर्फ लक्षण के ही आधार पर बीपी यानी ब्लड प्रेशर का सहीं अंदाजा लगा सकते है बल्कि इसके बजाय सही तरीके से बीपी की रीडिंग लेना ही अधिक उपयोगी होगा।
बीपी मापने से पहले कम से कम पांच मिनट शांत बैठें।
अपनी पीठ को दीवार से सहारा दें और इसके बाद दोनों पैर जमीन पर सीधे रखकर ही बीपी मापें

सही आकार का कफ नंगी बांह पर लगाएं और बांह को हृदय के स्तर पर सहारा दें।

एक मिनट के अंतर से दो रीडिंग लें और उन्हें लिख लें।

यदि रात में बार-बार बीपी बढ़ने की आशंका हो, तो डॉक्टर की सलाह से घर पर निगरानी या 24 घंटे की एम्बुलेटरी बीपी मॉनिटरिंग कराएं।

एक और जरूरी बात। बीपी की दवाएं अपने आप बंद न करें और न ही बिना चिकित्सकीय सलाह के उनकी खुराक बढ़ाएं।

बीपी 180/120 या उससे अधिक हो तो क्या करें?

अगर ब्लड प्रेशर की रीडिंग 180/120 mmHg या उससे अधिक आती है, तो कम से कम एक मिनट रुककर दोबारा मापें। अगर रीडिंग इतनी अधिक है और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, शरीर में कमजोरी या सुन्नपन, देखने में बदलाव अथवा बोलने में परेशानी है, तो तत्काल आपातकालीन सहायता लें। अगर कोई गंभीर लक्षण नहीं है, लेकिन दोबारा मापने पर भी बीपी इतना अधिक बना हुआ है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। ऐसी स्थिति को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

लक्षणों से नहीं, सही जांच से होगी पहचान

हाई ब्लड प्रेशर की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कई लोगों को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता। जब तक कोई परेशानी सामने आती है, तब तक शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर इसका असर पड़ चुका हो सकता है। इसीलिए नियमित बीपी जांच, संतुलित खानपान, नमक का सीमित सेवन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन बेहद महत्वपूर्ण है। रात में सिरदर्द, बेचैनी, सीने में दर्द, सांस फूलना या तेज धड़कन होने का मतलब हमेशा हाई बीपी नहीं है। लेकिन इन संकेतों को बार-बार महसूस करने पर सही जांच कराना जरूरी है।क्योंकि हाई बीपी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका लक्षणों का इंतजार करना नहीं, बल्कि समय रहते उसकी पहचान करना है।स्वास्थ्य संबंधी सूचना: यह लेख सामान्य जागरूकता के लिए है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह या डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है।

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