संसद से पहले तेज हुई राजनीतिक गतिविधियां
नई दिल्ली में मानसून सत्र की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां अभी से चरम पर हैं। केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व लगातार बैठकों के जरिए आगामी सत्र की रणनीति तैयार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सत्ता पक्ष की सबसे बड़ी प्राथमिकता संसद में व्यापक समर्थन सुनिश्चित करना है, ताकि आने वाले समय में महत्वपूर्ण विधेयकों पर मजबूती से आगे बढ़ा जा सके।
क्या है BJP का ‘मिशन 360’?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना ‘मिशन 360’ दरअसल संसद के दोनों सदनों में ऐसा समर्थन जुटाने की रणनीति माना जा रहा है, जो सरकार को बड़े और दूरगामी फैसले लेने की ताकत दे सके। माना जा रहा है कि महिला आरक्षण, परिसीमन और अन्य संवैधानिक महत्व के विषयों को लेकर सरकार गंभीरता से तैयारी कर रही है। संवैधानिक संशोधन के लिए साधारण बहुमत नहीं, बल्कि विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, इसलिए संख्या का गणित इस बार बेहद अहम माना जा रहा है।
सहयोगी दलों को साथ रखना सबसे बड़ी चुनौती
एनडीए सरकार के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह अपने सभी सहयोगियों को पूरी तरह साथ रख पाएगी? पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन राजनीति का महत्व बढ़ा है और ऐसे में हर सहयोगी दल की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री स्तर पर लगातार संवाद और समन्वय बैठकों का दौर जारी है। सरकार किसी भी स्थिति में संसद में अपनी रणनीति कमजोर नहीं पड़ने देना चाहती।
विपक्ष भी तैयार, सत्र में होगा सियासी मुकाबला
उधर, विपक्ष भी पूरी तैयारी में है। महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक, किसानों के मुद्दे और आर्थिक चुनौतियों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है। ऐसे में मानसून सत्र केवल विधेयकों की चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच भी बनेगा। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय कर सकते हैं कि देश की राजनीति अगले कुछ वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ेगी।