बिहार की राजनीति और विधानसभा चुनाव 2025…फुहारों के बीच गरमाती सियासत…जानें सियासी दलों की चुनावी तैयारी में कौन किस पर भारी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियाँ जोरों पर हैं। राज्य की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को पूरा हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव अक्टूबर-नवंबर के बीच दो से तीन चरणों में होने की संभावना है। जिसे दिवाली और छठ जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया जाएगा।

प्रमुख राजनीतिक गठबंधन और रणनीतियां

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)
नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू और भाजपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चा जारी हैं। आने वाले दिनों में दोनों दलों के साथ ही एनडीए के नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा होगी।
बिहार में इस बार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान भी पहली बार विधानसभा के चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं। जिससे एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर पेचीदगियाँ बढ़ सकती हैं।

इधर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतनराम मांझी भी कम से कम 25 सीटों की मांग कर रहे है। जिससे गठबंधन में सीटों के वितरण को लेकर चुनौतियां खड़ी हो सकती है।

महागठबंधन में जेडीयू ही मुखिया

महागठबंधन की बात करें तो आरजेडी, कांग्रेस, और वाम दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस महागठबंधन में शामिल होने के लिए प्रयासरत नजर आ रहे हैं। जिससे सीमांचल क्षेत्र में वोटों के विभाजन रोका जा सके। हालांकि सीटों की संख्या को लेकर सहमति अब तक नहीं बन पाई है।

इस बार चुनावी मैदान में नए राजनीतिक दल
बिहार के विधानसभा चुनाव में इस बार नई पार्टियों की भी एंट्री हो चुकी है।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, आरसीपी सिंह की नई पार्टी, और इंडियन इंकलाब पार्टी जैसे नए दल पारंपरिक दलों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। जिससे चुनाव का समीकरणों में बदलने की संभावना है।

सामाजिक समीकरण और जातीय राजनीति

बिहार के सामाजिक समीकरण और जातीय राजनीति की बात करें तो सुरी समुदाय, जो वैश्य समूह का हिस्सा है EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) में शामिल किये जाने की मांग कर रहा है। इस समुदाय की नाराजगी एनडीए के लिए चुनाव में चुनौती बन सकती है। विशेषकर मिथिलांचल क्षेत्र में, जहां करीब 50 से अधिक विधानसभा सीटें हैं।

चुनाव आयोग भी कर रहा तैयारी

इधर चुनाव आयोग ने भी तैयारी को अंतिम रुप देना शुरु कर दिया है। आयोग की ओर से राज्य में 2.6 लाख डुप्लिकेट EPIC नंबरों को हटाकर मतदाता सूची को दुरुस्त किया है। मतदान के दिन हर दो घंटे में वोटिंग प्रतिशत की रिपोर्टिंग के लिए भी इस बार ECINET ऐप का उपयोग किया जाएगा। जिससे पारदर्शिता और समय पर जानकारी सुनिश्चित होगी। बिहार में इस बार विधानसभा चुनाव 2025 में सीट बंटवारे, जातीय समीकरण, और नए राजनीतिक दलों की भूमिका खासी महत्वपूर्ण होगी। एनडीए और महागठबंधन दोनों गठबंधन को आंतरिक समन्वय और रणनीतिक गठजोड़ पर ध्यान देना होगा। वहीं चुनाव आयोग भी पारदर्शी तैयारियाँ और सामाजिक मुद्दों पर दलों की प्रतिक्रियाएँ भी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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