बिहार चुनाव 2025: कास्ट, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के तिकड़ी एजेंडे से लैस NDA, तेजस्वी-राहुल की जोड़ी के लिए ये सियासी चुनौती
बिहार में अक्टूबर-नवंबर 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से चढ़ रहा है। सत्ता में वापसी को लेकर INDIA गठबंधन की उम्मीदें तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी से टिकी हैं, लेकिन NDA ने एक ऐसा सियासी चक्रव्यूह रच दिया है जिसे भेदना आसान नहीं लगता।
नीतीश-मोदी की डबल इंजन जोड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी NDA की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। मोदी सरकार के नेतृत्व में हुए “ऑपरेशन सिंदूर” को राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में भुनाने की रणनीति के साथ NDA ने चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर ली है। पीएम मोदी द्वारा बिहार से ही पाकिस्तान को “जवाब” देने की घोषणा को बार-बार उछालकर राष्ट्रवाद को चुनावी एजेंडे के केंद्र में लाया जा रहा है।
हिंदुत्व की धार
NDA विशेष रूप से बीजेपी ने हिंदुत्व के एजेंडे को भी मजबूती से साधा है। केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह की आक्रामक हिंदुत्व छवि और माता सीता मंदिर निर्माण की घोषणा, राम मंदिर के तर्ज पर एक भावनात्मक माहौल तैयार कर रही है। इस दिशा में “सनातन यात्रा” जैसे अभियानों से बहुसंख्यक हिंदू वोटों को एकजुट करने की कवायद हो रही है।
जातीय समीकरण: NDA का मास्टरस्ट्रोक
बिहार में जाति सबसे निर्णायक फैक्टर रही है। NDA ने बीजेपी (सवर्ण, वैश्य, ओबीसी), जेडीयू (कुर्मी, अतिपिछड़ा), चिराग पासवान (दुसाध), मांझी (मुसहर), उपेंद्र कुशवाहा (कोइरी) जैसे नेताओं को एक मंच पर लाकर लगभग 65% से अधिक वोट शेयर को अपने पाले में करने की योजना बनाई है।
जातीय जनगणना पर NDA की चाल
जहां INDIA गठबंधन जातिगत जनगणना को मुद्दा बनाकर NDA पर हमलावर था, वहीं मोदी सरकार ने खुद ही आगामी जनगणना में जाति आधारित गणना कराने की घोषणा कर दी है। यह कदम विपक्ष की रणनीति को कमजोर करने वाला साबित हो सकता है।
राहुल-तेजस्वी के सामने रणनीतिक चुनौती
INDA गठबंधन को अब NDA की राष्ट्रवाद, जाति और हिंदुत्व की मजबूत तिकड़ी एजेंडा की काट खोजनी होगी। लोकसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न मिलने के बाद विपक्ष को बिहार में मजबूती से वापसी करने के लिए नए नैरेटिव, प्रभावशाली चेहरे और ठोस मुद्दों की आवश्यकता होगी। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेगा। NDA फिलहाल हर मोर्चे पर आगे दिख रही है—नाम, काम, जाति और भावनात्मक नैरेटिव के साथ। ऐसे में तेजस्वी-राहुल की जोड़ी के लिए यह परीक्षा बेहद कठिन होने वाली है। …(प्रकाश कुमार पांडेय)




