बिहार चुनाव: शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान में आज सीएम योगी, तीन जिलों में आज चलेंगे शब्दबाण

Bihar Elections CM Yogi to visit Shahabuddin stronghold Siwan

बिहार चुनाव: शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान में आज सीएम योगी, तीन जिलों में आज चलेंगे शब्दबाण

बिहार विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है और पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होनी है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे चुनावी सरगर्मी भी तेज होती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कई बड़े नेता राज्य में जनसभाओं के जरिए मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी एनडीए के लिए स्टार प्रचारक के रूप में बिहार के दौरे पर हैं।

आज सीएम योगी का फोकस बिहार के तीन जिलों — सीवान, भोजपुर और बक्सर — पर रहने वाला है। खास बात यह है कि इन तीनों जिलों में एनडीए की स्थिति बहुत मजबूत नहीं मानी जाती। पार्टी योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्व छवि और पूर्वांचल में उनकी लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश कर रही है।

सीवान में शहाबुद्दीन के गढ़ में सीएम योगी की एंट्री

योगी आदित्यनाथ आज अपनी पहली जनसभा सीवान जिले के रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में करेंगे। यह वही जिला है जो कभी डॉन से नेता बने मोहम्मद शहाबुद्दीन का गढ़ हुआ करता था। 1990 के दशक में सीवान में उनका दबदबा ऐसा था कि विपक्षी दल यहां पैर रखने से भी कतराते थे। शहाबुद्दीन चार बार सीवान से सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं। उनके निधन के बाद अब आरजेडी ने उनके बेटे ओसामा शाहाब को मैदान में उतारा है, जो लंदन से पढ़ाई कर लौटे हैं। वहीं, एनडीए की ओर से जेडीयू प्रत्याशी विकास कुमार सिंह इस सीट से चुनावी मैदान में हैं। सीवान की राजनीति में मुस्लिम वोटरों की संख्या निर्णायक मानी जाती है। यहां करीब 18 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है। लोकसभा चुनावों में अब तक 16 में से 8 बार मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। 2020 के विधानसभा चुनाव में सीवान की 8 में से 6 सीटों पर महागठबंधन का कब्जा रहा था, जबकि एनडीए केवल 2 सीटें जीत पाया था। ऐसे में योगी आदित्यनाथ की यह रैली भाजपा-जेडीयू गठबंधन के लिए नई ऊर्जा भरने का प्रयास मानी जा रही है।

दानापुर और सहरसा में पहले ही कर चुके हैं प्रचार

योगी आदित्यनाथ इससे पहले पटना के दानापुर और सहरसा में जनसभाएं कर चुके हैं। दानापुर में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी रामकृपाल यादव के समर्थन में रैली की थी और विपक्ष पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आरजेडी और कांग्रेस चुनाव आयोग के नियमों का विरोध कर “विकास बनाम बुर्के” की राजनीति कर रही हैं। सहरसा में उन्होंने डॉक्टर आलोक रंजन झा के समर्थन में सभा की थी, जो कोशी-सीमांचल बेल्ट का इलाका है और जहां मुस्लिम आबादी भी काफी है। दोनों जगह योगी ने महागठबंधन पर “घुसपैठियों को संरक्षण” देने और “जातीय राजनीति करने” का आरोप लगाया था।

भोजपुर में एनडीए की मुश्किलें

सीवान के बाद योगी आदित्यनाथ भोजपुर पहुंचेंगे, जिसे वामपंथ का गढ़ कहा जाता है। यहां की 7 विधानसभा सीटों में से 2020 में एनडीए को केवल 2 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि बाकी 5 सीटें महागठबंधन के खाते में गई थीं। हालांकि पिछले साल हुए तरारी उपचुनाव में बीजेपी ने एक सीट झटक ली थी, जिससे एनडीए का आंकड़ा अब 3 पर पहुंच गया है। आरा और बड़हरा सीट पर पिछले चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले हुए थे — आरा में बीजेपी ने मात्र 3,002 वोटों और बड़हरा में 4,973 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। जबकि जिन 4 सीटों पर महागठबंधन को जीत मिली, वहां हार-जीत का अंतर 20 हजार से अधिक वोटों का रहा। ऐसे में भोजपुर एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है। योगी आदित्यनाथ यहां शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में जनसभा करेंगे, जहां बीजेपी प्रत्याशी स्थानीय समीकरणों के सहारे मुकाबला कर रहे हैं।

