चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी बेहद सतर्क और गंभीर है। भाजपा को लगता है कि जरा सी कोताही भारी पड़ सकती है। इसलिए बिना किसी मोहमाया के डिमोट और प्रमोट करना पड़े तो तत्काल कर देना चाहिए। शायद इसी सोच के चलते भाजपा के दिग्गज नेताओं ने बैठकें की और विचार मंथन किया। लोकसभा चुनाव के अलावा पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन ने बड़े बदलाव का निर्णय लिया है। अब कभी भी कई दिग्गज नेताओं की छु्ट्टी हो सकती है तो कईयों को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।इस फेरबदल पर सहमति बन गई है और कभी भी इसकी घोषणा हो सकती है। मोदी सरकार और भाजपा संगठन में जल्द ही कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष की बैठक के बाद कयास लगाये जा रहे हैं कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव और इस साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार और संगठन में फेरबदल जल्द ही किया जाएगा। चर्चा है कि मंत्रिमंडल में बदलाव अगले महीने के मध्य में मानसून सत्र से पहले हो सकता है।
नड्डा,शाह और बीएल संतोष की रिपोर्ट पर मंथन
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक से पहले शाह, नड्डा और बीएल संतोष पार्टी संगठन में बदलाव को लेकर इस महीने तीन दौर की बैठक कर चुके हैं। इन बैठकों में केन्द्रीय संगठन में शामिल महासचिवों सहित अन्य पदाधिकारियों की परर्फोमेंस का भी आंकलन किया गया था। इसके साथ साथ बड़े राज्यों में जहां प्रदेश अध्यक्ष या प्रभारी बेहतर नहीं कर पा रहे हैं उनको लेकर भी गहराई से चर्चा हुई थी। इन तीनों बड़े नेताओं ने संगठन से हटाये जाने वाले और जिन नये चेहरों को शामिल किया जाना है उनको लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। बताया जा रहा है पीएम मोदी के सामने पेश की गई इस रिपोर्ट पर बिन्दुवार विचार विमर्श हुआ है। अब देखना यह है कि संगठन से किन चेहरों की छुट्टी की जाएगी और किस किस को को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही इन नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को राज्य संगठनों से मिले फीडबैक के आधार पर उन केन्द्रीय मंत्रियों पर भी अपनी रिपोर्ट दी जिनकी परर्फोमेंस और मंत्रालय की योजनाएं जमीनी स्तर पर कुछ खास दिखाई नहीं पड़ रही है।
कुछ इस तरह होगी बदलाव की रूपरेखा
सरकार और पार्टी संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चुनावी रणनीति के तहत कुछ ऐसे मंत्रियों को संगठन में भेजा जाएगा जो चुनावी प्रबंधन में महारत रखते हैं साथ ही तेजतर्रार तरीके से विपक्ष को जवाब देने की कला में भी निपुण हैं। अगर ऐसे मंत्रियों को सरकार से संगठन में भेजा जाता है तो इसका यह मतलब कतई नहीं होगा कि वे सरकार में परर्फोमेंस नहीं दिखा पा रहे हैं, दरअसल चुनावी जरूरत के हिसाब से उनकी सरकार से ज्यादा संगठन में जरूरत होगी इसलिए उनको नई जिम्मेदारी दी जाएगी।
चुनावी राज्यों से बन सकते हैं मंत्री
इस साल पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मणिपुर में चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री इन राज्यों से नए चेहरों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं ताकि संबंधित प्रदेश के लोगों को केन्द्र सरकार में बड़ी हिस्सेदारी का संदेश दिया जा सके। भाजपा हाईकमान किसी भी सूरत में राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में अपनी सरकार बनाने की कोशिश में है। मध्यप्रदेश और मणिपुर में फिलहाल भाजपा सत्ता में है और पार्टी यहां फिर से बहुमत पाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस
भाजपा सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी इस साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं उनको लेकर अत्यंत सतर्क हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी हाईकमान चौकस है। राजस्थान में सतीश पूनिया की जगह सांसद सीपी जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। सीधा मतलब था कि ऐसा अध्यक्ष नहीं चाहिए जो गुटबाजी पर लगाम लगाने की बजाय खुद ही दूसरे नेताओं से अलग खड़ा दिखाई पड़े। प्रदेश में संगठन की बागडोर ऐसे नेताओं के हाथ हो जो सबको साथ लेकर जमीन पर पार्टी को मजबूत करते दिखाई पड़ें। दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में चर्चा है कि हाईकमान मध्यप्रदेश के पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा को लेकर भी खुश नहीं है। मप्र में कांग्रेस को कम नहीं आंका जा रहा है। कहा जा रहा है कि शर्मा की जगह किसी दूसरे नेता को मौका देने पर विचार हो रहा है।
ये मंत्री जा सकते हैं संगठन में
केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, भूपेन्द्र यादव और अनुराग ठाकुर का नाम विशेषतौर पर चर्चा में है। इसके साथ ही स्मृति ईरानी को भी संगठन में भेजा जा सकता है। बिहार में जेडीयू और राजद के मुकाबले के लिए गिरीराज सिंह को भी अब पार्टी में काम करने को कहा जा सकता है। राजस्थान में चुनाव के मद्देनजर गजेन्द्र सिंह शेखावत की जिम्मेदारी बढ़ेगी ऐसी चर्चा है। तेज तर्रार और जमीनी नेता संजीव बालियान को उत्तर प्रदेश के बाहर हरियाणा और राजस्थान में सक्रिय करने की बात भी सामने आ रही है।





