बिहार की ‘गोल्डन गर्ल’ श्रेयसी सिंह: खेल की चैंपियन से सत्ता के सबसे युवा चेहरे तक का सफर..नीतीश कैबिनेट का सबसे युवा चेहरा
बिहार की राजनीति में आज एक नया, ऊर्जावान और दमदार चेहरा तेजी से उभरकर सामने आया है—श्रेयसी सिंह। ‘गोल्डन गर्ल’ के नाम से मशहूर अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी और जमुई की दो बार की विधायक, श्रेयसी अब नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में सबसे युवा मंत्री के रूप में शपथ ले चुकी हैं। खेल के मैदान की चमक और राजनीतिक मंच की परिपक्वता—दोनों को एक साथ साधने वाली यह युवा नेता बिहार के भविष्य का नया प्रतीक बनकर उभर रही हैं।
राजनीतिक विरासत से लेकर व्यक्तिगत संघर्ष तक
श्रेयसी सिंह ऐसे परिवार से आती हैं जिसने लंबे समय तक राजनीति में अपनी पहचान बनाए रखी है। उनके पिता दिग्विजय सिंह केंद्र सरकार में रेल और वाणिज्य मंत्री रह चुके थे। मां पुतुल कुमारी भी बांका से सांसद रहीं। दादा कुमार सुरेंद्र सिंह नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहे। एक ओर राजनीति की समझ और अनुभव की विरासत, तो दूसरी ओर खेल जगत में ऊँचाइयाँ हासिल करने का संकल्प—इन्हीं दो धाराओं से श्रेयसी का व्यक्तित्व निर्मित हुआ है। गिद्धौर, जमुई से आने वाली श्रेयसी ने छोटी उम्र से ही अनुशासन, मेहनत और फोकस की वो परंपरा देखी जिसने उन्हें खेल में असाधारण उपलब्धियों तक पहुंचाया। लेकिन जो बात उन्हें खास बनाती है, वह है राजनीति में आने से पहले का उनका खेल-करियर—चमकदार, संघर्षों से भरा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाला।
खेल करियर: गोल्डन गर्ल की धमक
डबल ट्रैप शूटिंग की विशेषज्ञ श्रेयसी ने भारत के लिए कई बड़े पदक जीते।
2018 कॉमनवेल्थ गेम्स (गोल्ड कोस्ट) – स्वर्ण पदक
2014 कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो) – रजत पदक
2014 एशियन गेम्स – टीम ब्रॉन्ज
61वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप – गोल्ड
अर्जुन अवॉर्ड – भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान
2024 पेरिस ओलंपिक्स – बिहार की पहली महिला शूटर
निशानेबाजी में उनकी सफलता केवल उनकी प्रतिभा का परिणाम नहीं थी। यह उस निरंतर मेहनत, लगातार अभ्यास, और संकल्प का नतीजा था जिसने उन्हें विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव दिलाया। ट्रिगर दबाने से पहले की वह अटूट एकाग्रता और लक्ष्य पर पकड़—यही गुण बाद में राजनीति में भी उनके सबसे बड़े हथियार साबित हुए।
राजनीति में कदम और धमाकेदार शुरुआत
2020 में श्रेयसी सिंह ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। जिस वक्त वे राजनीति में आईं, तब बहुतों ने यह मान लिया था कि वह सिर्फ ‘राजनीतिक विरासत’ का असर हैं। लेकिन श्रेयसी ने अपने काम और जीत से उन सभी शंकाओं को गलत साबित कर दिया।
2020 में पहला चुनाव
उन्होंने पहली बार जमुई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और RJD के वरिष्ठ नेता विजय प्रकाश को 41,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराकर धमाकेदार एंट्री की।
2025 में और बड़ी जीत
2025 में भी BJP ने उन पर भरोसा बनाए रखा—और श्रेयसी ने उस भरोसे को दोगुना करते हुए 54,498 वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उन्होंने RJD के मोहम्मद शमशाद आलम को बड़ी मात दी। यह जीत सिर्फ चुनाव नहीं थी—यह बिहार की जनता के विश्वास और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की इच्छा की पुष्टि थी। भाजपा और NDA रणनीति में भी श्रेयसी की भूमिका अहम मानी जाती रही। नीतीश कुमार और भाजपा नेतृत्व में उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ी, जो आखिरकार मंत्रिमंडल में उनके चयन का आधार बनी।
सबसे युवा मंत्री: साफ छवि और नई ऊर्जा का प्रतीक
नीतीश कुमार की 10वीं बार बनी नई सरकार में श्रेयसी सिंह सबसे युवा मंत्री हैं। यह सिर्फ उम्र का आंकड़ा नहीं, बल्कि नए राजनीतिक नेतृत्व की दिशा का संकेत भी है। श्रेयसी अपनी साफ छवि, पारदर्शी राजनीति और जमीनी कनेक्ट के लिए जानी जाती हैं। वे खुद कह चुकी हैं कि “राजनीति मेरे लिए धन कमाने का साधन नहीं, सेवा का माध्यम है।” एमबीए की पढ़ाई कर चुकीं श्रेयसी अपने पिता दिग्विजय सिंह की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं, लेकिन अपने कार्यशैली, सरल व्यवहार और स्पष्ट बात कहने के तरीके ने उन्हें एक स्वतंत्र और मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है।
निशानेबाजी से राजनीति तक—यह सफर खास क्यों है?
श्रेयसी का यह सफर इसलिए भी अनोखा है क्योंकि जहां अधिकांश नेता पहले राजनीति में आते हैं और फिर मंच खोजते हैं। श्रेयसी ने पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का झंडा लहराया। फिर जनता की सेवा करने का निर्णय लिया। उनकी उपलब्धियां युवाओं, महिलाओं और खेल जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने अपने आक्रामक कम और शांत, रणनीतिक स्वभाव को बनाए रखा—ठीक वैसे ही जैसे शूटिंग रेंज में करती थीं।
नई भूमिका, नई उम्मीदें
अब जब श्रेयसी सिंह मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं, तो उनसे अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं। चाहे महिलाओं से जुड़े मुद्दे हों, युवाओं के अवसर, खेल विकास, या जमुई जैसे पिछड़े क्षेत्रों का विकास—श्रेयसी से उम्मीद की जाती है कि वे निर्णायक भूमिका निभाएंगी। नीतीश मंत्रिमंडल में उनकी नियुक्ति केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि युवाओं की ऊर्जा, खेल भावना और नई तरह की राजनीति को जगह देने का संकेत है। बिहार की ‘गोल्डन गर्ल’ अब सत्ता के गलियारों की चमक भी बढ़ा रही हैं। मैदान से लेकर मंच तक, ट्रिगर से लेकर माइक्रोफोन तक—श्रेयसी सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य साफ हो और फोकस मजबूत, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। नीतीश सरकार में सबसे युवा मंत्री बनकर वे केवल अपने परिवार की विरासत को आगे नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि बिहार की महिलाओं और युवाओं के लिए एक नई मिसाल भी कायम कर रही हैं। श्रेयसी आज सिर्फ दिग्विजय सिंह की बेटी नहीं, बल्कि बिहार की नई उम्मीद हैं—लक्ष्य भेदने वाली नेता।





