मरीजों को दवा देने में बिहार नंबर वन: स्वास्थ्य मंत्रालय की रैंकिंग में लगातार 11वां महीना अव्वल बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी उपलब्धि

Bihar is number one in providing medicines to patients

मरीजों को दवा देने में बिहार नंबर वन: स्वास्थ्य मंत्रालय की रैंकिंग में लगातार 11वां महीना अव्वल

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी उपलब्धि

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अगस्त 2025 की AVDMS (एवेलिबिलिटी ऑफ ड्रग्स मॉनिटरिंग सिस्टम) केंद्रीय डैशबोर्ड रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।

82.13 अंक के एवरेज स्कोर के साथ बिहार अगस्त महीने में अव्वल रहा। खास बात यह है कि राज्य लगातार 11वें महीने इस सूची में पहले पायदान पर बना हुआ है।

रैंकिंग का हिसाब-किताब
पहला स्थान – बिहार (82.13 अंक)
दूसरा स्थान – राजस्थान (78.61 अंक)
तीसरा स्थान – पंजाब (73.28 अंक)

पिछले साल अक्टूबर में बिहार ने राजस्थान को पछाड़कर यह स्थान हासिल किया था। उस समय बिहार को 79.34 अंक मिले थे। तब से लेकर अब तक बिहार का दबदबा कायम है।

611 दवाएं मुफ्त उपलब्ध

बिहार सरकार की ओर से सभी स्तर के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में 611 प्रकार की दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (OPD): 356 दवाएं शामिल हैंं तो मेडिकल कॉलेज (IPD): 255 दवाएं भी शामिल है। जिला अस्पताल (OPD): 287 दवाएं,
जिला अस्पताल (IPD): 169 दवाएं,अनुमंडलीय अस्पताल (OPD): 212 दवाएं,,अनुमंडलीय अस्पताल (IPD): 101 दवाएं,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (OPD): 212 दवाएं,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (IPD): 97 दवाएं,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (OPD): 201 दवाएं,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (IPD): 93 दवाएं, शहरी पीएचसी (OPD): 180 दवाएं,अतिरिक्त पीएचसी (OPD): 140 दवाएं, (IPD): 53 दवाएं,हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर: 151 दवाएं,स्वास्थ्य उपकेंद्र: 97 दवाएं शामिल हैं। इस विस्तृत दवा आपूर्ति व्यवस्था ने मरीजों के बोझ को काफी हद तक कम किया है।

स्वास्थ्य विभाग का दावा
राज्य स्वास्थ्य समिति और विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता “बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, सभी को दवा उपलब्ध” पर केंद्रित है। अब गंभीर बीमारियों से लेकर सामान्य रोगों तक की दवाएं मुफ्त दी जा रही हैं। मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में दवाएं समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

क्यों खास है बिहार की यह उपलब्धि?
मुफ्त दवा योजना का सफल क्रियान्वयन गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत।
अन्य राज्यों के लिए मिसाल। राजस्थान, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों से आगे बिहार।

स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती
दवा वितरण की निगरानी अब डिजिटल सिस्टम (AVDMS) से।
जनता का भरोसा बढ़ा
मरीज अब सरकारी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।

बिहार ने एक बार फिर साबित किया है कि सही रणनीति और कड़े अनुशासन से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकता है। मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने में लगातार 11 महीने से देश में नंबर वन रहना राज्य की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। अब चुनौती यह है कि इस रफ्तार और उपलब्धि को बनाए रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाए, ताकि आने वाले दिनों में बिहार का मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सके। प्रकाश कुमार पांडेय

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