बिहार चुनाव…दूसरे चरण की वोटिंग से पहले लालू परिवार को बड़ी राहत…टला लैंड फॉर जॉब घोटाले में फैसला
बिहार के विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी। 14 नवंबर को परिणाम सामने आएंगे। दूसरे चरण के रण से पहले बिहार की राजनीति में कभीछाए रहने वाले लालू परिवार को लैंड फॉर जॉब घोटाले में एक बड़ी राहत कोर्ट से मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की ओर से इस मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय करने का फैसला 4 दिसंबर 2025 तक के लिए टाल दिया गया है। बता दें सीबीआई ने बिहार के पूर्व सीएम और देश के पूर्व रेल मंत्री लालू यादव और उनके परिवार पर रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने का बड़ा आरोप लगाया था।
- बिहार चुनाव से पहले लालू परिवार को बड़ी राहत
- ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में टला फैसला
- 4 दिसंबर को कोर्ट सुनाएगी अब फैसला
अब बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने चर्चित “लैंड फॉर जॉब” घोटाले में लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय करने के फैसले को 4 दिसंबर तक के लिए टाल दिया है। इस फैसले को बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में चुनावी माहौल अपने चरम पर है।
अदालत में आज होना था फैसला
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज (10 नवंबर) लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम (आरोप तय) किए जाने थे। लेकिन अदालत ने सुनवाई के दौरान फैसला टालते हुए अगली तारीख 4 दिसंबर 2025 तय की। इससे पहले सीबीआई (CBI) ने लालू परिवार के खिलाफ रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन और संपत्ति लेने का आरोप लगाया था। जांच एजेंसी ने इसे “लैंड फॉर जॉब स्कैम” नाम दिया था।
CBI के आरोप – नौकरी के बदले जमीन
सीबीआई की जांच के अनुसार, साल 2004 से 2009 के बीच जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, उस दौरान कई उम्मीदवारों को ग्रुप डी पदों पर नियुक्ति देने के बदले जमीनें लालू परिवार और उनके करीबियों के नाम पर ट्रांसफर करवाई गईं। CBI का दावा है कि उम्मीदवारों से ली गई जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना कम कीमतों पर खरीदी गईं। इनमें से कई संपत्तियां पटना और आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। इसी मामले में मई 2022 में सीबीआई ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती, हेमा यादव और 10 अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
सीबीआई ने इन धाराओं में दर्ज किया है मामला
CBI ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-B (साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज़ का इस्तेमाल) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 11, 12, 13, 8 और 9 के तहत मामला दर्ज किया है। अगर अदालत इन धाराओं के तहत आरोप तय कर देती है, तो लालू परिवार को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका लग सकता है।
IRCTC केस के बाद अब लैंड फॉर जॉब मामला
इससे पहले भी लालू यादव और उनके परिवार पर IRCTC घोटाले में आरोप तय किए जा चुके हैं। उस दौरान भी लालू परिवार ने अदालत में आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि यह राजनीतिक साजिश के तहत दर्ज मामले हैं। वहीं, लैंड फॉर जॉब केस में सीबीआई का दावा है कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय की नियुक्तियों का दुरुपयोग कर अपने और परिवार के हित में संपत्तियां हासिल कीं।
चुनावी मौसम में आई राहत
फैसले के टलने को लालू परिवार के लिए राजनीतिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान कुछ ही दिनों में होना है। ऐसे में अदालत का फैसला टलना राजद (RJD) के लिए एक मनोवैज्ञानिक बढ़त माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आरोप तय हो जाते, तो चुनावी माहौल में विपक्षी दलों को इसे मुद्दा बनाने का मौका मिलता। लेकिन अब इस मामले पर अदालत का अगला फैसला दिसंबर में आएगा, जब चुनावी प्रक्रिया पूरी हो चुकी होगी।
CBI की दलीलें और लालू परिवार का पक्ष
CBI की ओर से दलील दी गई कि आरोपों के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं — जिसमें दस्तावेज़, जमीन की रजिस्ट्री और नियुक्ति पत्र शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि जिन लोगों को रेलवे में नौकरी मिली, उनकी संपत्ति बाद में लालू यादव के परिवार या उनके सहयोगियों के नाम दर्ज कराई गई। वहीं लालू परिवार की ओर से वकीलों ने अदालत में कहा कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और इसमें किसी तरह की प्रत्यक्ष रिश्वत या गलत नियुक्ति साबित नहीं हुई है।
लालू परिवार की रणनीति
जानकारों के मुताबिक, राजद सुप्रीमो लालू यादव फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली में हैं, जबकि तेजस्वी यादव बिहार में चुनावी प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। इस फैसले के टलने से उन्हें अभियान पर फोकस बनाए रखने का मौका मिला है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि लालू परिवार कोर्ट की प्रक्रिया का सम्मान करता है और “सच्चाई अंततः सामने आएगी।
अब 4 दिसंबर को अगली सुनवाई
कोर्ट ने अगली तारीख 4 दिसंबर तय करते हुए सभी आरोपियों को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। तब अदालत यह तय करेगी कि क्या लालू परिवार और अन्य आरोपियों पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएं या नहीं।
राजनीतिक असर
इस घटनाक्रम से बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एनडीए खेमे के नेताओं का कहना है कि “लालू परिवार को अदालत से राहत तो मिल गई है, लेकिन सच ज्यादा देर नहीं छिप सकता। वहीं आरजेडी नेताओं का कहना है कि “यह मामला शुरू से ही राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था और अदालत ने आज उसी की पुष्टि की है। फिलहाल, “लैंड फॉर जॉब” केस में फैसला टलने से लालू यादव और उनके परिवार को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत जरूर मिली है। लेकिन जांच एजेंसियों और अदालत की आगे की कार्यवाही तय करेगी कि आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी मोड़ लेता है या राजनीतिक रंग। प्रकाश कुमार पांडेय





