पाटिलपुत्र मतलब आज का पटना। आज आपको बताऐंगे पटना के सम्राट अशोक की कहानी। दिखाऐंगे अशोक की यातनाओं का गवाह कैसे अशोक अपने दुश्मनों को सजा देता था। ये कहानी उस वक्त की है जब सम्राट अशोक को सम्राट बनना था औऱ जो उनके रास्ते में आता था वो उसी का खत्म कर देते थे। ये कहानी तब की है जब सम्राट अशोक का ह्दय परिवर्तन नहीं हुआ था।
पटना से थोड़ी दूरी पर है कुंआ
आगम कुंआ पटना के बाहरी इलाके में हैं। ये गुलराज बाग रेल्वे स्टेशन के पास है। 1890 में इसकी खोज ब्रिटश खोजकर्ता लॉरेंस वेडेल ने की थी। लॉरेंस ने इसे सम्राट अशोक के बनाए पौराणिक महत्तव के खंडहरों के तौर पर की थी। ये कुआं 304 232 ईस्वी पूर्व बनवाया था।1 इस कुएं का नाम वैसे तो कलयुग में अगम कुआं है। इस कुएं की मान्यता भी है और लोगों की आस्था भी। लेकिन ढाई हजार साल पुराने इतिहास की कहानी कहता ये कुंआ सम्राट अशोक की यातानाओं को एक गवाह भी है।
2500 पुराना रहस्य छुपा है कुंए में
कुंआ कहता है सम्राट अशोक की यातना की कहानी
कुंए में छिपा है करोडों के बेशकीमती खजाना
सम्राट अशोक की क्रूरता के किस्से कहता है ये कुंआ
अगम कुंए का सम्राट अशोक के उस दौर का गवाह है जब सम्राट अशोक को सम्राट बनना था और उनके और सम्राट की गद्दी के बीच जो आया उसको अशोक ने मारकर इस कुंए में फेंका। कहा जाता है कि सम्राट अशोक ने अपने 99 भाइयों को मारकर उनकी लाश इसी कुएं में फेंकी। कहा जाता है ये कुआं सम्राट अशोक के दुश्मनों की यातनाओं गवाह है। अशोक अपने दुश्मनों पर कैसा अत्याचार करते थे कुऐं की दीवारें इस बात की गवाह हैं।
कुएं में छिपा है खजाना
कुंए में करोडों का खजाना दफन है। कहा जाता है कि कुंए से कई सारी सुंगर निकली है और इसी में बन तहखाने में सम्राट अशोक के दौर का खजाना दफन है। खजाने की तलाश कई बार कराई गई। अंग्रेजों ने कुंए से खजाना ढूंढने के लिए इसका पानी खाली करवाया लेकिन जितना पानी निकालते गए जल स्तर उतना ही बना रहा। हारकर अंग्रेजों न पानी निकालना छोड़ दिया।
अंग्रेजों के बाद राज्य सरकार ने भी कुएं से खजाना निकालने की कोशिश की।
1962 में बिहार के मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने खजाने की तलाश में कुएं का पानी खाली कराया वहीं 1995 में तत्तकालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने भी कुएं में खजाने की तलाश करानी चाही लेकिन अंग्रेजों की ही तरह दोनों मुख्यमंत्री को हार मानना पड़ा।
कुएं का पानी है रहस्यमयी
अगर कुएं के पानी के बारे में कहा जाता है कि इसका रंग बदलता रहता है। इस कुएं का जलस्तर कभी नहीं बदलता। कुएं को जल स्तर में भीषण गर्मी के दिनों में भी एक से डेढ इंच कम होता है वहीं बारिश के दिनों में भी एक से डेढ़ इंच तक जल स्तर बढता है।
कुंआ है आस्था का केंद्र
कुंआ लोगों की आस्था का केंद्र भी है। यहां बने शीतला माता मंदिर में महिलाऐं पूजा करती हैं। श्रृद्दालु कुएं में सिक्के डालकर अपनी मुराद मांगते है। कहा जाता है कि कुंए के पानी से नहाकर चर्म रोग दूर होते हैं तो वहीं मनकामनाऐं भी पूर्ण होती हैं।




