एशिया के सबसे प्रसिद्ध मेलों में शामिल सोनपुर मेला अब और आधुनिक और सुविधाजनक होने जा रहा है। बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने इस ऐतिहासिक मेले के आधुनिकीकरण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए खजाने से करीब 24.28 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह पहल न केवल राज्य में आने वाले पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाएगी, बल्कि राज्य में पर्यटन विकास के साथ रोजगार और राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
- सोनपुर मेला के आधुनिकीकरण जोर
- राज्य सरकार का बड़ा कदम
- सरकार ने मंजूर किये 24.28 करोड़ रुपये
- नवंबर दिसंबर में आयोजित किया जाता है मेला
- बिहार में इस बार नवंबर दिसंबर में हो सकते हैं चुनाव
बिहार में सोनपुर मेला हर साल नवंबर और दिसंबर महीने में कार्तिक पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है। यह मेला सोनपुर में गंगा और गंडक नदी के संगम पर लगता है। यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कहना है सोनपुर मेला स्थल सारण पर पर्यटन-संबंधी आधारभूत संरचना को विकसित करने के लिए ही इस योजना को प्रशासनिक रूप से स्वीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह योजना राज्य में स्वदेश दर्शन स्कीम 2.0 की उप-योजना के तहत लागू की जा रही है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत सोनपुर मेले में आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों को बेहतर अनुभव कराने के लिए कई मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
- सुव्यवस्थित प्रवेश द्वार का निर्माण
- स्थायी हाट (बाजार) का विकास
- सड़क चौड़ीकरण और घाट तक पहुँचने के लिए बेहतर संपर्क मार्ग
- पार्किंग स्थल की सुविधा
- मेले में आवागमन के लिए शटल सेवा की व्यवस्था
इन सुविधाओं से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यटकों को मेले के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें एक सुगठित और व्यवस्थित अनुभव प्राप्त हो।
रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा
राज्य की नीतीश कुमार सरकार का मानना है कि इस योजना से स्थानीय युवाओं को जहां रोजगार के नए अवसर मिलेंगे वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार सोनपुर मेले को न केवल राष्ट्रीय स्थर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी एक डिजिटल और पर्यावरण-संवेदनशील स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है।
सोनपुर मेला का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
बिहार में लगने वाला सोनपुर मेला, जिसे हरिहर क्षेत्र मेला भी कहा जाता है। हिंदू माह कार्तिक में आयोजित होता है और इसकी पहचान पारंपरिक पशु मेले के रूप में रही है। यह मेला न केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए खरीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पहुंचते हैं। अब इसके आधुनिकीकरण से इसकी आकर्षण शक्ति और भी बढ़ेगी। जिससे यह वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान बना सकेगा। सोनपुर मेला के लिए बिहार की नीतीश कुमार सरकार की ओर से लिया गया यह कदम राज्य के पर्यटन विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।