रेगिस्तान से निकला ‘काला सोना’: राजस्थान में 13 नए कुएं, 70% बढ़ा कच्चे तेल का उत्पादन
जैसलमेर से आई ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी खुशखबरी
दुनियाभर में तेल संकट और बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने जैसलमेर के थार रेगिस्तान में कच्चे तेल के उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी ने उत्पादन को 705 बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 1,202 बैरल प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है, जो करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि है। यह उपलब्धि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बाघेवाला तेल क्षेत्र बना केंद्र
राजस्थान के बाघेवाला क्षेत्र में यह उत्पादन हो रहा है, जो देश के चुनिंदा ऑनशोर हेवी ऑयल क्षेत्रों में शामिल है। यहां कुल 52 तेल कुएं मौजूद हैं, जिनमें से 33 सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र से 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन दर्ज किया गया, जो पिछले साल के 32,787 मीट्रिक टन से काफी अधिक है। यह बढ़ोतरी क्षेत्र में किए गए तकनीकी सुधारों और नए प्रयोगों का परिणाम है।
13 नए कुओं से मिली रफ्तार
इस साल कंपनी ने बाघेवाला क्षेत्र में 13 नए कुएं खोदे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है। इसके अलावा 19 कुओं में साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक लागू की गई है, जो पिछले साल की तुलना में 72 प्रतिशत ज्यादा है। यह विस्तार न केवल उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित हुआ, बल्कि भविष्य में और अधिक संभावनाओं के द्वार भी खोल रहा है।
CSS तकनीक से मिला बड़ा फायदा
तेल उत्पादन में इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक है। यह एक थर्मल एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी तकनीक है, जिसका उपयोग अत्यधिक गाढ़े कच्चे तेल को निकालने के लिए किया जाता है। थार रेगिस्तान में तेल की प्रकृति काफी भारी (High Viscosity) होने के कारण पारंपरिक तरीके कारगर नहीं थे, ऐसे में CSS तकनीक ने उत्पादन को नई दिशा दी।
नई तकनीकों का सफल प्रयोग
CSS के अलावा कंपनी ने ‘डाइलुएंट इंजेक्शन’ और ‘आर्टिफिशियल लिफ्ट सिस्टम’ जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया है। इतना ही नहीं, भारत में पहली बार ‘फिशबोन ड्रिलिंग’ और ‘बेयरफुट कंप्लीशन’ जैसी उन्नत ड्रिलिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। इन नवाचारों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्पादन को संभव बनाया है।
जैसलमेर से गुजरात तक तेल की सप्लाई
बाघेवाला क्षेत्र से निकाले गए कच्चे तेल को टैंकरों के जरिए मेहसाणा स्थित ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन की सुविधाओं तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद पाइपलाइन के माध्यम से वडोदरा में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की कोयाली रिफाइनरी में भेजा जाता है, जहां इसे प्रोसेस किया जाता है।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में कच्चे तेल के उत्पादन में यह बढ़ोतरी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है और देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
चुनौतीपूर्ण हालात में बड़ी सफलता
थार रेगिस्तान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में इस तरह की उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं था। अत्यधिक गर्मी, रेत और सीमित संसाधनों के बीच इस स्तर का उत्पादन भारत के तेल और गैस क्षेत्र की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है। अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि यह साबित करती है कि अपरंपरागत संसाधनों का सही उपयोग कर देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को काफी हद तक पूरा कर सकता है।
भविष्य में और बढ़ेगा उत्पादन
कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में और नए कुएं और उन्नत तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है। बाघेवाला क्षेत्र में अभी भी कई संभावनाएं मौजूद हैं, जिन पर काम किया जा रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि राजस्थान का यह रेगिस्तानी इलाका आने वाले वर्षों में देश के ऊर्जा मानचित्र पर और मजबूत पहचान बनाएगा।





