Bihar Polls 2025: जोकीहाट में फिर भाई-भाई आमने-सामने, सीमांचल की सबसे हॉट सीट पर चार ‘आलम’ का मुकाबला दो सगे भाई, तीन पूर्व मंत्री और 65% मुस्लिम वोटर

Bihar Polls 2025 Brothers face off again in Jokihat four Arms contesting for Seemanchal hottest seats

Bihar Polls 2025 Brothers face off again in Jokihat four Arms contesting for Seemanchal hottest seats

Bihar Polls 2025: जोकीहाट में फिर भाई-भाई आमने-सामने, सीमांचल की सबसे हॉट सीट पर चार ‘आलम’ का मुकाबला

दो सगे भाई, तीन पूर्व मंत्री और 65% मुस्लिम वोटर — जोकीहाट में सियासी दंगल चरम पर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीमांचल क्षेत्र की जोकीहाट सीट इस बार भी पूरे प्रदेश में सुर्खियों में है। अररिया जिले की यह मुस्लिम बहुल सीट न सिर्फ परिवारिक राजनीति की मिसाल पेश करती है, बल्कि यहां एक ही परिवार के दो सगे भाई एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। दिलचस्प यह है कि यहां मुकाबला चार “आलम” प्रत्याशियों के बीच है, जिनमें तीन मंत्री रह चुके हैं।

भाई-भाई में मुकाबला… तस्लीमुद्दीन परिवार का वर्चस्व कायम

जोकीहाट सीट पर दिवंगत कद्दावर नेता मोहम्मद तस्लीमुद्दीन का परिवार दशकों से हावी रहा है। तस्लीमुद्दीन मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे और पांच बार जोकीहाट से विधायक बने। अब उनके दोनों बेटे—बड़े भाई सरफराज आलम और छोटे भाई शाहनवाज आलम—एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार सरफराज आलम जन सुराज पार्टी (प्रशांत किशोर की पार्टी) से मैदान में हैं, जबकि छोटे भाई शाहनवाज आलम राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों भाइयों की सियासी राहें अलग-अलग हो चुकी हैं, लेकिन जोकीहाट की राजनीति अब भी उनके इर्द-गिर्द घूम रही है।

तीन पूर्व मंत्री, चार ‘आलम’ प्रत्याशी

इस सीट का मुकाबला और दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि मैदान में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने पुराने नेता और पूर्व मंत्री मंजर आलम को उतारा है। वहीं चौथे उम्मीदवार हैं AIMIM के वरिष्ठ नेता मुर्शीद आलम, जो सीमांचल में पार्टी के पांच बार प्रमुख रह चुके हैं।

इस तरह मुकाबला चार ‘आलमों’ के बीच हो गया है—
सरफराज आलम (जन सुराज)
शाहनवाज आलम (RJD)
मंजर आलम (JDU)
मुर्शीद आलम (AIMIM)

चारों प्रत्याशी मुस्लिम हैं और तीन पूर्व मंत्री रह चुके हैं। यही कारण है कि जोकीहाट का यह चुनाव इस बार का सबसे हॉट कांटेस्ट बन गया है।

AIMIM ने बदला समीकरण
साल 2020 में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने सीमांचल की पांच सीटों पर जीत हासिल कर सियासी भूचाल मचा दिया था, जिनमें जोकीहाट भी शामिल थी। उस समय AIMIM के टिकट पर शाहनवाज आलम ने अपने ही बड़े भाई सरफराज आलम (RJD) को हराया था। शाहनवाज को 59,596 वोट मिले थे, जबकि सरफराज को 52,213 वोट मिले। तीसरे स्थान पर बीजेपी के रंजीत यादव रहे थे। बाद में शाहनवाज आरजेडी में शामिल हो गए और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार में आपदा प्रबंधन मंत्री बने। अब फिर से वही भाई-भाई का आमना-सामना इस सीट को चर्चा में ला दिया है।

सरफराज आलम का लंबा राजनीतिक सफर

तस्लीमुद्दीन के बड़े बेटे सरफराज आलम का राजनीतिक सफर तीन दशकों से ज्यादा पुराना है।
1996 में पहली बार विधायक बने
2000, 2010 और 2015 में भी जोकीहाट से जीते
2018 में अररिया लोकसभा सीट से सांसद बने
सरफराज ने अपने करियर में कई बार पार्टी बदली। वे जनता दल, आरजेडी और जेडीयू से होते हुए अब जन सुराज में आ चुके हैं। वे बिहार सरकार में भवन निर्माण विभाग समेत कई मंत्रालयों के मंत्री रह चुके हैं।

शाहनवाज का उभरता सितारा

तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे शाहनवाज आलम ने पहली बार 2020 के विधानसभा चुनाव में कदम रखा और पहली ही कोशिश में जीत दर्ज की। एआईएमआईएम से शुरुआत कर उन्होंने अपने भाई सरफराज को हराया और राजनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा बटोरी। बाद में आरजेडी में शामिल होकर नीतीश सरकार में मंत्री बने। अब वही अपने बड़े भाई से दोबारा मुकाबला कर रहे हैं।

जेडीयू ने 20 साल बाद मंजर आलम पर भरोसा जताया

जेडीयू के उम्मीदवार मंजर आलम लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं। 2000 में वे आरजेडी के सरफराज आलम से चुनाव हार गए थे, लेकिन 2005 में जीत दर्ज की और नीतीश कुमार सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने। पिछले तीन चुनावों से उन्हें टिकट नहीं मिला था, लेकिन अब 20 साल बाद जेडीयू ने उन पर फिर भरोसा जताया है। उनका अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ मुकाबले को चतुष्कोणीय बना रही है।

65% मुस्लिम वोटर और परिवार का दबदबा

जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में लगभग 65 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। यही कारण है कि इस सीट से अब तक कोई हिंदू प्रत्याशी जीत नहीं पाया है। तस्लीमुद्दीन परिवार का यहां 50 साल से अधिक का राजनीतिक दबदबा रहा है। अब तक हुए 16 विधानसभा चुनावों में इस परिवार ने 11 बार जीत हासिल की है।

2025 में फिर सियासी जंग का केंद्र जोकीहाट

चार ‘आलमों’ के बीच इस बार मुकाबला बेहद रोमांचक बन गया है। एक ओर परिवारिक टकराव, दूसरी ओर सीमांचल में एआईएमआईएम की चुनौती और जन सुराज की एंट्री—सबने जोकीहाट को बिहार चुनाव 2025 का सबसे चर्चित रणक्षेत्र बना दिया है।
यह सीट न सिर्फ सीमांचल के मुस्लिम राजनीति का केंद्र बन चुकी है, बल्कि बिहार की सियासत में पारिवारिक संघर्ष, पार्टी बदलने की राजनीति और जातीय समीकरणों की पूरी तस्वीर पेश करती है। अब देखना होगा कि तस्लीमुद्दीन परिवार की परंपरा बरकरार रहती है या जोकीहाट 2025 में नया इतिहास लिखता है। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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