बक्सर में पिछली बार नहीं खुला एनडीए का खाता

योगी का आज का तीसरा पड़ाव बक्सर रहेगा, जो उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा जिला है। 2020 के चुनाव में बक्सर एनडीए के लिए सबसे निराशाजनक जिला साबित हुआ था — यहां की चारों सीटें महागठबंधन के खाते में गई थीं।
बक्सर सीट पर एनडीए को मात्र 3,892 वोटों के अंतर से हार मिली थी, जबकि बाकी तीन सीटों पर हार-जीत का अंतर 21 हजार से अधिक रहा। इस बार एनडीए की कोशिश होगी कि योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का फायदा उठाकर बक्सर में स्थिति सुधारी जाए।

सीवान-भोजपुर-बक्सर में हिंदुत्व की लहर भुनाने की कोशिश

इन तीनों जिलों की एक समानता है — ये सभी उत्तर प्रदेश से सटे हुए हैं और योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर से इनकी दूरी तीन से साढ़े तीन घंटे की है। पूर्वांचल के इन इलाकों में योगी की हिंदुत्ववादी छवि और सख्त प्रशासक की पहचान उन्हें एक खास प्रभाव देती है।
बीजेपी की रणनीति साफ है — सीमावर्ती इलाकों में योगी की लोकप्रियता और धार्मिक मुद्दों के जरिए एनडीए को एकजुट वोट बैंक दिलाना। पार्टी को उम्मीद है कि योगी की सभाओं से कार्यकर्ताओं में नया जोश आएगा और मुस्लिम बहुल सीटों पर भी हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण होगा।

शहाबुद्दीन के बेटे पर सबकी नजर

सीवान की राजनीति में इस बार सबसे बड़ी दिलचस्पी ओसामा शाहाब को लेकर है। आरजेडी ने दो बार के विधायक हरिशंकर यादव का टिकट काटकर उन्हें मैदान में उतारा है। शहाबुद्दीन के पुराने प्रभाव क्षेत्र में ओसामा की यह पहली बड़ी परीक्षा होगी।
सीवान में एनडीए का पिछला प्रदर्शन कमजोर रहा था, और पिछली बार तीन सीटों (सीवान, महाराजगंज, बरहरिया) पर उसे 4,000 से भी कम वोटों के अंतर से हार झेलनी पड़ी थी। इसलिए इस बार एनडीए पूरा जोर लगाए हुए है।

चुनावी समीकरणों में सीएम योगी का असर

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सीएम योगी की सभाओं का असर सीमावर्ती जिलों में जरूर दिखेगा। हिंदुत्व के मुद्दे और मोदी-योगी की जोड़ी का चेहरा भाजपा समर्थकों में उत्साह पैदा करता है। हालांकि, स्थानीय समीकरण और जातिगत वोट बैंक बिहार में अब भी निर्णायक हैं। आरजेडी अपने मजबूत यादव-मुस्लिम गठजोड़ पर भरोसा कर रही है, जबकि एनडीए हिंदू एकता और विकास के मुद्दे को उभारने की कोशिश कर रहा है।

बिहार के चुनावी रण में आज का दिन एनडीए के लिए अहम साबित हो सकता है। सीएम योगी आदित्यनाथ की तीनों रैलियां ऐसे जिलों में हैं, जहां गठबंधन पिछली बार पिछड़ गया था। सीवान में शहाबुद्दीन की विरासत से मुकाबला, भोजपुर में वाम प्रभाव को चुनौती और बक्सर में खाता खोलने की कोशिश — इन तीनों मोर्चों पर योगी की परीक्षा है। अब देखना यह होगा कि उनकी सभाओं से एनडीए के वोट बैंक में कितनी जान आती है और क्या हिंदुत्व का यह कार्ड बिहार की सियासत में कोई बड़ा बदलाव ला पाता है।

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