एमपी, हिमाचल-उत्तराखंड समेत इन 9 राज्यों में BJP को मिले प्रदेश अध्यक्ष… जानें कब होगा राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव?

BJP ने 9 राज्यों में बदले प्रदेश अध्यक्ष…जानें राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में क्यों हो रही देरी
भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावों की तैयारी के मद्देनजर देश के 9 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इसमें मध्य प्रदेश से हेमंत कुमार खंडेलवाल, महाराष्ट्र से रवींद्र चव्हाण, और हिमाचल प्रदेश से राजीव बिंदल प्रमुख नाम हैं। हालांकि, भाजपा ने अभी तक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा नहीं की है।

एमपी, महाराष्ट्र में करीबी नेताओं को मौका
मध्य प्रदेश में विजय खंडेलवाल, जो बैतूल से सांसद और दो बार विधायक रह चुके हैं, को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के करीबी माने जाते हैं और उनकी वैश्य समुदाय में पकड़ को भाजपा ने संगठन विस्तार में उपयोग किया है। वहीं महाराष्ट्र में रवींद्र चव्हाण, जो डोंबिवली से चार बार विधायक और फडणवीस सरकार में मंत्री रह चुके हैं, को कमान दी गई है। उनकी नियुक्ति भाजपा के सांगठनिक अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ को मजबूत करने का संकेत है।

हिमाचल-उत्तराखंड में कोई बदलाव नहीं
हिमाचल प्रदेश में राजीव बिंदल को लगातार तीसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वे जेपी नड्डा के करीबी माने जाते हैं और स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। उत्तराखंड में भी महेंद्र भट्ट को दोबारा मौका मिला है, जो ब्राह्मण चेहरा हैं और भाजपा ने ठाकुर मुख्यमंत्री व ब्राह्मण अध्यक्ष के समीकरण के तहत उन्हें बनाए रखा है।

दक्षिण भारत में भी संगठनात्मक फेरबदल
आंध्र प्रदेश में पीवीएन माधव, जो पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं और भाजयुमो से जुड़े रहे हैं, को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, तेलंगाना में एन रामचंदर राव को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के बाद पार्टी नेता राजा सिंह ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे तेलंगाना भाजपा में हलचल देखी जा रही है। भाजपा के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया में अब तक 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के लिए कम से कम 19 राज्यों में अध्यक्ष नियुक्त होना जरूरी होता है, यह शर्त अब पूरी हो चुकी है। भाजपा का यह कदम साफ करता है कि पार्टी अभी चुनावी राज्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्तियों से पार्टी सामाजिक समीकरण साधने, क्षेत्रीय नेतृत्व को मजबूत करने और राष्ट्रीय नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर निर्णय पार्टी नेतृत्व की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

 

 

 

 

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