Bihar Exit Poll 2025: अनंत-ओसामा की जीत के संकेत, अनीता, मनोरमा, रीतलाल-शिवानी की सीट पर संकट! किस बाहुबली के घर बजेगा ढोल, कहां पसरेगा सन्नाटा
एग्जिट पोल में बिहार की राजनीति के बाहुबली चेहरों पर नजर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल नतीजे अब चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गए हैं। जहां इन नतीजों ने एनडीए को स्पष्ट बहुमत दिखाकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, वहीं राज्य की राजनीति के कई चर्चित ‘बाहुबली नेताओं’ का भविष्य भी इन परिणामों से लगभग तय होता दिख रहा है।
इस बार बिहार के चुनावी मैदान में अधिकांश बाहुबली या उनके परिवारजन महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट) के टिकट पर लड़े, जबकि एनडीए (भाजपा-जदयू-हम-सपा) ने कानून-व्यवस्था और सुशासन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। एग्जिट पोल के रुझानों से यही संकेत मिला कि जनता ने “जंगलराज नहीं, सुशासन” को वोट दिया है। ऐसे में 14 नवंबर को मतगणना के दिन कई बाहुबली नेताओं के घर खामोशी और निराशा देखने को मिल सकती है, जबकि कुछ बाहुबलियों के घर जश्न और जयकारे गूंज सकते हैं।
अनंत सिंह के घर जश्न की तैयारी, सूरजभान खेमे में मायूसी
बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित बाहुबली चेहरों में से एक मोकामा के अनंत सिंह एक बार फिर एग्जिट पोल के नतीजों में विजयी दिख रहे हैं। जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरे अनंत सिंह का प्रभाव उनके क्षेत्र में बेहद गहरा माना जाता है। जातीय समीकरणों और व्यक्तिगत पकड़ के कारण वे लगातार अपने विरोधियों को मात देते आए हैं। एग्जिट पोल के मुताबिक, मोकामा सीट पर अनंत सिंह को बढ़त मिल रही है। यह नतीजा उस दावे को भी पुष्ट करता है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय प्रभावशाली चेहरे अब भी निर्णायक हैं। दूसरी ओर, सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी, जो इसी क्षेत्र की एक और प्रभावशाली उम्मीदवार थीं, उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है। एग्जिट पोल में वीणा देवी की हार और अनंत सिंह की जीत के संकेत मिले हैं।
नवादा की जंग: अनीता देवी को झटका, अरुणा देवी आगे
नवादा की वारिसलीगंज सीट पर भी दो बाहुबली घरानों की प्रतिष्ठा दांव पर थी। यहां अनीता देवी, जो कभी चर्चित बाहुबली अशोक महतो की पत्नी हैं, आरजेडी के टिकट पर मैदान में थीं। उनके सामने बीजेपी की अरुणा देवी, यानी बाहुबली अखिलेश सिंह की पत्नी, खड़ी थीं। एग्जिट पोल ने इस मुकाबले में अरुणा देवी की जीत और अनीता देवी की हार का अनुमान जताया है। यह मुकाबला बिहार की राजनीति में “बाहुबली बनाम बाहुबली” की परंपरा को एक बार फिर सामने लाया, लेकिन लगता है जनता ने कानून और शासन के पक्ष में वोट किया है।
गया की मनोरमा देवी भी फंसीं
गया जिले की बाहुबली नेता मनोरमा देवी (स्वर्गीय बिंदी यादव की पत्नी) जेडीयू की ओर से चुनाव मैदान में थीं। एग्जिट पोल के रुझानों के मुताबिक, वे इस बार कड़ी टक्कर में पिछड़ती हुई नजर आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीट पर सत्ता विरोधी लहर और जातीय समीकरणों ने मनोरमा देवी को नुकसान पहुंचाया है। गया क्षेत्र में महागठबंधन की उम्मीदों पर यह हार भारी पड़ सकती है।
दानापुर में रीतलाल यादव की जमीन खिसकी
दानापुर सीट, जो लंबे समय से आरजेडी बाहुबली रीतलाल यादव का गढ़ मानी जाती है, वहां भी एग्जिट पोल ने बड़ा संकेत दिया है। यहां भाजपा उम्मीदवार रामकृपाल यादव को बढ़त बताई गई है। रीतलाल यादव पर कई गंभीर आपराधिक मामले रहे हैं और वे लालू यादव परिवार के करीबी माने जाते हैं। लेकिन इस बार जनता ने उन्हें कड़ी चुनौती दी है। एग्जिट पोल में अधिकांश एजेंसियों ने रीतलाल की हार और एनडीए प्रत्याशी की जीत की भविष्यवाणी की है।
लालगंज में शिवानी शुक्ला का अधर में भविष्य
लालगंज सीट पर एक और चर्चित बाहुबली परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां पूर्व सांसद मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला आरजेडी टिकट पर मैदान में हैं। हालांकि, एग्जिट पोल में उनके लिए स्थिति मिश्रित है — कुछ सर्वे में एनडीए प्रत्याशी को बढ़त बताई गई है, तो कुछ में शिवानी शुक्ला को मामूली बढ़त दिखाई गई है। लालगंज सीट पर मुकाबला बेहद कांटे का है, लेकिन एनडीए के पक्ष में हवा बहती दिख रही है।
शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को बढ़त
रघुनाथपुर सीट से आरजेडी प्रत्याशी ओसामा शहाबुद्दीन, यानी दिवंगत बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे, को एग्जिट पोल में जीत की संभावना दिखाई गई है। यह नतीजा आरजेडी खेमे के लिए एक बड़ी राहत की खबर हो सकती है, क्योंकि सिवान और आसपास के इलाकों में शहाबुद्दीन परिवार का अब भी मजबूत जनाधार माना जाता है। हालांकि, कुछ एग्जिट पोल एजेंसियों ने इस सीट पर भी करीबी मुकाबले की भविष्यवाणी की है।
बाहुबली बनाम कानून — जनता का फैसला साफ
एग्जिट पोल के समग्र नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार की जनता इस बार “बाहुबल नहीं, विकास” के एजेंडे पर वोट कर रही है। एनडीए को 160 से ज्यादा सीटों का अनुमान जताकर एग्जिट पोल ने यह संदेश दे दिया है कि मतदाता अब ‘डर की राजनीति’ से आगे बढ़ना चाहते हैं। महागठबंधन के जिन उम्मीदवारों ने जातीय समीकरण और बाहुबली छवि पर दांव लगाया था, उन्हें झटका लग सकता है। वहीं एनडीए के वे प्रत्याशी जो सुशासन और सुरक्षा के मुद्दे पर उतरे, उन्हें फायदा मिला है।
14 नवंबर को किसके घर बजेगा ढोल?
अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि बिहार के बाहुबलियों की राजनीति का भविष्य क्या होगा। एग्जिट पोल संकेत दे रहे हैं कि अनंत सिंह और ओसामा शहाबुद्दीन के घर जश्न मन सकता है। जबकि अनीता देवी, मनोरमा देवी, रीतलाल यादव और शिवानी शुक्ला के घर सन्नाटा पसरेगा। अगर ये नतीजे सही साबित होते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा संदेश होगा —“अब बंदूक की नहीं, जनता की ताकत चलेगी। बिहार एग्जिट पोल ने साफ कर दिया है कि जनता अब पुराने बाहुबली समीकरणों को तोड़ रही है। 2025 का यह चुनाव न सिर्फ दलों की ताकत की परीक्षा है, बल्कि राज्य के राजनीतिक संस्कारों का पुनर्निर्माण भी है। (प्रकाश कुमार पांडेय)