वोटर लिस्ट सुधार पर चुनाव आयोग का विशेष अभियान
बिहार में विधानसभा चुनावों Assembly Election Bihar से पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य के सभी वोटरों से नागरिकता और जन्म से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। आयोग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वोटर लिस्ट में मौजूद फर्जी नामों को हटाना है, जिससे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सके।
विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल, बताया ‘जनविरोधी’ कदम
RJD और CPI-ML जैसी विपक्षी पार्टियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया गलत समय पर शुरू की गई है और लाखों लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर सकती है। RJD प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि राज्य के कई परिवारों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, ऐसे में यह अभियान जनविरोधी है।
यह तो NRC जैसा है’: CPI-ML महासचिव दीपांकर का आरोप
CPI-ML (लिबरेशन) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इस प्रक्रिया की तुलना एनआरसी से की है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी जनसंख्या को लेकर एक महीने में यह काम कैसे किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र को सीमित करने वाला कदम है, जिससे गरीब, ग्रामीण और दस्तावेजविहीन वर्ग प्रभावित होंगे।
गरीब और दस्तावेजविहीन लोगों पर सीधा असर
राज्य के ग्रामीण इलाकों और दलित-महादलित समुदायों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जिनके पास नागरिकता से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं। विपक्ष का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर करने का तरीका है, जिससे बड़े पैमाने पर सामाजिक और राजनीतिक असंतुलन पैदा होगा।
चुनाव आयोग ने दी सफाई, कहा– पारदर्शिता की दिशा में कदम
विवाद बढ़ने के बीच चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए की जा रही है। आयोग के अनुसार, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें वैकल्पिक तरीके से पहचान का अवसर मिलेगा। हालांकि, विपक्ष इस सफाई से संतुष्ट नहीं है और आंदोलन की चेतावनी दे रहा है।